रायपुर के जिला अस्पताल में लावारिस लाशों का ढेर, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने छत्तीसगढ़ सरकार से मांगी रिपोर्ट

रायपुर: राजधानी रायपुर के जिला अस्पताल से जुड़ी चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि अस्पताल के शवगृह में कई लावारिस शव पड़े हुए हैं और उनके अंतिम संस्कार के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। इसी को आधार बनाकर आयोग ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

अंतिम संस्कार के लिए नहीं मिली जगह

रिपोर्ट्स के अनुसार, रायपुर जिला प्रशासन ने करीब तीन साल पहले लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के लिए तीन एकड़ जमीन आवंटित की थी। इसी जगह पर एक गैर-सरकारी संगठन द्वारा अब तक 800 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है। बताया जा रहा है कि जमीन को मिट्टी भरकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन प्रशासन की ओर से इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया।

मानवाधिकार उल्लंघन का गंभीर मामला

आयोग ने अपनी टिप्पणी में कहा कि यदि मीडिया रिपोर्ट सही साबित होती है, तो यह मृतकों के मानवाधिकार का गंभीर उल्लंघन है। आयोग ने साफ कहा कि जैसे जीवित व्यक्ति को सम्मान और गरिमा का अधिकार है, वैसे ही मृतकों को भी उनके धर्म और परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार का अधिकार है।

NHRC ने पहले भी जारी की थी गाइडलाइन

मानवाधिकार आयोग ने वर्ष 2021 में एक परामर्श जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 न केवल जीवित व्यक्तियों बल्कि मृत शरीर पर भी लागू होता है। यानी मृत्यु के बाद भी व्यक्ति की गरिमा और सम्मान।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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