
Bilaspur Housing Board Badam Protest Case: बिलासपुर के तिफरा स्थित हाउसिंग बोर्ड कार्यालय में एक ऐसा वाकया सामने आया जिसने सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नामांतरण की फाइल गुम होने से परेशान एक युवक ने विरोध का ऐसा तरीका निकाला कि अधिकारियों की बोलती बंद हो गई। युवक ने प्रभारी अधिकारी की मेज पर बादाम बिखेर दिए और तंज कसते हुए कहा कि अपनी याददाश्त तेज करने के लिए इन्हें खाइए, ताकि मेरी खोई हुई फाइल आपको याद आ सके। इस अनोखे प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया, जिसके बाद शासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो जिम्मेदार अधिकारियों को पद से हटा दिया है।
एक साल से चक्कर काट रहा था पीड़ित युवक
Bilaspur office Viral Video: यह पूरा मामला ईडब्ल्यूएस (EWS) फ्लैट के नामांतरण से जुड़ा है। तरुण साहू नाम के युवक ने करीब एक साल पहले रिसेल में एक फ्लैट खरीदा था। नियमानुसार खरीद-बिक्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होनी थी, लेकिन हाउसिंग बोर्ड के दफ्तर में उसकी फाइल कहीं धूल खा रही थी या जानबूझकर दबा दी गई थी। तरुण पिछले एक साल से दफ्तर की सीढ़ियां घिस रहा था, लेकिन हर बार उसे यही रटा-रटाया जवाब मिलता कि ‘आपकी फाइल मिल नहीं रही है’। सिस्टम की इसी टालमटोल और लापरवाही से तंग आकर उसने यह गांधीवादी लेकिन असरदार रास्ता चुना।
‘याददाश्त तेज करिए साहब’ और वायरल हो गया वीडियो
Bilaspur News: जब तरुण अपनी शिकायत लेकर उप संपदा अधिकारी के केबिन में पहुंचा, तो उसने बादाम की थैली मेज पर खाली कर दी। उसने अधिकारियों से सीधे शब्दों में कहा कि अगर फाइल याद नहीं आ रही है, तो बादाम खाइए, शायद इससे दिमाग काम करने लगे। मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने इस पूरी घटना का मोबाइल से वीडियो बना लिया। वीडियो वायरल होते ही विभाग की जमकर किरकिरी हुई और लोगों ने सरकारी दफ्तरों में फाइलों के रखरखाव और भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
गृह निर्माण मंडल की बड़ी कार्रवाई
वीडियो का संज्ञान लेते हुए छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल ने सख्त रुख अपनाया है। लापरवाही बरतने के आरोप में प्रभारी संपदा अधिकारी एलपी बंजारे और कॉलोनी प्रभारी वरिष्ठ सहायक पूनम बंजारे पर गाज गिरी है। इन दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से उनके वर्तमान प्रभार से मुक्त कर दिया गया है। आदेश के अनुसार, इन्हें अब नवा रायपुर स्थित मुख्यालय के संपदा शाखा में उनके मूल पद पर संलग्न कर दिया गया है। इस कार्रवाई को जनता के बीच यह संदेश देने की कोशिश माना जा रहा है कि काम में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सरकारी दफ्तरों में फाइल गुम होना आम समस्या?
तरुण साहू का यह विरोध केवल एक व्यक्ति की परेशानी नहीं बल्कि हजारों उन आम लोगों की आवाज है जो रोज दफ्तरों के चक्कर काटते हैं। अक्सर दस्तावेजों के गुम होने की बात कहकर आवेदकों को परेशान किया जाता है या उन्हें अनुचित मांग के लिए मजबूर किया जाता है। तरुण ने बताया कि उसने अधिकारियों से कई बार मिन्नतें कीं, लेकिन जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तब उन्हें यह अहसास कराना जरूरी था कि उनकी भूलने की आदत जनता के लिए कितनी भारी पड़ रही है।
नामांतरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग
इस घटना के बाद अब हाउसिंग बोर्ड में फाइलों के डिजिटलीकरण और पारदर्शी कामकाज की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि अगर सारी प्रक्रिया ऑनलाइन हो और फाइल ट्रैक करने की सुविधा मिले, तो अधिकारियों को ‘फाइल गुमने’ का बहाना बनाने का मौका नहीं मिलेगा। फिलहाल, दो अधिकारियों पर हुई कार्रवाई से विभाग में हड़कंप मचा है। पीड़ित युवक को उम्मीद है कि अब कम से कम उसकी फाइल ढूंढ ली जाएगी और उसका रुका हुआ काम पूरा होगा।



