CG Liquor Brand Shortage: शराब प्रेमियों को बड़ा झटका: अंग्रेजी ब्रांड्स की बोतलें और क्वार्टर दुकानों से पूरी तरह गायब, जानिए क्या है असली वजह

CG Liquor Brand Shortage: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के मदिरा प्रेमियों के लिए इन दिनों अपनी पसंद का ब्रांड ढूंढना एक बड़ी चुनौती बन गया है. शहर की विदेशी और प्रीमियम शराब दुकानों से अंग्रेजी शराब के कई नामी और चर्चित ब्रांड्स पूरी तरह गायब हो चुके हैं. दुकान पहुंचने वाले ग्राहकों को खाली हाथ या फिर किसी अनजान नए ब्रांड के साथ वापस लौटना पड़ रहा है. शराब दुकानों में काम करने वाले सेल्समैन का कहना है कि ऊपर से ही सप्लाई पूरी तरह ठप पड़ी है. इस किल्लत की वजह से शौकीनों के बीच भारी नाराजगी देखी जा रही है, जबकि आबकारी विभाग इसके पीछे पैकेजिंग के नियमों में होने वाले एक बड़े तकनीकी बदलाव को मुख्य वजह बता रहा है.

कांच के क्वार्टर बंद करने और प्लास्टिक शीशी के लिए नई मशीनें लगाने से रुकी सप्लाई

जब इस भारी किल्लत को लेकर आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने इसके पीछे की तकनीकी वजह साफ की. अफसरों के मुताबिक, अब बाजार में कांच की जगह प्लास्टिक की बोतलों और शीशियों (पेट बॉटल्स) में शराब बेचने का नया नियम लागू किया जा रहा है. इसके लिए शराब निर्माता कंपनियों को अपनी पुरानी पैकेजिंग यूनिट को बदलना पड़ रहा है. कंपनियां अब नई मशीनें स्थापित करने में जुटी हैं, जिसके कारण उत्पादन और सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित हुई है. वर्तमान में दुकानों में जो कुछ भी क्वार्टर मिल रहे हैं, वे सब कंपनियों का पुराना बचा हुआ स्टॉक हैं जो तेजी से खत्म हो रहा है.

दुकानों से गायब हुए रॉयल स्टैग और मैकडॉवेल्स जैसे चर्चित ब्रांड्स, ग्राहक परेशान

रायपुर की प्रीमियम और सामान्य अंग्रेजी शराब दुकानों से 760 रुपये से लेकर 800 रुपये की रेंज वाले सबसे ज्यादा बिकने वाले ब्रांड्स नदारद हैं. इनमें रॉयल स्टैग, रॉयल चैलेंज और मैकडॉवेल्स नंबर-1 जैसे लोकप्रिय नाम शामिल हैं. स्थिति यह है कि पिछले एक महीने से इन ब्रांड्स के क्वार्टर और पूरी बोतलें काउंटर पर नजर नहीं आई हैं. शौकीनों का कहना है कि पैसे पूरे देने के बाद भी उन्हें ऐसे नए और अनजान ब्रांड्स की शराब खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है, जिनका नाम उन्होंने आज से पहले छत्तीसगढ़ के बाजार में कभी सुना तक नहीं था.

गर्मी का सीजन बताकर प्रीमियम दुकानों से रम की पूरी स्टॉक सप्लाई पर लगी रोक

चर्चित विदेशी शराब के साथ-साथ रायपुर की अधिकांश दुकानों से रम का स्टॉक भी पूरी तरह साफ हो चुका है. जब अंग्रेजी शराब दुकानों के सेल्समैन और मैनेजरों से इस बारे में जानकारी ली गई, तो उन्होंने बताया कि रम की किल्लत के पीछे एक व्यावहारिक कारण है. दरअसल, आबकारी विभाग और कंपनियों का मानना है कि भीषण गर्मी के मौसम में रम की मांग न के बराबर हो जाती है. इसी वजह से मांग के अभाव को देखते हुए जिला डिपो से दुकानों को रम की सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी गई है. अब पूरा ध्यान केवल बीयर और अन्य ठंडे ड्रिंक्स की उपलब्धता पर केंद्रित है.

आबकारी विभाग का दावा, इस महीने के अंत या अगले महीने से सामान्य होगी व्यवस्था

राजधानी के उपभोक्ताओं की बढ़ती नाराजगी को देखते हुए आबकारी विभाग ने अब आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. अधिकारियों ने बताया कि जिन शराब कंपनियों के साथ चालू वित्तीय वर्ष के लिए सरकार का आधिकारिक एग्रीमेंट हुआ है, उनके जिम्मेदार अधिकारियों की एक बैठक बुलाई गई थी. कंपनियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी नई पैकेजिंग मशीनों का ट्रायल जल्द से जल्द पूरा करें. विभाग के अफसरों का दावा है कि इस जून महीने के अंत तक या आगामी जुलाई की शुरुआत से बाजार में पसंदीदा ब्रांड्स की सप्लाई फिर से पूरी तरह सामान्य हो जाएगी.

कीमतें बढ़ने के बाद भी मनपसंद ब्रांड न मिलने से शराब उपभोक्ताओं में भारी रोष

लगातार कई हफ्तों से चल रही इस अव्यवस्था के कारण सरकारी शराब दुकानों के काउंटरों पर रोजाना विवाद की स्थिति बन रही है. ग्राहकों का तर्क है कि सरकार ने चालू सत्र में शराब की कीमतों में अच्छी खासी बढ़ोतरी की है. उपभोक्ताओं का कहना है कि जब वे महंगी दरों पर भुगतान करने के लिए तैयार हैं, तो सरकार और आबकारी विभाग को उनकी पसंद का ब्रांड उपलब्ध कराना ही चाहिए. ब्रांड न मिलने से न केवल ग्राहकों का बजट प्रभावित हो रहा है, बल्कि अवैध रूप से दूसरे राज्यों से आने वाली शराब की तस्करी का खतरा भी शहर में बढ़ता जा रहा है.

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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