CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें सरकार ने जारी किया बड़ा आदेश महादेव ऑनलाइन बेटिंग सिंडिकेट पर DGGI का बड़ा शिकंजा, 40,603 करोड़ रुपये से अधिक की GST मांग का नोटिस जारी जिलों में चार बार रिमाइंडर के बावजूद भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने पर सरकार नाराज बिलासपुर के तखतपुर में नदी में डूबने से तीन स्कूली बच्चों की दर्दनाक मौत के बाद शिक्षा विभाग सख्त दंतेवाड़ा में शराब के साथ चखना बनाने के लिए मॉनिटर लिजार्ड यानी गोह का शिकार कर खाने वाले तीन युवक गिरफ्तार हिरासत में मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट की छत्तीसगढ़ सरकार पर सख्त टिप्पणी राज्यपाल रामेन डेका के खिलाफ आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला छत्तीसगढ़ के इतिहास, संस्कृति और विरासत का डिजिटल खजाना अब घर बैठे उपलब्ध भानुप्रतापपुर में अरहर और चेंच भाजी की फसल के बीच छिपाकर की जा रही गांजे की अवैध खेती का खुलासा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में परीक्षा से पहले एक बार फिर प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आया समेत पढ़ें छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें…

CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की सभी बड़ी और छोटी खबरें रोजाना हमारी नजर में रहती हैं। दक्षिण कोसल के विशेष सेगमेंट ‘CG की 10 बड़ी खबरें’ में हम आपको समाचार जगत की हर गतिविधि का अपडेट सरल और सहज भाषा में प्रदान करेंगे। तो आइए, पत्रकारिता की इस दुनिया में बने रहें और छत्तीसगढ़ की हर ताजातरीन खबर से अपनी जानकारी को और विस्तृत करे
निगम, मंडल और आयोगों के 18 अध्यक्षों और उपाध्यक्षों को मिला मंत्री का दर्जा
Politics: छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने 27 अगस्त को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए राज्य के विभिन्न निगमों, मंडलों और आयोगों के 18 अध्यक्षों तथा उपाध्यक्षों को मंत्री का दर्जा प्रदान किया है। इस फेरबदल के तहत तीन प्रमुख पदाधिकारियों को कैबिनेट मंत्री और 15 को राज्यमंत्री का दर्जा मिला है। कैबिनेट मंत्री का दर्जा पाने वालों में छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष रामलाल चौहान, राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूप सिंह मण्डावी और छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू शामिल हैं। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य इन संस्थाओं के कामकाज में तेजी लाना और प्रशासनिक समन्वय को बेहतर बनाना है। सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से यह भी निर्देशित किया है कि यह दर्जा केवल शिष्टाचार यानी ‘कर्टसी’ के उद्देश्य से दिया गया है। इससे न तो संबंधित पदाधिकारियों का आधिकारिक प्रोटोकॉल बदलेगा और न ही उनकी वरिष्ठता या संवैधानिक अधिकारों में कोई स्वतः वृद्धि होगी। संबंधित प्रशासकीय विभागों को नियमानुसार इन पदाधिकारियों के लिए सुविधाओं की व्यवस्था करनी होगी। भविष्य में इस कदम से विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और शैक्षणिक आयोगों के माध्यम से सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में और अधिक गति आने की उम्मीद जताई जा रही है।
महादेव बेटिंग सिंडिकेट पर DGGI का बड़ा शिकंजा, 40,603 करोड़ रुपये की GST मांग
Crime Update: छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित महादेव ऑनलाइन बेटिंग सिंडिकेट के खिलाफ केंद्रीय और राज्य की एजेंसियों की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में DGGI रायपुर जोनल यूनिट ने एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए करीब 1.45 लाख करोड़ रुपये के टैक्सेबल कारोबार पर 40,603.02 करोड़ रुपये से अधिक की GST मांग का कारण बताओ नोटिस जारी किया है। 26 अगस्त को जारी किए गए इन दो व्यापक नोटिसों में मुख्य प्रमोटरों, पैनल ऑपरेटरों और प्रमुख सहयोगियों सहित कुल 97 लोगों को पक्षकार बनाया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, यह पूरा वित्तीय फर्जीवाड़ा 1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2024 के बीच की अवधि से जुड़ा हुआ है, जिसमें रोजाना लगभग 99 करोड़ रुपये तक के लेनदेन का अनुमान लगाया गया है। इस नेटवर्क के जरिए होने वाले मुनाफे का 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा सीधे हेड ऑफिस तक पहुंचाए जाने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। इस बड़ी कार्रवाई में सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल जैसे मुख्य नामों के साथ-साथ कई अन्य सहयोगियों को भी घेरे में लिया गया है। विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के ‘गेम्सक्राफ्ट’ फैसले को कानूनी आधार बनाते हुए पुराने ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग लेनदेन को भी टैक्स के दायरे में शामिल किया है। नोटिस मिलने के बाद सभी संबंधित पक्षों को अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा, जिसके आधार पर आगे की कठोर वित्तीय और कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
