CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें छत्तीसगढ़ में 65 खनिज ब्लॉकों की बंपर नीलामी से 4 लाख करोड़ के राजस्व की उम्मीद, गंभीर अपराध और पॉक्सो के दोषियों के लिए खुली जेल के दरवाजे बंद, 9.70 करोड़ के साड़ी घोटाले में आईएएस एल्मा की भूमिका पर उठे सवाल, स्कूली बच्चों और जेन-जी को साधने के लिए बीजेपी का ‘सेवा संकल्प अभियान’, बिजली बिल भुगतान के नियम बदले तो देरी पर अब पूरे महीने का नहीं लगेगा सरचार्ज, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की पीजीआई-डी रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ के किसी भी जिले को नहीं मिला टॉप ग्रेड, बिलासपुर में नीट-पीजी परीक्षा के दौरान 40 कंप्यूटर ठप होने से मचा हड़कंप, सरकारी विभागों पर 3 हजार करोड़ से अधिक का बिजली बिल बकाया होने पर कटे 39 कनेक्शन, आय से अधिक संपत्ति के मामले में दंतेवाड़ा के तत्कालीन डीईओ को 4 साल की सजा, और रायपुर के ऐतिहासिक नंदनवन का 50 करोड़ से पीपीपी मॉडल पर होगा कायाकल्प समेत पढ़ें छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें…

CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की सभी बड़ी और छोटी खबरें रोजाना हमारी नजर में रहती हैं। दक्षिण कोसल के विशेष सेगमेंट ‘CG की 10 बड़ी खबरें’ में हम आपको समाचार जगत की हर गतिविधि का अपडेट सरल और सहज भाषा में प्रदान करेंगे। तो आइए, पत्रकारिता की इस दुनिया में बने रहें और छत्तीसगढ़ की हर ताजातरीन खबर से अपनी जानकारी को और विस्तृत करे
छत्तीसगढ़ में खनिजों की बड़ी नीलामी से 4 लाख करोड़ के राजस्व की उम्मीद
Economy Update: छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा अब राज्य की आर्थिक ताकत को और तेजी से बढ़ाने जा रही है। प्रदेश में अब तक कुल 65 खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी हो चुकी है, जिनसे आने वाले वर्षों में लगभग 4 लाख करोड़ रुपए के संभावित राजस्व मिलने का अनुमान है। सोमवार को नवा रायपुर में आयोजित क्रिटिकल और स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की आठवीं किश्त के रोड शो के दौरान यह महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। कार्यक्रम में उपस्थित खनिज विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में खनिजों की खोज, नीलामी और निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि पूरी प्रक्रिया में पूरी तरह से पारदर्शिता बनी रहे और अधिक से अधिक निवेश आकर्षित किया जा सके। पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान छत्तीसगढ़ को खनिज क्षेत्र से लगभग 16 हजार 700 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था, जो कि निर्धारित लक्ष्य का करीब 98 प्रतिशत है। पिछले कुछ वर्षों में खनिज राजस्व में लगभग 14 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी भी दर्ज की गई है, जो राज्य की आर्थिक प्रगति को दर्शाता है। प्रदेश में भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए लिथियम, ग्रेफाइट, वैनेडियम, गैलियम, सोना, टंगस्टन, निकेल, क्रोमियम, कॉपर, लेड-जिंक और डायमंड जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण के लिए लगभग 40 नए प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। इसके अलावा 2,800 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र का विस्तृत भूवैज्ञानिक सर्वे भी पूरा कर लिया गया है। कटघोरा क्षेत्र में देश के पहले लिथियम युक्त ब्लॉक पर तेजी से काम चल रहा है, जबकि बलरामपुर और बस्तर के टिन बेल्ट में भी खोज गतिविधियां जारी हैं। अवैध खनन पर नकेल कसने के लिए सरकार खनिज ऑनलाइन 2.0 और ड्रोन सर्वे जैसी डिजिटल प्रणालियों का उपयोग कर रही है। आने वाले समय में इन खनिजों के उत्पादन से न केवल राज्य का राजस्व कई गुना बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
गंभीर अपराध और पॉक्सो के दोषियों के लिए खुली जेल के दरवाजे बंद
