
Rajya Sabha Elections 2026: राज्यसभा चुनाव 2026 में अब तक 26 सीटों में से 14 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। इनमें भारतीय जनता पार्टी के 10 और कांग्रेस के 4 उम्मीदवार शामिल हैं। कर्नाटक से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा भी बिना मुकाबले राज्यसभा पहुंचे हैं। वहीं राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश में भी कई उम्मीदवारों ने निर्विरोध जीत दर्ज की है।
14 उम्मीदवार बिना मतदान के पहुंचे राज्यसभा,
गुरुवार को घोषित परिणामों में कुल 14 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। भाजपा के खाते में 10 और कांग्रेस के खाते में 4 सीटें गईं। कर्नाटक से मल्लिकार्जुन खड़गे और पवन खेड़ा की जीत सबसे चर्चित रही। इसके अलावा राजस्थान से भाजपा के सतीश पूनिया और अलका गुर्जर तथा कांग्रेस के नीरज डांगी भी निर्विरोध चुने गए हैं। गुजरात में भाजपा ने सभी चार सीटों पर कब्जा जमाते हुए अपने उम्मीदवारों को निर्विरोध जिताया। वहीं मध्य प्रदेश में भाजपा के रजनीश अग्रवाल, तरुण चुघ और महेश केवट को सफलता मिली।
मध्य प्रदेश में कांग्रेस को लगा झटका
मध्य प्रदेश की तीसरी सीट को लेकर कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था। पार्टी के पास आवश्यक संख्या बल होने का दावा भी था, लेकिन 9 जून को उनका नामांकन पत्र निरस्त कर दिया गया। इसके खिलाफ कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी, जहां मामले की सुनवाई को शुक्रवार तक के लिए टाल दिया गया। नामांकन खारिज होने के बाद भाजपा के तीनों उम्मीदवारों की जीत का रास्ता साफ हो गया और पार्टी ने सभी सीटें अपने नाम कर लीं।
12 सीटों पर 18 जून को होगा मतदान
अभी 12 सीटों पर चुनाव बाकी है। इनमें आंध्र प्रदेश की 4, झारखंड की 2 तथा मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, महाराष्ट्र और तमिलनाडु की एक-एक सीट शामिल हैं। राजनीतिक समीकरणों के अनुसार इन सीटों में भाजपा को 8, कांग्रेस को 1, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) को 2 और तमिलनाडु में TVK को 1 सीट मिलने की संभावना जताई जा रही है।
राज्यसभा में NDA की स्थिति और आगे का गणित
244 सदस्यों वाली राज्यसभा में फिलहाल एनडीए के पास 149 सांसद हैं। विपक्षी दलों के पास 78 सदस्य हैं, जबकि 17 सांसद ऐसे दलों से आते हैं जो किसी बड़े गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। आने वाले चुनावों और उपचुनावों के बाद एनडीए की स्थिति और मजबूत हो सकती है। खासकर आंध्र प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश में भाजपा को स्पष्ट बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। वहीं झारखंड और कर्नाटक में विपक्षी गठबंधन को लाभ मिलने की संभावना है।
राज्यवार समझिए किसे होगा फायदा
महाराष्ट्र और तमिलनाडु में रिक्त हुई सीटों पर उपचुनाव होंगे। महाराष्ट्र में एनसीपी की सुनेत्रा पवार के इस्तीफे से खाली हुई सीट एनडीए के खाते में जा सकती है, जबकि तमिलनाडु में एआईएडीएमके की सीट सत्तारूढ़ TVK के पक्ष में जा सकती है, जिसे कांग्रेस का समर्थन प्राप्त है। आंध्र प्रदेश की चारों सीटों पर एनडीए को बढ़त मानी जा रही है। गुजरात की चारों सीटें भाजपा ने जीत ली हैं। मध्य प्रदेश में तीनों सीटें भाजपा के खाते में गई हैं। राजस्थान में दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के पास रहने की संभावना है। कर्नाटक में कांग्रेस ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि एनडीए को एक सीट मिली है। झारखंड में दो सीटों पर JMM-कांग्रेस गठबंधन मजबूत स्थिति में है, हालांकि क्रॉस वोटिंग की स्थिति बनने पर भाजपा भी एक सीट निकाल सकती है। मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश की सीटें भाजपा के पास बनी रहने की संभावना है। मिजोरम में जोरम पीपल्स मूवमेंट को बढ़त मिल सकती है, जबकि मेघालय में नेशनल पीपुल्स पार्टी अपनी सीट बचाने की स्थिति में दिखाई दे रही है।
राज्यसभा चुनाव कैसे होते हैं और जीत का फॉर्मूला क्या है
राज्यसभा चुनाव सीधे जनता नहीं कराती। इसके लिए राज्यों के विधायक मतदान करते हैं। यही वजह है कि इसे अप्रत्यक्ष चुनाव कहा जाता है। राज्यसभा एक स्थायी सदन है, इसलिए इसके सभी सदस्य एक साथ नहीं बदलते। हर दो वर्ष में लगभग एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं और उनकी जगह नए सदस्य चुने जाते हैं। राज्यसभा की कुल 245 सीटें हैं। इनमें 233 सदस्यों का चुनाव राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है, जबकि 12 सदस्यों को राष्ट्रपति नामित करते हैं। किसी उम्मीदवार की जीत के लिए आवश्यक मतों की संख्या एक तय गणितीय फॉर्मूले से निकाली जाती है। उदाहरण के तौर पर महाराष्ट्र विधानसभा में 288 विधायक हैं और वहां 7 सीटों पर चुनाव होना है। ऐसे में जीत का कोटा निर्धारित करने के लिए कुल मतों को सीटों की संख्या से विभाजित किया जाता है। इस गणना के अनुसार महाराष्ट्र में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए कम से कम 36 विधायकों का समर्थन जरूरी होता है। यही वजह है कि राज्यसभा चुनाव में संख्या बल और राजनीतिक गठजोड़ सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।