चार रिमाइंडर के बावजूद जिलों में भर्ती प्रक्रिया ठप, अब कर्मचारी चयन मंडल भरेगा पद
Government: छत्तीसगढ़ महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत जिलों के अधिकारियों की बड़ी लापरवाही का मामला सामने आने के बाद शासन स्तर पर सख्त कदम उठाए गए हैं। मिशन सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत जशपुर, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिलों में सहायक ग्रेड-3 और भृत्य के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए संचालनालय की ओर से चार बार रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। तय डेडलाइन निकल जाने और विज्ञापन जारी न होने के कारण संचालनालय ने इन पदों को जिला स्तर पर भरने के बजाय सीधे छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से भरने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। इस प्रशासनिक सुस्ती के कारण प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, नोनी सुरक्षा योजना, और एकीकृत बाल विकास सेवा जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का कामकाज मैदानी स्तर पर काफी प्रभावित हुआ है, जिससे आम जनता और लाभार्थियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव ने संबंधित जिला कार्यक्रम अधिकारियों को मात्र दो दिन की मोहलत देते हुए कर्मचारी चयन मंडल के पोर्टल के जरिए तत्काल प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए हैं। इस सख्त रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि विभागीय कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी अधिकारियों पर जल्द ही जवाबदेही तय की जा सकती है।
तखतपुर हादसे के बाद शिक्षा विभाग सख्त, जलभराव वाले इलाकों में स्कूल बंद रखने के निर्देश
Education News: बिलासपुर जिले के तखतपुर क्षेत्र में घोंघा नदी के तेज बहाव में तीन स्कूली बच्चों के बह जाने की दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना के बाद शिक्षा विभाग पूरी तरह हरकत में आ गया है। इस गंभीर हादसे से सबक लेते हुए जिला शिक्षा विभाग ने सभी शासकीय और अशासकीय विद्यालयों के लिए सुरक्षा संबंधी नए और कड़े निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के मुताबिक, जिन ग्रामीण और शहरी इलाकों में लगातार बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं या रास्तों में भारी जलभराव की स्थिति बनी हुई है, वहां स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार स्कूलों को बंद रखने या अवकाश घोषित करने के निर्देश प्राच्यों को दिए गए हैं। विभाग ने यह भी सख्त हिदायत दी है कि खराब मौसम या अचानक तेज बारिश शुरू होने पर बच्चों को अकेले घर बिल्कुल नहीं भेजा जाएगा, बल्कि अभिभावकों के सुरक्षित रूप से स्कूल पहुंचने के बाद ही उन्हें उनके साथ विदा किया जाएगा। इस पूरी पहल का मुख्य उद्देश्य मानसून के दौरान स्कूली बच्चों की आवाजाही को पूरी तरह सुरक्षित बनाना और किसी भी अनहोनी को रोकना है। बिलासपुर के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी अजय कौशिक ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों के खिलाफ तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, शिक्षकों से भी अपील की गई है कि वे बच्चों और उनके माता-पिता को जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने के लिए लगातार जागरूक करें।
मॉनिटर लिजार्ड को चखना बनाकर खाने वाले तीन युवक गिरफ्तार, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
Crime Update: दंतेवाड़ा जिले के श्यामगिरी क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण कानूनों को ताक पर रखकर एक बेहद क्रूर और अवैध घटना को अंजाम देने का मामला सामने आया है। तीन स्थानीय युवकों ने जंगल में एक दुर्लभ बंगाल मॉनिटर लिजार्ड यानी गोह का शिकार कर लिया और शराब के साथ चखना बनाने के लिए उसे पकाकर खा गए। आरोपियों ने अपनी इस घिनौनी हरकत का वीडियो बनाकर इंस्टाग्राम पर ‘हुंगा ओयाम’ नाम की आईडी से सोशल मीडिया पर भी अपलोड कर दिया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया। वीडियो के तूल पकड़ते ही प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (PCCF) के निर्देश पर बचेली रेंजर प्रीतेश पांडेय के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों हुंगा ओयाम, कोसा ओयामी और नंदाराम ओयामी को धर दबोचा। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि शिकार की गई मॉनिटर लिजार्ड की उम्र मात्र 3 से 4 महीने थी, लेकिन वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत इस प्रजाति के शिकार पर भी टाइगर या अन्य संरक्षित जीवों की तरह ही 3 से 7 साल तक की कड़ी सजा का प्रावधान है। दंतेवाड़ा क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों के दौरान बाघ, तेंदुआ और अन्य वन्यजीवों के शिकार की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जो वन क्षेत्रों में सुरक्षा और गश्त बढ़ाने की गंभीर जरूरत को रेखांकित करती हैं। फिलहाल, वन विभाग की टीम आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत औपचारिक न्यायालयीन कार्रवाई पूरी करने में जुटी हुई है।
हिरासत में मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, DGP को लगाई कड़ी फटकार
Crime Update: छत्तीसगढ़ में पुलिस हिरासत में हुई एक व्यक्ति की मौत के मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य प्रशासन और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। शीर्ष अदालत ने FIR दर्ज करने में 2 साल 7 महीने की लंबी और अमानवीय देरी तथा बिना पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देखे भ्रामक हलफनामा दायर करने को लेकर छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) को कटघरे में खड़ा किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या राज्य के डीजीपी पूरी तरह से अक्षम हैं और क्या उन्हें बुनियादी पुलिसिंग या कानूनी प्रक्रियाओं के प्रशिक्षण के लिए दोबारा भेजने की आवश्यकता है। इस तीखी सुनवाई के दौरान राज्य की गृह सचिव निहारिका बारिक और डीजीपी अरुणदेव गौतम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े थे, जहां डीजीपी को अपनी गलतियों और प्रक्रियागत भ्रम के लिए अदालत के सामने बार-बार माफी मांगनी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी कड़ी आपत्ति जताई कि मौत का मुख्य कारण पुलिस दस्तावेजों में ‘अल्कोहल विड्रॉल’ बताया गया था, जबकि मूल मेडिकल रिपोर्ट में सिर पर किसी भारी और कुंद वस्तु से गंभीर चोट के निशान दर्ज थे। अदालत ने मृतक के परिजनों को दिए गए मात्र 1 लाख रुपये के मुआवजे को भी अत्यंत निराशाजनक और मानव जीवन के मूल्य के प्रति असंवेदनशील करार दिया है। इस पूरे मामले में अब कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों या विशेष निगरानी दलों की भूमिका पर भी विचार किया जा रहा है।
राज्यपाल के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, शर्तों के साथ FIR रद्द
Politics: छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रामेन डेका से जुड़ी एक आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट और कार्टून को अपने अकाउंट पर साझा करने वाले दो याचिकाकर्ताओं को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। प्रणाल कलिता और लक्ष्यधर राजबोंगसी नामक इन दोनों याचिकाकर्ताओं के खिलाफ रायपुर के सिविल लाइंस थाने में लोकभवन की शिकायत पर आपराधिक धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई थी और पुलिस ने चार्जशीट भी पेश कर दी थी। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने बिना शर्त अपनी गलती स्वीकार की और अदालत में लिखित माफीनामा प्रस्तुत करते हुए भविष्य में इस तरह की भूल न दोहराने का वचन दिया। राज्य सरकार की सहमति और दोनों पक्षों के बीच बनी रजामंदी के बाद अदालत ने यह स्पष्ट निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को अपने फेसबुक सहित सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से वह आपत्तिजनक सामग्री हमेशा के लिए हटानी होगी। इसके साथ ही, उन्हें संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सार्वजनिक रूप से माफी भी प्रकाशित करनी होगी ताकि संवैधानिक पद की गरिमा और मर्यादा पूरी तरह से सुरक्षित रह सके। अदालत ने यह भी माना कि इस मामले में किसी भी प्रकार की शारीरिक हिंसा या प्रत्यक्ष बल प्रयोग का आरोप नहीं था, बल्कि यह केवल सोशल मीडिया पर सामग्री को फॉरवर्ड या री-शेयर करने से जुड़ा मामला था। सभी निर्धारित शर्तों का पालन सुनिश्चित होने के बाद हाईकोर्ट ने दोनों याचिकाकर्ताओं के खिलाफ चल रही समस्त आपराधिक कार्यवाही और FIR को औपचारिक रूप से रद्द कर दिया है।
छत्तीसगढ़ के इतिहास के 12 लाख पन्ने हुए ऑनलाइन, घर बैठे डिजिटल आर्काइव से मिलेगी जानकारी