Jol Reforms: छत्तीसगढ़ में अच्छे आचरण वाले कैदियों के पुनर्वास और सुधार के उद्देश्य से राज्य सरकार ने खुली जेल के संचालन के लिए नए और कड़े नियम लागू कर दिए हैं। इन नए नियमों के तहत ऐसे कैदी जिनका जेल के अंदर का आचरण उत्तम रहा है और जिन्होंने अपनी लंबी सजा का एक बड़ा हिस्सा सफलताप्यूर्वक पूरा कर लिया है, उन्हें खुली जेल में रहने की अनुमति दी जाएगी। प्रदेश की पहली खुली जेल बेमेतरा जिले के ग्राम पथर्रा में पूरी तरह तैयार हो चुकी है, और इसके अलावा राज्य के अन्य जिलों में लगभग 13 और नई खुली जेलें बनाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। सरकार द्वारा तय की गई नई शर्तों के अनुसार, खुली जेल का लाभ केवल उन्हीं कैदियों को मिलेगा जिनकी उम्र 30 से 60 वर्ष के बीच है, जो शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हैं, और जिन्हें आजीवन कारावास या 10 साल या उससे अधिक की सजा हुई है। इसके साथ ही कैदी को कम से कम 7 साल की सजा काटने के साथ ही कम से कम दो बार पैरोल मिलने पर संतोषजनक व्यवहार दिखाना अनिवार्य किया गया है। हालांकि, गंभीर अपराधों में लिप्त दोषियों के लिए इन जेलों के दरवाजे पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं। हत्या, बलात्कार, पॉक्सो एक्ट, महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराध, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, यूएपीए, टाडा, पोटा और एनडीपीएस एक्ट जैसे मामलों में सजा काट रहे कैदियों को खुली जेल में प्रवेश नहीं मिलेगा। इसके अलावा अविवाहित कैदियों, दूसरे राज्यों के निवासियों और उसी जिले के स्थानीय कैदियों को भी इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। कैदियों के चयन के लिए जेल एवं सुधारात्मक सेवाओं के महानिदेशक की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो हर तीन महीने में पात्र कैदियों की सूची पर विचार कर अंतिम निर्णय लेगी। खुली जेल में रहने वाले कैदियों को खेती, पशुपालन और अन्य उद्योगों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जाएगा, ताकि सजा पूरी होने के बाद वे समाज की मुख्यधारा में आसानी से लौट सकें।
छत्तीसगढ़ में 9.70 करोड़ के साड़ी घोटाले पर सियासत तेज, आईएएस अधिकारी की भूमिका पर सवाल
Investigation Update: छत्तीसगढ़ में पिछले दिनों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए की गई 9.70 करोड़ रुपए की साड़ी खरीदी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। वर्ष 2024-25 के दौरान प्रदेश की लगभग 1.94 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए लगभग 500 रुपए प्रति साड़ी की दर से कुल 9 करोड़ 70 लाख रुपए खर्च कर साड़ियां खरीदी गई थीं, जिनकी सप्लाई की मुख्य जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड को सौंपी गई थी। इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस समय साड़ियों का यह बड़ा ऑर्डर दिया गया था, उस वक्त वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पीएल एल्मा के पास दोहरी जिम्मेदारी थी। वे एक तरफ जहां महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक के पद पर आसीन थे, वहीं दूसरी तरफ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के प्रबंध निदेशक (एमडी) की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। यानी सप्लाई का ऑर्डर जारी करने वाला विभाग और ऑर्डर लेकर साड़ियां खरीदने व वितरित करने वाला बोर्ड, दोनों के सर्वोच्च पद पर एक ही अधिकारी का होना गंभीर हितों के टकराव की ओर इशारा करता है। अलग-अलग जिलों से शिकायतें सामने आईं कि महिलाओं को जो साड़ियां वितरित की गईं, उनकी लंबाई तय मानक 6.3 मीटर से काफी कम यानी मात्र 5 मीटर या उससे भी कम थी। इसके अलावा साड़ियों का कपड़ा बेहद पतला होने, धोने के बाद तुरंत रंग उड़ने और सिकुड़ने की गंभीर शिकायतें भी दर्ज की