
पखांजूर: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के अंतर्गत आने वाले पखांजूर (कोयलीबेड़ा) क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। इस ब्लॉक की डेढ़ लाख से अधिक आबादी इन दिनों केवल एक ही संजीवनी 108 एम्बुलेंस के भरोसे जीने को मजबूर है। स्थिति यह है कि 400 से अधिक गांवों के फैलाव वाले इस इलाके में आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है। सड़क दुर्घटना हो या गंभीर बीमारी, लोगों को समय पर सरकारी एम्बुलेंस नहीं मिल पा रही है। विडंबना यह है कि सात प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और एक सिविल अस्पताल होने के बावजूद परिवहन के संसाधनों की भारी कमी है।
एक साल से ठप पड़ी है सेवा: कॉल करने पर मिलता है टका सा जवाब, निजी वाहनों के लिए जेब ढीली कर रहे लोग
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले करीब एक साल से एम्बुलेंस सेवा का यही हाल है। जब भी किसी हादसे या इमरजेंसी के वक्त 108 नंबर पर संपर्क किया जाता है, तो अधिकतर समय फोन रिसीव नहीं होता। अगर कॉल लग भी जाए, तो कंट्रोल रूम से जवाब मिलता है कि एम्बुलेंस अभी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बेबस परिजनों को मजबूरी में निजी गाड़ियां या टैक्सियां करनी पड़ती हैं, जिसके लिए उन्हें हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। गरीब ग्रामीणों के लिए मुफ्त एम्बुलेंस सेवा महज एक कागजी वादा बनकर रह गई है।
हादसों के बाद तड़पते रहते हैं घायल: विशाल भौगोलिक क्षेत्र में नाकाफी साबित हो रहा एक वाहन
कोयलीबेड़ा ब्लॉक का इलाका काफी बड़ा और दुर्गम है। यहां रोजाना होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्ति अस्पताल पहुंचने के लिए घंटों एम्बुलेंस का इंतजार करता रहता है। चूंकि एक ही गाड़ी पूरे ब्लॉक के चक्कर लगाती है, इसलिए वह एक समय में केवल एक ही मरीज तक पहुंच पाती है। अगर एक साथ दो जगहों से इमरजेंसी कॉल आ जाए, तो दूसरे मरीज को भगवान भरोसे छोड़ना पड़ता है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने कई बार शासन-प्रशासन से अतिरिक्त एम्बुलेंस की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस सुनवाई नहीं हुई है।
बीएमओ ने स्वीकार की समस्या: उच्च अधिकारियों को भेजी गई रिपोर्ट, समाधान का अब भी इंतजार
इस गंभीर संकट पर ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) संजीव वैष्णव ने भी अपनी बेबसी जाहिर की है। उन्होंने स्वीकार किया कि क्षेत्र की विशाल जनसंख्या और क्षेत्रफल को देखते हुए एक एम्बुलेंस ऊंट के मुंह में जीरा समान है। बीएमओ के मुताबिक, उन्होंने उच्च अधिकारियों को कई बार लिखित में जानकारी दी है कि ब्लॉक को कम से कम तीन से चार नई एम्बुलेंस की तत्काल जरूरत है। अधिकारी भी मानते हैं कि यह मुद्दा सीधे तौर पर लोगों की जान से जुड़ा है, लेकिन नई गाड़ियां कब तक मिलेंगी, इस पर अब भी सस्पेंस बना हुआ है।



