CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें प्रदेश उदंती-सीतानदी में बाघों का शिकार और दो गिरफ्तार, मैनपाट बॉक्साइट खदान का भारी विरोध, धर्म स्वातंत्र्य कानून पर रोक की याचिका हाई कोर्ट से खारिज, 3 जुलाई से बदलेगा कोर्ट का रोस्टर, अकुशल श्रमिकों की मजदूरी बढ़कर हुई 300 रुपये, सिर्फ आर्य समाज के प्रमाणपत्र से शादी साबित न होने का बड़ा फैसला, 43 उद्योगों को ट्रेड लाइसेंस से मुक्ति, जेलों में बंद आदिवासियों की रिहाई के लिए सीएम को पत्र, केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक से रामगढ़ पहाड़ी पर मंडराया संकट और बलबेड़ा बॉर्डर पर नक्सलियों की बड़ी हथियार फैक्ट्री ध्वस्त समेत पढ़ें छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें…

CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की सभी बड़ी और छोटी खबरें रोजाना हमारी नजर में रहती हैं। दक्षिण कोसल के विशेष सेगमेंट ‘CG की 10 बड़ी खबरें’ में हम आपको समाचार जगत की हर गतिविधि का अपडेट सरल और सहज भाषा में प्रदान करेंगे। तो आइए, पत्रकारिता की इस दुनिया में बने रहें और छत्तीसगढ़ की हर ताजातरीन खबर से अपनी जानकारी को और विस्तृत करे

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सुरक्षित टाइगर रिजर्व में बाघों का शिकार, खाल के साथ दो संदिग्ध गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के जंगलों में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर स्थिति सामने आई है। वन विभाग के तमाम दावों के विपरीत, राज्य के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार का मामला खुला है। एंटी पोचिंग टीम और गरियाबंद पुलिस ने एक संयुक्त कार्रवाई में दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से दो बाघों की खाल और पैंगोलिन की खाल का बड़ा जखीरा बरामद हुआ है। डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन के मुताबिक, बरामद की गई खालों में से एक बाघ का आगे का पंजा गायब है। अंदेशा है कि इस बाघ का शिकार इंद्रावती-अबूझमाड़ के इलाके में किया गया था। पकड़े गए आरोपियों के तार महाराष्ट्र के चंद्रपुर और पखांजूर से जुड़े हैं। शुरुआती जांच में कुछ आरोपियों के पुलिस विभाग से जुड़े होने की बात भी सामने आ रही है। वन विभाग इस पूरे तस्करी नेटवर्क को खंगालने में जुटा है।

मैनपाट बॉक्साइट खदान के विरोध में उतरे ग्रामीण और तिब्बती समाज

सरगुजा जिले के मैनपाट में प्रस्तावित बॉक्साइट खदान परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध तेज हो गया है। कमलेश्वरपुर-केसरा में आयोजित जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और तिब्बती समाज के लोगों ने जमकर हंगामा किया। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि इस परियोजना से इलाके के पर्यावरण, प्राकृतिक जल स्रोतों और लोगों की आजीविका पर बड़ा संकट आ जाएगा। तिब्बती समाज के प्रतिनिधियों ने इस पर विशेष आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि प्रस्तावित 145.8 हेक्टेयर खदान क्षेत्र में से लगभग 50.3 हेक्टेयर भूमि पर उनका कब्जा है। इसी जमीन पर उनका मुख्य धार्मिक स्थल और मंदिर स्थित है। अगर यहाँ खनन शुरू हुआ, तो समुदाय के सामने विस्थापन की स्थिति बन जाएगी। प्रशासन ने फिलहाल लोगों की सभी आपत्तियों को दर्ज कर आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया है।

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य कानून पर रोक लगाने की याचिका हाई कोर्ट से खारिज

बिलासपुर हाई कोर्ट ने राज्य में लागू नए ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026’ के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। भिलाई निवासी मोसेस लोगन ने कोर्ट से इस कानून पर अंतरिम रोक लगाने की गुहार लगाई थी। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने दलील दी कि इसी तरह की दो अन्य याचिकाएं पहले भी कोर्ट द्वारा समयपूर्व मानकर खारिज की जा चुकी हैं। सरकारी पक्ष के तर्कों को देखते हुए याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए याचिका को बिना किसी भविष्य की विधिक स्वतंत्रता के खारिज कर दिया।