गईं। विपक्षी दलों ने इसे सरकारी धन का दुरुपयोग और महिलाओं के सम्मान से खिलवाड़ बताते हुए उग्र प्रदर्शन किए और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई। हालांकि, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के निर्देश पर अमानक साड़ियों की जांच के आदेश तो दिए गए, लेकिन अब तक किसी भी बड़े अधिकारी को इस मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है। संबंधित आईएएस अधिकारी का केवल अन्य विभाग में रूटीन ट्रांसफर कर दिए जाने से इस पूरी जांच प्रक्रिया पर जनता और विपक्ष की तरफ से कई तीखे सवाल खड़े किए जा रहे हैं, और सरकार की चुप्पी इस मामले को और अधिक संवेदनशील बना रही है।
बीजेपी के सेवा संकल्प अभियान के जरिए देश के 25 करोड़ जेन-जी छात्रों को साधने की तैयारी
Political News: भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के ऐतिहासिक 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक व्यापक ‘सेवा संकल्प अभियान’ की रूपरेखा तैयार की है, जिसके तहत देश के लगभग 25 करोड़ स्कूली बच्चों तक सीधे पहुंचने की बड़ी योजना बनाई गई है। आगामी 17 सितंबर से शुरू होने वाले प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन से लेकर 17 अक्टूबर तक एक महीने तक चलने वाले इस विशेष अभियान में देश भर के सभी सरकारी और निजी स्कूलों को शामिल किया गया है। इस अभियान का मुख्य केंद्रबिंदु ‘जेन-जी’ यानी आज की युवा पीढ़ी और भविष्य के मतदाताओं को अपने साथ जोड़ना है, ताकि उनके बीच केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों और प्रधानमंत्री के विजन का एक सकारात्मक नैरेटिव सेट किया जा सके। विशेष रूप से कक्षा 8वीं से 11वीं तक के विद्यार्थियों को ध्यान में रखते हुए स्कूलों में भाषण, चर्चा और ड्राइंग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा, जिसमें ‘विकसित भारत के सपने’ और ’25 वर्षों के सेवा कार्य’ जैसे विषयों पर बच्चों से उनके विचार मांगे जाएंगे। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे महत्वपूर्ण हिंदी भाषी राज्यों में इस अभियान को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं, जहाँ अकेले इन राज्यों में डेढ़ करोड़ से अधिक छात्र इस आयु वर्ग में आते हैं। बीजेपी का यह रणनीतिक कदम सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि भविष्य के मतदाताओं के साथ सीधा भावनात्मक और वैचारिक संवाद स्थापित करने का एक बड़ा माध्यम माना जा रहा है। इस अभियान को लेकर राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी भी तेज हो गई है, जहाँ एक ओर सत्तारूढ़ पार्टी इसे देश की भावी पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का सकारात्मक प्रयास बता रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे शिक्षण संस्थानों का खुला राजनीतिकरण करार देते हुए तीखा विरोध दर्ज कराया है।
छत्तीसगढ़ में बिजली बिल भुगतान के नियम बदले, देरी पर अब पूरे महीने का सरचार्ज नहीं
Consumer News: छत्तीसगढ़ के लगभग 65 लाख बिजली उपभोक्ताओं के लिए राज्य सरकार और विद्युत वितरण कंपनी की ओर से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अब तक की व्यवस्था के अनुसार बिजली बिल जमा करने की अंतिम तिथि निकल जाने के बाद यदि कोई उपभोक्ता एक या दो दिन की देरी से भी भुगतान करता था, तो उससे पूरे महीने का अतिरिक्त विलंब शुल्क यानी सरचार्ज वसूल लिया जाता था, जिससे आम जनता पर आर्थिक बोझ काफी बढ़ जाता था। लेकिन अब इस पुराने और जटिल नियम में बड़ा बदलाव करते हुए यह तय किया गया है कि उपभोक्ताओं से पूरे महीने का सरचार्ज नहीं लिया जाएगा, बल्कि जितने दिनों की वास्तविक देरी होगी, केवल उतने ही दिनों का आनुपातिक शुल्क वसूला जाएगा। नए नियमों के मुताबिक बिजली बिल की राशि पर अब प्रतिदिन के हिसाब से 0.04 प्रतिशत की दर से विलंब शुल्क की गणना की जाएगी। उदाहरण के तौर पर यदि किसी उपभोक्ता