Gangrel Dam Jain Idol: गंगरेल बांध में मिली संगमरमर की 37 साल पुरानी दुर्लभ प्रतिमा, जांच के लिए पुरातत्व विभाग को दी जाएगी सूचना

Dhamtari Gangrel Dam Rare Jain Tirthankar Neminath: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्थित प्रसिद्ध गंगरेल बांध से एक बड़ी और उत्सुकता जगाने वाली खबर सामने आई है। बांध क्षेत्र से भगवान नेमिनाथ की एक दुर्लभ और प्राचीन प्रतिमा बरामद हुई है। इस प्रतिमा के मिलने की खबर फैलते ही स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगना शुरू हो गया। शुरुआती अनुमानों के अनुसार यह प्रतिमा कई दशक पुरानी बताई जा रही है, जिससे इसका ऐतिहासिक महत्व काफी बढ़ जाता है।

बोटिंग चालक के पास रखी प्रतिमा पर पड़ी पर्यटकों की नजर

Dhamtari Gangrel Update: पूरा मामला उस समय सामने आया जब जैन समाज के कुछ पर्यटक गंगरेल बांध में बोटिंग का आनंद लेने पहुंचे थे। इस दौरान उनकी नजर एक बोटिंग चालक के पास रखी इस प्रतिमा पर पड़ी। पर्यटकों ने प्रतिमा की बनावट और शैली को ध्यान से देखने के बाद उसकी पहचान जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ के रूप में की। इसके बाद उन्होंने तुरंत स्थानीय जैन समाज के प्रबुद्ध जनों को इसकी सूचना दी।

सफेद संगमरमर से बनी है प्राचीन प्रतीत होने वाली यह प्रतिमा

Gangrel Dam: मिलने वाली प्रतिमा नक्काशीदार सफेद संगमरमर की बनी हुई है। इसकी कलाकृति और बनावट को देखकर जानकार इसे काफी पुरानी मान रहे हैं। हालांकि प्रतिमा कितनी प्राचीन है और इसकी सही कालावधि क्या है, इसका सटीक पता लगाने के लिए विशेषज्ञ और पुरातत्व विभाग के अधिकारी इसकी विस्तृत जांच करेंगे। जांच के बाद ही इसके निर्माण काल और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की सही जानकारी सामने आ सकेगी।

धमतरी के दिगंबर जैन मंदिर में सुरक्षित रखी गई दुर्लभ प्रतिमा

Dhamtari News Today: प्रतिमा की पहचान होने के बाद इसे पूरे आदर-सत्कार के साथ धमतरी स्थित दिगंबर जैन मंदिर लाया गया, जहां इसे सुरक्षित रखवा दिया गया है। मंदिर में प्रतिमा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है। जैन समाज के लोगों में इस दुर्लभ प्रतिमा को लेकर गहरी आस्था और उत्साह देखने को मिल रहा है।

गंगरेल बांध तक कैसे पहुंची प्रतिमा, जांच के बाद उठेगा रहस्य से पर्दा

अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि संगमरमर की यह ऐतिहासिक प्रतिमा गंगरेल बांध के पानी तक या बोट चालक के पास कैसे पहुंची। क्या यह डूब क्षेत्र में किसी प्राचीन मंदिर का हिस्सा थी या फिर इसे किसी अन्य स्थान से लाकर यहां रखा गया था। इन सभी सवालों के जवाब प्रशासनिक और पुरातात्विक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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