
CG Teacher Online Attendance VSK App: छत्तीसगढ़ के शासकीय विद्यालयों में डिजिटल उपस्थिति प्रणाली को लागू करने के निर्णय पर शिक्षकों ने कड़ा ऐतराज जताया है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) की ओर से जारी नए दिशानिर्देशों के बाद राज्यभर के शिक्षक संगठनों ने विरोध का झंडा बुलंद कर दिया है। विभाग के नए आदेश के मुताबिक, अब शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक स्टाफ का मासिक वेतन विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) ऐप पर दर्ज उपस्थिति के आधार पर ही जारी किया जाएगा। इस व्यवस्था को इसी चालू माह से प्रभावी करने के निर्देश दिए गए हैं।
DPI के आदेश में वेतन रोकने का स्पष्ट फरमान
लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी आदेश में सभी संभागीय और जिला स्तरीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि शालाओं में कार्यरत केवल उन्हीं शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन तैयार किया जाए, जिनकी उपस्थिति ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज पाई जाएगी। जितने दिनों की हाजिरी ऐप में अपलोड होगी, केवल उतने ही दिनों का भुगतान किया जाएगा। इस नियम से शिक्षकों में हड़कंप मच गया है।
ऑनलाइन उपस्थिति ऐप में गंभीर तकनीकी कमियां
शिक्षक संघों ने विभाग की इस व्यवस्था को जल्दबाजी में उठाया गया कदम बताया है। प्रतिनिधियों का कहना है कि जिस ऐप के जरिए हाजिरी ली जा रही है, उसमें ढेरों तकनीकी खामियां हैं। 16 जून को जब यह व्यवस्था पहली बार शुरू की गई थी, उसी दिन सर्वर ठप पड़ गया था। दुर्गम और ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क कनेक्टिविटी न होने के कारण रोजाना हजारों शिक्षक समय पर हाजिरी लगाने से वंचित रह जाते हैं।
लोकेशन ट्रेसिंग और पुराने स्मार्टफोन बनी बड़ी समस्या
अटेंडेंस दर्ज करते समय ऐप में अक्सर गलत जीपीएस लोकेशन दिखाई देती है, जिससे शिक्षक स्कूल परिसर में उपस्थित होने के बावजूद अनुपस्थित दर्ज हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त 55 से 60 वर्ष की आयु वाले वरिष्ठ शिक्षकों के पास आधुनिक टचस्क्रीन या high-end 4G स्मार्टफोन नहीं हैं। स्कूल छूटने के बाद चेक-आउट करते समय भी सर्वर की धीमी गति के कारण एंट्री सबमिट नहीं हो पाती है।
शालेय शिक्षक संघ ने उठाई ऐप दुरुस्त करने की मांग
छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने इस व्यवस्था को पूरी तरह से अव्यवहारिक करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षक तकनीक या पारदर्शिता के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विभाग अपनी तकनीकी विफलताओं का खामियाजा कर्मचारियों पर नहीं थोप सकता। उन्होंने मांग की है कि जब तक ऐप को पूरी तरह दोषमुक्त नहीं बना लिया जाता, तब तक ऑनलाइन हाजिरी से वेतन जोड़ने के फैसले पर तुरंत रोक लगाई जाए।
विसंगतियां दूर होने तक पुरानी व्यवस्था लागू रखने की अपील
शिक्षक संगठनों का कहना है कि राज्य के सैकड़ों स्कूल घने जंगलों और नेटवर्क विहीन क्षेत्रों में स्थित हैं। ऐसी जगह पर बिना वैकल्पिक इंतजाम किए डिजिटल सिस्टम थोपना तर्कसंगत नहीं है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस आदेश में संशोधन नहीं किया गया और पुराने हाजिरी रजिस्टर के आधार पर वेतन जारी करने की छूट नहीं दी गई, तो प्रदेशभर के शिक्षक चरणबद्ध आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।