का 4,000 रुपए का बिजली बिल है और भुगतान में एक दिन की देरी हो जाती है, तो पुरानी व्यवस्था के तहत उसे डेढ़ प्रतिशत की दर से करीब 60 रुपए सरचार्ज देना पड़ता था, जो अब घटकर मात्र 1.60 रुपए रह जाएगा। इसी प्रकार 50,000 रुपए तक के बड़े बिलों पर भी एक दिन की देरी का जुर्माना अब भारी-भरकम राशि की बजाय मामूली शुल्क के रूप में लिया जाएगा, जिससे बड़े व्यावसायिक और घरेलू उपभोक्ताओं दोनों को भारी राहत मिलेगी। हालांकि, इसके साथ ही एडवांस में बिजली बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं के नियमों में भी थोड़ा बदलाव किया गया है, जिसके तहत पहले मिलने वाली 1.25 प्रतिशत की अग्रिम भुगतान छूट को घटाकर अब 0.75 प्रतिशत कर दिया गया है। बिजली विभाग के इस नए और उपभोक्ता-हितैषी फैसले से उन लाखों मध्यम वर्गीय परिवारों, वेतनभोगियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत मिलेगी जो कई बार किन्हीं कारणों से तय समय सीमा के भीतर अपना बिजली बिल जमा करने में असमर्थ रह जाते थे।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की पीजीआई-डी रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ के किसी भी जिले को नहीं मिला टॉप ग्रेड
Education News: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी की गई परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स फॉर डिस्ट्रिक्ट्स (PGI-D) रिपोर्ट ने छत्तीसगढ़ की स्कूली शिक्षा व्यवस्था के धरातल पर मौजूद वास्तविक और गंभीर पहलुओं को उजागर कर दिया है। इस प्रतिष्ठित रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ का एक भी जिला शीर्ष ग्रेड यानी ‘उत्कर्ष’ या ‘उत्तम-1’ श्रेणी को हासिल करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है, जो राज्य के शैक्षणिक तंत्र के लिए एक बड़ा विचारणीय विषय है। रिपोर्ट के अनुसार रायगढ़ जिले ने पूरे छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक 329 अंक प्राप्त कर राज्य में पहला स्थान हासिल किया है, जबकि सरगुजा, बीजापुर और दुर्ग क्रमशः उसके बाद के स्थानों पर रहे हैं और इन चारों जिलों को ‘प्रचेष्टा-1’ ग्रेड में जगह मिली है। राजधानी रायपुर की बात करें तो यह शहर डिजिटल लर्निंग के मामले में 50 में से 24 अंक प्राप्त कर पूरे प्रदेश में अव्वल जरूर रहा, लेकिन कुल अंकों और समग्र प्रदर्शन के मामले में यह टॉप-3 जिलों में भी अपनी जगह बनाने में असफल रहा, जिससे यह साबित होता है कि केवल एक क्षेत्र में संसाधन होना ही संपूर्ण सफलता की गारंटी नहीं है। सबसे चिंताजनक और कमजोर तस्वीर बस्तर संभाग से सामने आई है, जहाँ सुकमा जिले को कुल मात्र 255 अंक मिले और डिजिटल लर्निंग की श्रेणी में तो सुकमा को 50 में से महज 6 अंक तथा नारायणपुर को मात्र 7 अंक प्राप्त हुए हैं, जो आदिवासी बहुल दूरस्थ क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा की बदहाल स्थिति को साफ दर्शाता है। यह रिपोर्ट एक तरफ जहां राज्य सरकार द्वारा पिछले दो वर्षों में स्कूलों के युक्तियुक्तकरण और शिक्षकों की पदोन्नति जैसे सुधार कार्यों के दावों की पोल खोलती है, वहीं दूसरी तरफ सरकार के सामने बस्तर जैसे सुदूर इलाकों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की एक बड़ी और कठिन चुनौती भी पेश करती है।
बिलासपुर में नीट-पीजी परीक्षा के दौरान 40 कंप्यूटर ठप होने से मचा हड़कंप
