CG Jail Prisoners Released: स्वतंत्रता दिवस पर छत्तीसगढ़ की जेलों से 100 कैदियों को समय से पहले मिलेगी रिहाई, जानिए किस वजह से कैदियों को मिलेगी आजादी

CG Central Jail Update: स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय पर्व से पहले छत्तीसगढ़ के जेल प्रशासन ने सजा काट रहे कैदियों को लेकर बड़ा फैसला किया है। जेल में रहते हुए बेहतर आचरण, अनुशासन और सुधरने का प्रयास करने वाले सजायाफ्ता बंदियों को रिहा किया जा रहा है। प्रदेश की पांचों प्रमुख केंद्रीय जेलों से कुल 100 कैदियों को समय से पहले रिहाई दी जा रही है। इसी क्रम में रायपुर सेंट्रल जेल से 9 कैदियों को समय पूर्व रिहा कर दिया गया है।

हाथ में श्रीमद्भगवद्गीता लेकर बाहर आए कैदी, ली समाज में लौटने की शपथ

रायपुर सेंट्रल जेल के मुख्य दरवाजे से बाहर कदम रखते ही कैदियों के चेहरे पर नई जिंदगी की उम्मीद साफ दिखाई दी। रिहा हुए बंदियों के हाथों में श्रीमद्भगवद्गीता की प्रतियां थीं। सजा पूरी होने और अच्छे चाल-चलन का प्रमाण मिलने के बाद बाहर आए बंदियों ने कहा कि वे अब अपराध का रास्ता छोड़कर सामान्य नागरिक की तरह समाज की मुख्यधारा में शामिल होंगे और परिवार के साथ नया जीवन शुरू करेंगे।

प्रदेश की पांच केंद्रीय जेलों से 100 बंदियों की रिहाई का पूरा ब्योरा

छत्तीसगढ़ शासन के गृह एवं जेल विभाग ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य की पांच केंद्रीय जेलों के बंदियों की रिहाई की सूची तैयार की है। इसमें सबसे अधिक कैदी बिलासपुर जेल से रिहा किए जा रहे हैं। रायपुर में 9 कैदियों की रिहाई के बाद शेष कैदियों की कागजी प्रक्रिया पूरी की जा रही है, जिन्हें 15 अगस्त तक चरणबद्ध तरीके से रिहा कर दिया जाएगा।

केंद्रीय जेल का नामरिहा होने वाले कैदियों की संख्या
बिलासपुर सेंट्रल जेल48 कैदी
रायपुर सेंट्रल जेल20 कैदी
दुर्ग सेंट्रल जेल16 कैदी
जगदलपुर सेंट्रल जेल9 कैदी
अंबिकापुर सेंट्रल जेल8 कैदी
कुल योग100 कैदी

अनुशासित आचरण और नियमावली के आधार पर मिला समय पूर्व रिहाई का लाभ

जेल प्रशासन के अनुसार, जिन बंदियों की रिहाई की जा रही है, उन्होंने अपनी तय सजा का एक बड़ा हिस्सा पूरा कर लिया है। सजा काटने के दौरान जेल परिसर में उनका व्यवहार शांतिपूर्ण रहा, उन्होंने जेल के नियमों का निष्ठा से पालन किया और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों में भाग लिया। शासन की विशेष नीति के तहत हर साल राष्ट्रीय पर्वों पर ऐसे बंदियों की समीक्षा की जाती है और रिपोर्ट सही मिलने पर उन्हें रिहाई का लाभ दिया जाता है।

कैदियों के पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में जोड़ने की पहल

जेल से छूटने वाले बंदियों को समाज में फिर से स्थापित करने के लिए भी जेल प्रशासन प्रयास कर रहा है। कैदियों को रिहाई के समय धार्मिक ग्रंथों के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की पहल से अन्य बंदियों को भी जेल के भीतर अपना आचरण सुधारने की प्रेरणा मिलती है, जिससे जेलों में अनुशासन बना रहता है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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