Education News: छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, इतिहास और पुरातत्व से जुड़े करीब 12 लाख दुर्लभ पृष्ठों के डिजिटलीकरण का कार्य पूरा कर लिया गया है, जिससे राज्य के इतिहास प्रेमियों और शोधार्थियों को बड़ी सौगात मिली है। विभिन्न ऐतिहासिक दस्तावेजों, पांडुलिपियों और कागजी अभिलेखों को सुरक्षित रूप से संरक्षित करने के लिए उन्हें डिजिटल फॉर्मेट में लाकर रायपुर में व्यवस्थित किया जा रहा है। वर्तमान में इन सभी डिजिटल दस्तावेजों के लिए मेटाडेटा और कैटलॉग तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जिसके तुरंत बाद इन्हें एक समर्पित ‘वेब अभिलेखागार पोर्टल’ के माध्यम से आम जनता के लिए ऑनलाइन लॉन्च किया जाएगा। इस डिजिटल क्रांति के बाद इतिहासकार, शोधकर्ता और विश्वविद्यालय के विद्यार्थी घर बैठे ही इंटरनेट के माध्यम से प्रामाणिक ऐतिहासिक दस्तावेजों तक सीधी पहुंच प्राप्त कर सकेंगे। अब तक शोध कार्यों के सिलसिले में लोगों को दिल्ली, भोपाल या अन्य दूरदराज के जिला अभिलेखागारों के चक्कर काटने पड़ते थे, जिससे समय और धन दोनों की भारी बर्बादी होती थी। इसके अलावा, इस डिजिटल आर्काइविंग से छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, लोकगीतों और मौखिक परंपराओं को भी स्थाई रूप से संरक्षित किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी ऐतिहासिक जड़ों से मजबूती के साथ जुड़ी रह सकें। यह अनूठी पहल राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और अकादमिक अनुसंधान के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होने जा रही है।
भानुप्रतापपुर में अरहर और भाजी की आड़ में चल रही थी गांजे की अवैध खेती, 844 पौधे जब्त
Crime Update: छत्तीसगढ़ में अवैध मादक पदार्थों और नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार रंग ला रहा है। इसी क्रम में भानुप्रतापपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम भूसरासटहुल में पुलिस ने एक शातिर किसान द्वारा खेत में छिपाकर की जा रही गांजे की अवैध खेती का पर्दाफाश किया है। आरोपी ने पुलिस और प्रशासनिक निगरानी से बचने के लिए एक बहुत ही शातिर तरीका अपनाया था, जिसमें गांजे के पौधों को खेत के बीचों-बीच उगाई गई अरहर और चेंच भाजी की घनी फसलों के बीच छिपाकर रोपा गया था। मुखबिर की सटीक सूचना पर पुलिस टीम ने जब खेत में अचानक दबिश दी, तो वहां से लगभग 8.50 किलोग्राम कुल वजन वाले 844 हरे गांजे के पौधे बरामद किए गए। जब्त किए गए इन अवैध पौधों की अनुमानित बाजार कीमत करीब 4.25 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने मौके से आरोपी किसान को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। प्रारंभिक पूछताछ में यह बात सामने आई है कि आरोपी ने लगभग चार महीने पहले इन पौधों के लिए बीज तैयार किए थे और फसल की कटाई के समय इन्हें बाजार में बेचने की पूरी तैयारी में था। फिलहाल, पुलिस आरोपी के मोबाइल कॉल डिटेल्स और उसके संपर्कों की बारीकी से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अवैध खेती के पीछे किसी बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का हाथ तो नहीं है।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में फिर परीक्षा से पहले पेपर लीक, छात्रों में मचा हड़कंप
Education News: रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) की परीक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित बीएससी एग्रीकल्चर प्रथम वर्ष के द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा से ठीक 5 घंटे पहले एक मुख्य प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर पीडीएफ फॉर्मेट में वायरल होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। तय कार्यक्रम के अनुसार 19 अगस्त को सुबह 10 बजे ‘फंडामेंटल्स ऑफ जेनेटिक्स’ विषय की महत्वपूर्ण परीक्षा आयोजित होनी थी, लेकिन परीक्षा शुरू होने से काफी पहले ही छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुपों और अन्य डिजिटल माध्यमों पर प्रश्नपत्र की पीडीएफ कॉपी धड़ल्ले से घूमने लगी। छात्रों द्वारा जब वायरल पीडीएफ के प्रश्नों का मिलान वास्तविक परीक्षा प्रश्नपत्र से किया गया, तो उसमें पूछे गए सभी खंडों और दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों में पूर्ण समानता पाई गई, जिससे यह साफ हो गया कि परीक्षा की गोपनीयता भंग हो चुकी है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में पेपर लीक होने का यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि इससे पहले भी दो अन्य परीक्षाओं के दौरान इस तरह की गंभीर लापरवाही सामने आ चुकी है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इस पूरे प्रकरण को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए तेलीबांधा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है और पुलिस से मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच की मांग की है। इस बार की इस बड़ी चूक के बाद पूरे विश्वविद्यालय परिसर में हड़कंप मचा हुआ है और कृषि शिक्षा की साख को बचाने के लिए कड़े प्रशासनिक एवं सुरक्षात्मक कदमों की मांग की जा रही है।
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