Exam Update: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में आयोजित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-PG) के दौरान एक बड़ा तकनीकी संकट खड़ा हो गया, जिससे परीक्षा देने पहुंचे सैकड़ों अभ्यर्थियों की सांसे अटक गईं। बिलासपुर के प्रज्ञा मंडप परीक्षा केंद्र में रविवार को जैसे ही परीक्षा शुरू हुई, उसके महज 15 मिनट के भीतर ही एक के बाद एक लगभग 40 कंप्यूटर अचानक पूरी तरह से बंद हो गए और तकनीकी खराबी के चलते उन पर परीक्षा का निर्धारित सॉफ्टवेयर चलने के बजाय बार-बार गूगल की विंडोज खुलने लगी। इस अचानक आई तकनीकी गड़बड़ी से परीक्षा केंद्र में हड़कंप मच गया और वहां भारी अफरा-तफरी का माहौल बन गया, क्योंकि देश के सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक में इस तरह की बाधा आना भविष्य के डॉक्टरों के मानसिक तनाव को बढ़ाने वाला था। स्थिति इतनी अधिक बिगड़ गई और छात्रों का गुस्सा इस कदर भड़क उठा कि केंद्र प्रबंधन को तुरंत व्यवस्था संभालने और हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस बल को बुलवाना पड़ा। सूचना मिलते ही तकनीकी विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंची और युद्धस्तर पर प्रयास कर कंप्यूटरों की कमियों को दूर करने का काम शुरू किया गया, जिसके परिणामस्वरूप लगभग एक घंटे की भारी बाधा के बाद कहीं जाकर परीक्षा की प्रक्रिया दोबारा सुचारू रूप से शुरू की जा सकी। परीक्षा दे रहे अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों ने परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी और केंद्र प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि ऑनलाइन परीक्षा शुरू होने से पहले सिस्टम की पुख्ता जांच क्यों नहीं की गई थी। इस प्रकार की गंभीर तकनीकी लापरवाही से न केवल छात्रों का बहुमूल्य समय बर्बाद हुआ बल्कि उनकी मानसिक शांति और एकाग्रता भी बुरी तरह प्रभावित हुई, जिससे पूरे देश में ऑनलाइन परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
छत्तीसगढ़ में सरकारी विभागों पर 3 हजार करोड़ से अधिक का बिजली बिल बकाया, 39 कनेक्शन कटे
Government Action: छत्तीसगढ़ के विभिन्न शासकीय विभागों पर बिजली का भारी-भरकम बकाया एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है, क्योंकि राज्य भर के सरकारी कार्यालयों पर जून 2026 तक कुल 3 हजार 35 करोड़ 37 लाख रुपए का बिजली बिल बकाया होने की आधिकारिक जानकारी सामने आई है। राज्य सरकार द्वारा सरकारी संस्थानों में वित्तीय अनुशासन लाने और बिजली की खपत को नियंत्रित करने के उद्देश्य से गत 1 अगस्त 2026 से प्रीपेड बिजली व्यवस्था लागू कर दी गई है, जिसके बाद से छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) ने बकाएदारों के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। बिजली कंपनी ने सख्त रुख अपनाते हुए अब तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कार्रवाई करते हुए कुल 39 ऐसे बड़े सरकारी संस्थानों और कार्यालयों के बिजली कनेक्शन पूरी तरह से काट दिए हैं जिन्होंने लंबे समय से अपने करोड़ों रुपए के बकाए बिलों का भुगतान नहीं किया था। पावर कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि प्रीपेड व्यवस्था लागू होने के बाद अब नए बिलों का भुगतान एडवांस में होना शुरू हो गया है, लेकिन पुराने भारी-भरकम बकायों को वसूलने के लिए विभाग द्वारा लगातार नोटिस जारी किए जा रहे हैं और कड़े प्रशासनिक कदम उठाए जा रहे हैं। सरकारी दफ्तरों पर इस तरह का करोड़ों रुपए का बकाया राज्य के राजकोष और बिजली कंपनियों की वित्तीय सेहत पर एक बड़ा वित्तीय बोझ डाल रहा है, जिसे कम करने के लिए शासन स्तर पर अब प्रत्येक विभाग के बजट से सीधे बिजली बिल की राशि समायोजित करने की योजना पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इस कड़ी कार्रवाई से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और कई विभागों ने अपने बकाया राशि के भुगतान के लिए वित्त विभाग से अतिरिक्त बजट की मांग शुरू कर दी है, ताकि उनके कार्यालयों की बिजली आपूर्ति सुचारू रूप से बनी रहे।
दंतेवाड़ा के तत्कालीन डीईओ को आय से अधिक संपत्ति के मामले में 4 साल की सजा
