
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से स्कूली व्यवस्था की एक बेहद संवेदनहीन और हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां के कुरूद विकासखंड के अंतर्गत आने वाले पीएम श्री प्राथमिक शाला कठौली में शिक्षकों की लापरवाही के चलते पहली कक्षा की एक मासूम छात्रा स्कूल की छुट्टी होने के बाद भी कमरे के भीतर ही बंद रह गई। स्कूल स्टाफ ने कमरों की बिना जांच किए मुख्य द्वार पर ताला लटका दिया और अपने घर चले गए। यह मासूम बच्ची कई घंटों तक अकेले अंधेरे कमरे में कैद रही। रात को जब ग्रामीणों ने उसके रोने की आवाज सुनी, तब जाकर उसे बाहर निकाला जा सका।
छुट्टी के बाद जब घर नहीं पहुंची मासूम तो परिजनों के फूले हाथ-पांव
रोजाना की तरह जब स्कूल की छुट्टी का समय बीत जाने के काफी देर बाद भी बच्ची अपने घर नहीं लौटी, तो उसके माता-पिता और परिजनों की चिंता बढ़ने लगी। परिजनों ने तुरंत अपने स्तर पर उसकी खोजबीन शुरू की। उन्होंने गांव की गलियों, आसपास के खेल के मैदानों और रिश्तेदारों के घरों में बच्ची की तलाश की, लेकिन उसका कहीं कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था। शाम ढलने के बाद परिजनों की घबराहट और ज्यादा बढ़ गई थी।
रात आठ बजे ग्रामीणों ने सुनी रोने की आवाज और तोड़ा स्कूल का ताला
रात करीब आठ बजे स्कूल परिसर के पास से गुजर रहे कुछ स्थानीय ग्रामीणों को भीतर से किसी बच्चे के सिसकने और रोने की आवाज सुनाई दी। अनहोनी की आशंका होने पर ग्रामीण तुरंत स्कूल के पास पहुंचे और खिड़की से झांककर देखा। उन्होंने पाया कि पहली कक्षा की छात्रा अंदर बंद है और डर के मारे रो रही है। ग्रामीणों ने बिना देर किए तुरंत लोहे का औजार मंगाया और स्कूल के दरवाजे पर लटके ताले को तोड़कर बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाला।
भूख और प्यास से बेहाल रही बच्ची, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
दोपहर बाद से लेकर रात आठ बजे तक बंद रहने के कारण मासूम बच्ची भूख और प्यास से पूरी तरह बेहाल हो चुकी थी। बंद कमरे के घुटन भरे माहौल और अंधेरे ने उसे बुरी तरह डरा दिया था। ग्रामीणों का कहना है कि यह संयोग अच्छा था कि समय रहते किसी राहगीर की नजर स्कूल पर पड़ी और रोने की आवाज सुन ली गई, वरना रात के वक्त इस सूनी जगह पर बच्ची के साथ कोई गंभीर हादसा भी हो सकता था। घटना के बाद से ग्रामीणों में स्कूल प्रबंधन के खिलाफ गहरा गुस्सा है।
जिम्मेदारी लेने के बजाय स्वीपर पर ठीकरा फोड़ने में जुटा स्कूल स्टाफ
इस पूरी घटना के उजागर होने के बाद स्कूल के प्रधानपाठक और वहां तैनात अन्य शिक्षकों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि नियमानुसार स्कूल बंद करने से पहले हर कमरे की सघन जांच करना शिक्षकों का बुनियादी कर्तव्य है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई बच्चा अंदर तो नहीं छूटा है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि अपनी गलती स्वीकार करने और परिजनों से माफी मांगने के बजाय स्कूल का स्टाफ अब पूरा दोष संस्था के सफाईकर्मी यानी स्वीपर पर मढ़ने की कोशिश कर रहा है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने दिए जांच के सख्त आदेश, टीम गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए धमतरी की जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) मधुलिका मिश्रा ने तत्काल कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इसे बच्चों की सुरक्षा के मामले में एक अक्षम्य लापरवाही माना है। शिक्षा विभाग ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन कर दिया है। इसके साथ ही जमीनी हकीकत का पता लगाने के लिए एक स्थानीय नोडल अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई है जो मौके पर जाकर गवाहों के बयान दर्ज करेंगे।
लापरवाह शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस, जवाब न मिलने पर होगी कार्रवाई
प्रशासनिक कार्रवाई के तहत विभाग ने संबंधित स्कूल के प्रधानपाठक और दोषी शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। उनसे पूछा गया है कि इतनी बड़ी चूक के लिए क्यों न उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाए। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नोटिस का जवाब आने के बाद और जांच समिति की विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक और दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे ताकि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो।
सरकारी दावों के बीच पीएम श्री स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘पीएम श्री’ योजना के तहत संचालित स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है। आदर्श स्कूल कहे जाने वाले इन संस्थानों में अगर पहली कक्षा की बच्ची इस तरह लावारिस छोड़ दी जाती है, तो यह पूरी व्यवस्था की सुस्ती को दर्शाता है। स्थानीय अभिभावकों ने मांग की है कि केवल नोटिस जारी करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि ऐसे गैर-जिम्मेदार शिक्षकों को तुरंत सेवा से हटाकर उनके खिलाफ कानूनी मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।



