CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें स्कूलों में सरस्वती वंदना अनिवार्य बालश्रम पर बड़ा एक्शन, 34 बच्चे मुक्त सिबिल स्कोर के नाम पर छात्रों से लाखों की ठगी बालोद कलेक्टर को झटका, प्राचार्य का निलंबन रद्द हैदराबाद में छत्तीसगढ़ को मिले 9,580 करोड़ के निवेश प्रस्ताव फ्लैट खरीदारों के मालिकाना हक पर उठे सवाल स्लीपर बसों के खिलाफ परिवहन विभाग का महाअभियान, 350 गाड़ियां जब्त वक्फ बोर्ड का बड़ा फैसला, दरगाहों में डीजे पर पाबंदी पुलिस नहीं है प्राइवेट रिकवरी एजेंट, हाईकोर्ट की फटकार डिप्टी सीएम के सामने खुली जल जीवन मिशन की पोल, दो इंजीनियरों को नोटिस समेत पढ़ें छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें…

CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की सभी बड़ी और छोटी खबरें रोजाना हमारी नजर में रहती हैं। दक्षिण कोसल के विशेष सेगमेंट ‘CG की 10 बड़ी खबरें’ में हम आपको समाचार जगत की हर गतिविधि का अपडेट सरल और सहज भाषा में प्रदान करेंगे। तो आइए, पत्रकारिता की इस दुनिया में बने रहें और छत्तीसगढ़ की हर ताजातरीन खबर से अपनी जानकारी को और विस्तृत करे
छत्तीसगढ़ के स्कूलों में अब सरस्वती वंदना अनिवार्य, सरकार ने जारी किया फरमान
छत्तीसगढ़ के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में अब पढ़ाई शुरू होने से पहले राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के साथ-साथ सरस्वती वंदना करना जरूरी होगा। राज्य सरकार ने नए शिक्षा सत्र से इसे अनिवार्य कर दिया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं। लापरवाही बरतने वाले प्राचार्यों और स्कूल प्रबंधन पर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। विभाग की ओर से जारी समय-सारणी के मुताबिक, सुबह की प्रार्थना सभा में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र और महापुरुषों की जीवनी का पाठ किया जाएगा। इसके साथ ही दोपहर में मिड-डे मील के समय सभी बच्चे एक साथ भोजन मंत्र गाएंगे। छुट्टी के वक्त राज्यगीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र का पाठ करना होगा। सरकार का मानना है कि इन गतिविधियों से बच्चों में अनुशासन, नैतिक मूल्य और अपनी संस्कृति के प्रति जुड़ाव पैदा होगा।
बाल श्रम निषेध दिवस पर बड़ा एक्शन, फैक्ट्रियों से मुक्त कराए गए 34 बच्चे
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है। आयोग की टीम ने पुलिस और प्रशासन के साथ मिलकर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से 34 नाबालिग बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराया। इसमें रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र की एक लोहे की फैक्ट्री से 9 बच्चे, बिलासपुर रेलवे स्टेशन से 7 बच्चे और रायपुर जीआरपी की मदद से 4 बच्चों का रेस्क्यू किया गया। इसके अलावा जशपुर जिले में भी 14 बच्चे बाल मजदूरी करते मिले। उरला की मारुति नंदन स्ट्रक्चर इंडस्ट्रीज में जब आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में छापा मारा गया, तो वहां बच्चे बेहद खतरनाक माहौल में काम करते पाए गए। पुलिस ने ठेकेदारों और फैक्ट्री मालिकों के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि इन बच्चों को उत्तर प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से एक ठेकेदार के जरिए यहां लाया गया था। फिलहाल सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति को सौंपकर उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जा रही है।
सिबिल स्कोर बढ़ाने के नाम पर बड़ा फ्रॉड, दर्जनों छात्रों से लाखों की ठगी
दुर्ग पुलिस ने कॉलेज छात्रों को झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। आरोपी छात्रों को सिबिल स्कोर बढ़ाने और हर फाइनेंस पर 2 से 3 हजार रुपये कमीशन देने का लालच देते थे। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी दीपक जोशी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य आरोपी ऋषभ शर्मा और अनिरुद्ध सिंह अभी फरार हैं। पीड़ितों ने दुर्ग के पद्मनाभपुर थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। आरोपियों ने करीब 40 छात्रों के आधार कार्ड, पहचान पत्र और बैंक पासबुक का इस्तेमाल कर महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे टीवी, फ्रिज और एसी फाइनेंस करवा लिए। छात्रों को भरोसा दिया गया था कि उन्हें एक भी किस्त नहीं भरनी पड़ेगी और सारी ईएमआई आरोपी खुद जमा करेंगे। शुरुआत में कुछ किस्तें भरकर आरोपियों ने छात्रों का भरोसा जीता, लेकिन अप्रैल के बाद वे किस्त जमा करना बंद कर फरार हो गए। इसके बाद जब फाइनेंस कंपनियों के रिकवरी एजेंट छात्रों के घर पहुंचने लगे, तब इस पूरे घोटाले का पता चला।