बिलासपुर हाई कोर्ट में 3 जुलाई से लागू होगी नई सुनवाई व्यवस्था

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में मुकदमों की सुनवाई को और बेहतर बनाने के लिए नया रोस्टर जारी किया गया है। यह नई व्यवस्था 3 जुलाई 2026 से प्रभावी होगी। इसके तहत अलग-अलग डिवीजन बेंच और सिंगल बेंच के बीच मामलों का नए सिरे से बंटवारा किया गया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की बेंच अब जनहित याचिकाओं, बंदी प्रत्यक्षीकरण, फांसी की सजा और आपराधिक अपीलों जैसे गंभीर मामलों की सुनवाई करेगी। अन्य बेंचों को भी विशिष्ट जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की बेंच सामान्य आपराधिक मामले सुनेगी। वहीं, जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की सिविल बेंच को पारिवारिक विवादों, टैक्स से जुड़े मामलों और विभिन्न ट्रिब्यूनल के फैसलों के खिलाफ आई याचिकाओं की जिम्मेदारी दी गई है। इस बदलाव से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ में अकुशल श्रमिकों की मजदूरी बढ़ी, अब मिलेंगे 300 रुपये रोज

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले अकुशल श्रमिकों के लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ‘विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन ग्रामीण’ के तहत मजदूरी की दरों में संशोधन किया है। इसके तहत अब श्रमिकों को प्रतिदिन 261 रुपये के स्थान पर 300 रुपये दिए जाएंगे। यह नई व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से पूरे देश के साथ राज्य में भी लागू हो गई है। इस नई दर से श्रमिकों की दैनिक आय में सीधे 39 रुपये की बढ़ोतरी होगी, जो पुरानी दर से लगभग 15 प्रतिशत अधिक है। नई योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिन का रोजगार देने और काम पूरा होने के 15 दिनों के भीतर सीधे भुगतान करने का नियम बनाया गया है। इस योजना की प्रगति को ट्रैक करने के लिए डिजिटल जॉब कार्ड की सुविधा भी दी जाएगी।

सिर्फ आर्य समाज के प्रमाणपत्र से शादी साबित नहीं होगी: हाई कोर्ट

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक भरण-पोषण के मामले में महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। कोर्ट ने कहा है कि केवल आर्य समाज मंदिर से जारी विवाह या शुद्धि प्रमाणपत्र किसी शादी की कानूनी वैधता साबित करने के लिए काफी नहीं है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की एकलपीठ ने मनेंद्रगढ़ फैमिली कोर्ट के पुराने फैसले को सही ठहराते हुए कैंसर पीड़ित महिला की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया। महिला ने दावा किया था कि उसने साल 2017 में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया था और बाद में उसके पति ने उसे छोड़ दिया। वहीं, पुरुष पक्ष का कहना था कि दोनों अलग-अलग धर्मों से हैं और उनके बीच कोई कानूनी विवाह नहीं हुआ था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भरण-पोषण का दावा करने के लिए सबसे पहले वैध वैवाहिक संबंध साबित करना होगा। इसके लिए संबंधित विवाह अधिनियमों के तहत सरकारी पंजीकरण या ठोस कानूनी दस्तावेज जरूरी हैं।

