
High Court Uzbekistan Women Deportation: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने उज्बेकिस्तान की दो महिला नागरिकों के मामले में एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए उनकी स्वदेश वापसी का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया है. अदालत में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने कहा कि जब मामले से जुड़े सभी पक्ष इन महिलाओं को वापस भेजने के लिए तैयार हैं, तो अब इस याचिका में आगे किसी कार्यवाही की जरूरत नहीं रह जाती है. चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने संबंधित अधिकारियों को डिपोर्टेशन की कानूनी कागजी कार्रवाई को बिना देरी किए आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं.
केंद्र, राज्य और उज्बेकिस्तान दूतावास के बीच बनी सहमति
अदालत की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार, केंद्र सरकार और उज्बेकिस्तान दूतावास के प्रतिनिधियों ने अपना पक्ष रखा. तीनों ही पक्षों ने संयुक्त रूप से अदालत को अवगत कराया कि दोनों विदेशी महिलाओं को वापस उनके देश भेजने पर सभी की पूर्ण सहमति बन चुकी है. उज्बेकिस्तान दूतावास के अधिकारियों ने भी इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए अदालत से औपचारिक आदेश जारी करने की अपील की थी. इस पर हाईकोर्ट ने अपने अंतिम फैसले में स्पष्ट किया कि अब बिना किसी देरी के दोनों महिलाओं को उज्बेकिस्तान वापस भेजने की व्यावहारिक तैयारियां शुरू कर दी जाएं.
मार्च 2026 में रायपुर के होटल से हुई थी दोनों विदेशी महिलाओं की गिरफ्तारी
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, उज्बेकिस्तान की रहने वाली फेरूजा सबिरोवा और दिनोरा सफ्युतदिनोवा मार्च 2026 में राजधानी रायपुर के तेलीबांधा इलाके में स्थित एक निजी होटल से पुलिस ने पकड़ा था. शुरुआती जांच में पता चला कि इनमें से एक महिला का वीजा खत्म हो चुका था और वह तय समय सीमा बीतने के बाद भी अवैध रूप से भारत में रह रही थी. वहीं दूसरी महिला के पास न तो भारत का कोई वैध वीजा था और न ही उसका असली पासपोर्ट मिला. इस गंभीर लापरवाही के चलते तेलीबांधा थाना पुलिस ने अप्रैल 2026 में दोनों को विधिवत गिरफ्तार किया था.
गिरफ्तारी के बाद से डिटेंशन सेंटर में थीं बंद
कानूनी कार्रवाई के तहत गिरफ्तारी के बाद से ही दोनों विदेशी युवतियों को सुरक्षा के लिहाज से एक सरकारी डिटेंशन सेंटर में रखा गया था. अब हाईकोर्ट की मुख्य पीठ से आदेश की प्रामाणिक प्रति मिलने के बाद रायपुर पुलिस प्रशासन ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है. पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए दोनों युवतियों को वापस भेजने के लिए विदेश मंत्रालय और दूतावास के माध्यम से डिपोर्टेशन की अंतिम प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाया जा रहा है.
रायपुर जेल में वर्तमान में बंद हैं उज्बेक महिलाओं सहित 10 विदेशी नागरिक
सुरक्षा एजेंसियों से मिले आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी नागरिकों के अवैध रूप से रहने का यह कोई अकेला मामला नहीं है. तेलीबांधा पुलिस की इस कार्रवाई के बाद जब दोनों महिलाओं को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया, तब कई अन्य जानकारियां भी सामने आईं. जेल प्रशासन के रिकॉर्ड के अनुसार, इस समय अकेले रायपुर की केंद्रीय जेल में उज्बेकिस्तान की इन दो महिला कैदियों के अलावा अलग-अलग देशों के कुल 10 विदेशी नागरिक बंद हैं, जिनके खिलाफ वीसा नियमों के उल्लंघन और अन्य स्थानीय कानूनों के तहत मामले दर्ज हैं.