हाईकोर्ट से बालोद कलेक्टर को झटका, प्राचार्य का निलंबन आदेश रद्द
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बालोद कलेक्टर द्वारा एक हाईस्कूल प्राचार्य को सस्पेंड करने के आदेश को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया है। जस्टिस बीडी गुरु की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए साफ किया कि हाईस्कूल प्राचार्य द्वितीय श्रेणी के राजपत्रित अधिकारी होते हैं। नियमावली के अनुसार कलेक्टर के पास इन अधिकारियों को निलंबित करने का कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह सिद्धांत पहले से स्थापित है कि सक्षम प्राधिकारी ही ऐसी कार्रवाई कर सकता है। यह पूरा मामला बालोद के गुरूर ब्लॉक का है, जहां शासकीय हाई स्कूल सोहपुर के प्राचार्य बाल सिंह मंडावी को कलेक्टर ने 7 मई 2026 को सस्पेंड कर दिया था। दरअसल, बोर्ड परीक्षाओं के खराब नतीजों को लेकर जिला प्रशासन ने 8 प्राचार्यों को निलंबित किया था और 14 की वेतन वृद्धि रोक दी थी। शिक्षक संगठनों ने इस कार्रवाई को एकतरफा बताया था, जिसके बाद प्राचार्य ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने सरकार को छूट दी है कि वे चाहें तो नियम के तहत सक्षम अधिकारी से नई कार्रवाई करा सकते हैं।
हैदराबाद में छत्तीसगढ़ को मिले 9,580 करोड़ के निवेश प्रस्ताव, बनेगा डेटा और सोलर हब
हैदराबाद में आयोजित छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम में राज्य सरकार को बड़ी कामयाबी मिली है। देश की सात बड़ी कंपनियों ने छत्तीसगढ़ में कुल 9,580 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर सहमति जताई है। इससे प्रदेश में 7,800 से अधिक रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उद्योगपतियों को आमंत्रित करते हुए कहा कि नई औद्योगिक नीति आने के बाद से अब तक राज्य को कुल 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। इस आयोजन में सबसे बड़ा प्रस्ताव हाइपरनेक्स्ट डेटा सेंटर लिमिटेड की ओर से आया है, जो 4,200 करोड़ रुपये की लागत से देश का पहला समर्पित डिजास्टर रिकवरी डेटा सेंटर कैंपस बनाएगी। इसके अलावा फीग्रेड एंड कंपनी सीमेंट सेक्टर में 2,912 करोड़ रुपये और निवाई लैब्स एआई व सेमीकंडक्टर क्षेत्र में 1,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। सौर ऊर्जा उपकरण बनाने के लिए एसजी मार्ट 700 करोड़ और कपड़ा उद्योग के लिए सरवणा मिल्स 528 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
फ्लैट खरीदारों के मालिकाना हक पर उठे सवाल, आप ने सरकार को घेरा
छत्तीसगढ़ में बहुमंजिला इमारतों और फ्लैटों के मालिकाना हक को लेकर आम आदमी पार्टी ने राज्य सरकार और बिल्डरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी नेताओं ने रायपुर में एक पत्रकार वार्ता के दौरान आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रकोष्ठ स्वामित्व अधिनियम 1976 के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। इसके कारण शहरों में फ्लैट या दुकान खरीदने वाले लाखों लोग कानूनी रूप से जमीन के असली मालिक नहीं बन पाए हैं। आप नेताओं के मुताबिक, फ्लैट खरीदारों के पास सिर्फ दीवारों की रजिस्ट्री है, जबकि जिस जमीन पर बिल्डिंग खड़ी है वह रिकॉर्ड में अब भी बिल्डर के नाम पर दर्ज है। पार्टी का कहना है कि अगर कोई प्राकृतिक आपदा आती है और बिल्डिंग गिर जाती है, तो खरीदारों के पास कुछ नहीं बचेगा। उन्होंने सहकारी संस्थाओं के अधिकारियों पर बिल्डरों से मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि जानबूझकर हाउसिंग सोसायटियां नहीं बनने दी जा रही हैं। इस मामले में राज्यपाल को पत्र सौंपकर दखल देने की मांग की गई है।
स्लीपर बसों के खिलाफ परिवहन विभाग की बड़ी कार्रवाई, 350 गाड़ियां जब्त
छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देशों के बाद सड़कों पर सुरक्षा को लेकर एक विशेष चेकिंग अभियान चलाया है। इस कार्रवाई के तहत प्रदेशभर में 350 से ज्यादा बसों की जांच की गई और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर 5.50 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया। विभाग का मुख्य फोकस स्लीपर बसों में नियमों के खिलाफ बनाए गए केबिन और अवैध स्लाइडर हटाने पर रहा, जिससे हादसे के वक्त यात्री फंसने से बच सकें। परिवहन आयुक्त एस. प्रकाश ने सभी आरटीओ को निर्देश दिए हैं कि बसों के फिटनेस, परमिट और अग्निशमन यंत्रों की कड़ाई से जांच की जाए। सभी यात्री बसों में कम से कम 10 किलोग्राम क्षमता का फायर एक्स्टिंग्विशर और चालू हालत में जीपीएस होना जरूरी कर दिया गया है। विभाग ने साफ किया है कि जिन बस संचालकों ने अब तक अपनी गाड़ियों से अवैध केबिन नहीं हटाए हैं, उनके परमिट और ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
वक्फ बोर्ड का सख्त फैसला, दरगाहों में डीजे और नाच-गाने पर पाबंदी
छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने राज्य की सभी दरगाहों, मजारों और उर्स के कार्यक्रमों में डीजे, धुमाल और गैर-शरई गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगा दी है। बोर्ड के अध्यक्ष सलिमराज ने इस संबंध में राज्य के सभी जिलों के एसपी को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई करने को कहा है। रायपुर की एक धार्मिक संस्था द्वारा सौंपे गए मांग पत्र के बाद यह निर्णय लिया गया, जिसमें कहा गया था कि तेज आवाज में डीजे बजाना और फूहड़ कार्यक्रम करना सूफी परंपरा के खिलाफ है। नए नियमों के अनुसार, उर्स के दौरान संदल चादर का जुलूस सिर्फ रात 11 बजे तक ही निकाला जा सकेगा। इसके बाद किसी भी तरह के लाउडस्पीकर या आयोजन की अनुमति नहीं होगी। अगर कोई संस्था या व्यक्ति इस नियम को तोड़ता है, तो उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और मौके पर ही डीजे व अन्य उपकरण जब्त कर लिए जाएंगे। पुलिस और वक्फ बोर्ड की टीमें मिलकर इन आयोजनों की निगरानी करेंगी।
पुलिस प्राइवेट रिकवरी एजेंट नहीं है, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक कमर्शियल विवाद में पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने एक एनबीएफसी कंपनी के बैंक खाते से 53.47 करोड़ रुपये होल्ड करने के पुलिस के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि पुलिस का काम अपराध की जांच करना है, किसी व्यापारिक विवाद में एक पक्ष को फायदा पहुंचाने के लिए वसूली एजेंट की तरह काम करना नहीं। नई दिल्ली की ऑक्सीजो फाइनेंशियल सर्विसेज का खाता रायपुर के एक बैंक में है। पुलिस ने रायपुर की एक फर्म के साथ हुए विवाद की एफआईआर के बाद इस पूरे खाते को फ्रीज कर दिया था। कंपनी का कहना था कि वे इस एफआईआर में आरोपी नहीं हैं और पुलिस की इस कार्रवाई से उनका रोज का करोड़ों का टर्नओवर रुक गया। कोर्ट ने कहा कि कुछ लाख रुपये के विवाद के बदले एक वित्तीय संस्था के 53 करोड़ रुपये से ज्यादा रोकना पूरी तरह अतार्किक है और यह नए कानून बीएनएसएस के नियमों के खिलाफ है।
डिप्टी सीएम के दौरे पर खुली जल जीवन मिशन की पोल, दो इंजीनियरों को नोटिस
बस्तर संभाग के दौरे पर गए उप मुख्यमंत्री अरुण साव के सामने जल जीवन मिशन योजना की जमीनी हकीकत सामने आ गई। दंतेवाड़ा और कोण्डागांव जिलों में आयोजित जल अर्पण कार्यक्रमों के दौरान जब मुख्य अतिथि पहुंचे, तो नलों से पानी ही नहीं आया। गर्मी के इस मौसम में पानी न मिलने से नाराज ग्रामीणों ने डिप्टी सीएम के सामने ही विभागीय काम-काज की शिकायतों की झड़ी लगा दी। इस लापरवाही पर प्रमुख अभियंता ने दोनों जिलों के कार्यपालन अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दंतेवाड़ा के टेकनार गांव में 7 जून को और कोण्डागांव के बेड़मा गांव में 5 जून को आयोजित कार्यक्रमों में यह अव्यवस्था देखने को मिली। जांच में सामने आया कि पाइपलाइन तो बिछी है, लेकिन तकनीकी खामियों की वजह से कई मोहल्लों तक पानी पहुंच ही नहीं रहा है। प्रमुख अभियंता केके मरकाम ने कोण्डागांव के वीरेंद्र पांडेय और दंतेवाड़ा के एसपी मंडावी को सात दिनों के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।