सूबे के 43 उद्योगों और व्यवसायों को ट्रेड लाइसेंस के नवीनीकरण से मुक्ति

राज्य के व्यापारियों को प्रशासनिक जटिलताओं से राहत देने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। छत्तीसगढ़ नगर पालिका (व्यापार अनुज्ञापन) नियम 2025 में संशोधन करते हुए 43 प्रकार के व्यवसायों के लिए नगरीय निकायों से ट्रेड लाइसेंस लेने या उसके नवीनीकरण की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है। इस सूची में किराना दुकानें, होटल, रेस्टोरेंट, आईटी कंपनियां, कोचिंग संस्थान और मेडिकल स्टोर शामिल हैं। इस बदलाव के बाद व्यापारियों को नगर निगम या नगर पालिका के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, बशर्ते उनके पास अपनी संबंधित नियामक संस्था का वैध लाइसेंस हो। उदाहरण के लिए, खाद्य व्यवसायों के लिए एफएसएसएआई (FSSAI) का पंजीकरण और फैक्ट्रियों के लिए फैक्ट्री एक्ट के तहत अनुमति पहले की तरह ही अनिवार्य रहेगी। यह छूट केवल स्थानीय निकाय के ट्रेड लाइसेंस पर लागू होगी।

जेलों में बंद आदिवासियों की रिहाई के लिए विधायक मंडावी ने सीएम को लिखा पत्र

बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को एक पत्र भेजकर नक्सली मामलों में सालों से जेलों में बंद स्थानीय आदिवासियों के मामलों की उच्चस्तरीय समीक्षा कराने की मांग की है। विधायक का कहना है कि बस्तर क्षेत्र के कई गरीब और कम पढ़े-लिखे ग्रामीण कानूनी जानकारी और पैसों के अभाव में अदालतों में अपना पक्ष मजबूती से नहीं रख पाए हैं। पत्र में मांग की गई है कि सरकार को मानवीय आधार पर एक जांच समिति बनानी चाहिए जो इन मामलों का पारदर्शी अध्ययन करे। जिन मामलों में ठोस सबूत नहीं हैं या जिन्हें केवल संदेह के आधार पर पकड़ा गया है, उन्हें जल्द से जल्द राहत दी जानी चाहिए। मंडावी के अनुसार, निर्दोष लोगों की रिहाई से बस्तर में शांति व्यवस्था और सरकार के प्रति जनता का भरोसा और मजबूत होगा।

केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को लेकर रामगढ़ पहाड़ी के अस्तित्व पर उठा विवाद

सरगुजा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर रामगढ़ पहाड़ी नए कोयला ब्लॉक की मंजूरी के बाद विवादों के केंद्र में आ गई है। केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने हसदेव अरण्य क्षेत्र के केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को हरी झंडी दे दी है, जिसका संचालन अडानी कंपनी के पास है। इस खदान का बड़ा हिस्सा घने जंगलों में आता है, जिसके लिए लाखों पेड़ काटे जाने हैं। स्थानीय लोगों और विपक्षी नेताओं का कहना है कि खदान में होने वाले धमाकों से प्राचीन रामगढ़ पहाड़ी को नुकसान पहुँचेगा। दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रामगढ़ महोत्सव के दौरान इस स्थल को एक बड़ी सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए इसके पर्यटन विकास के लिए एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस पहाड़ी का संबंध भगवान राम के वनवास काल से है और यहीं महाकवि कालिदास ने मेघदूतम की रचना की थी। पूर्व उप-मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भी इस परियोजना का विरोध करते हुए इसके संरक्षण के लिए एक समिति का गठन किया है।

सीमा पर बड़ी कार्रवाई, नक्सलियों की बड़ी हथियार फैक्ट्री ध्वस्त

छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित बलबेड़ा के जंगलों में सुरक्षाबलों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। राजनांदगांव-गढ़चिरौली पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के एक संयुक्त खोजी अभियान के दौरान नक्सलियों की एक सक्रिय हथियार बनाने वाली फैक्ट्री को पूरी तरह तबाह कर दिया गया। मौके से भारी मात्रा में विस्फोटक और उपकरण बरामद किए गए हैं। सुरक्षाबलों ने मौके से लगभग 6 टन वजनी एक औद्योगिक खराद मशीन जब्त की है, जिसका इस्तेमाल नक्सली हथियारों के पुर्जे और बैरल बनाने के लिए करते थे। इसके अलावा 150 क्लेमोर पाइप, बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (BGL) के पुर्जे, 220 की संख्या में 12-बोर पाइप और राइफल रॉड भी बरामद हुए हैं। इस फैक्ट्री के नष्ट होने से सीमावर्ती इलाकों में नक्सलियों की मारक क्षमता को बड़ा झटका लगा है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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