Crime Update: छत्तीसगढ़ के भ्रष्टाचार के मामलों में एक बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है, जिसमें दंतेवाड़ा जिले के तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) सुभाष गंजीर को आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में दोषी करार दिया गया है। विशेष न्यायालय ने लंबे समय से चल रहे इस बहुचर्चित मुकदमे में फैसला सुनाते हुए आरोपी पूर्व डीईओ को 4 साल के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। इस पूरे प्रकरण की शुरुआत एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की पुख्ता जांच के आधार पर 14 फरवरी 2017 को अपराध पंजीबद्ध करने के साथ हुई थी, जिसके बाद विशेष अदालत से वारंट प्राप्त कर 15 फरवरी 2017 को जगदलपुर स्थित उनके शासकीय आवास और ओडिशा के कोरापुट स्थित पैतृक निवास पर एक साथ बड़ी छापामार कार्रवाई की गई थी। एसीबी की इस छापेमारी के दौरान आरोपी अधिकारी के बड़े भाई के घर से 8 लाख 71 हजार रुपए नकद, भारी मात्रा में सोने-चांदी के आभूषण तथा कई भूखंडों और मकानों के बेनामी दस्तावेज बरामद किए गए थे, जिससे उनकी अकूत संपत्ति का खुलासा हुआ था। विस्तृत और गहन जांच-पड़ताल के बाद वर्ष 2018 में इस मामले का औपचारिक चालान विशेष अदालत में पेश किया गया, जहाँ अभियोजन पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने मजबूती से पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष पुख्ता सबूत और गवाह पेश किए। अदालत ने एसीबी द्वारा प्रस्तुत किए गए सभी दस्तावेजों को पूरी तरह विश्वसनीय मानते हुए यह पाया कि सुभाष गंजीर ने अपनी वैध आय से लगभग 88 प्रतिशत से अधिक अनुपातहीन और अवैध संपत्तियां अर्जित की थीं, जिसके आधार पर उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत यह सख्त सजा सुनाई गई है। भ्रष्टाचार के मामलों में आया यह कड़ा न्यायिक निर्णय प्रशासनिक तंत्र में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
रायपुर के ऐतिहासिक नंदनवन का 50 करोड़ से होगा कायाकल्प, पीपीपी मॉडल पर बनेगा बॉटनिकल गार्डन
Development News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अटारी गांव में स्थित ऐतिहासिक और प्राकृतिक रूप से महत्वपूर्ण नंदनवन को अब एक आधुनिक, भव्य और बेहद आकर्षक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की मेगा परियोजना को हरी झंडी मिल गई है। मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा इस महत्वाकांक्षी पुनर्विकास परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया गया, जिस पर लगभग 50 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि खर्च किए जाने का प्रस्ताव है। इस व्यापक योजना के तहत नंदनवन के मौजूदा बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से उन्नत किया जाएगा और यहाँ स्थित बॉटनिकल गार्डन को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के आधार पर पुनर्जीवित व विकसित किया जाएगा, ताकि निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और निवेश का लाभ इस ईको-टूरिज्म केंद्र को मिल सके। बैठक में वन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, वित्त सचिव डॉ. रोहित यादव, आवास एवं पर्यावरण सचिव अंकित आनंद और नवा रायपुर विकास प्राधिकरण (NRDA) के सीईओ चंदन कुमार समेत कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने इस परियोजना को तय समय-सीमा के भीतर धरातल पर उतारने की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की। मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस ईको-टूरिज्म स्पॉट के विकास के दौरान पर्यटकों की आधुनिक सुविधाओं, पारिवारिक मनोरंजन के साधनों और सुरक्षा के सभी उच्च मानकों का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि यह स्थल छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में अपनी एक अलग पहचान बना सके। इस प्रोजेक्ट के पूरा हो जाने से न केवल राजधानी रायपुर के नागरिकों को वीकेंड मनाने के लिए एक बेहतरीन और आधुनिक प्रकृति-आधारित केंद्र मिलेगा, बल्कि राज्य में पर्यटन उद्योग को भी एक नया और मजबूत बढ़ावा मिलने की पूरी उम्मीद है।



