CG High Court Decision Adult Right: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: दो बालिगों को मर्जी से जीवनसाथी चुनने का पूरा अधिकार, धमकियों के बीच आन्या और जीशान ने जीती ‘मोहब्बत की जंग’

CG High Court Decision Adult Right: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अंतर्धार्मिक विवाह (इंटरफेथ मैरिज) करने वाले एक प्रेमी जोड़े के पक्ष में बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अदालत ने साफ लफ्जों में कहा है कि देश के कानून के अनुसार दो बालिग व्यक्तियों को अपनी मर्जी से अपना जीवनसाथी चुनने की पूरी आजादी है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले मौलिक अधिकारों का एक अनिवार्य हिस्सा है, जिसे किसी भी स्थिति में छीना नहीं जा सकता. बिलासपुर हाई कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अपनी जान बचाकर भाग रहे एक प्रेमी जोड़े को आखिरकार बड़ी राहत मिल गई है.

जोड़े की सुरक्षा के निर्देश

इस गंभीर मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बिलासपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की संयुक्त खंडपीठ ने विशेष रिट याचिका पर लंबी सुनवाई की. कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए संबंधित जिला पुलिस प्रशासन को कड़े निर्देश जारी किए हैं. अदालत ने कहा है कि इस नवविवाहित जोड़े के जीवन की रक्षा करना और उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बनाए रखना कानूनन पुलिस की जिम्मेदारी है. इसके लिए जो भी आवश्यक कदम उठाने की जरूरत हो, पुलिस प्रशासन तत्काल प्रभाव से उठाए.

आन्या और जीशान का प्रेम प्रसंग

यह पूरा मामला सरगुजा संभाग के जिला मुख्यालय अंबिकापुर का है. यहां के रहने वाले 26 वर्षीय मोहम्मद जीशान और 25 वर्षीय आन्या सोनी एक-दूसरे से बेहद प्यार करते थे. दोनों पढ़े-लिखे और पूरी तरह बालिग हैं. एक ही शहर में रहने की वजह से दोनों के बीच लंबे समय से मेल-जोल था और दोनों ने आगे का जीवन एक साथ बिताने का फैसला कर लिया था. हालांकि दोनों के अलग-अलग धर्मों से जुड़े होने की वजह से समाज और परिवार को यह रिश्ता मंजूर नहीं था.

दिल्ली में कानूनी शादी

जब आन्या और जीशान के स्वजनों को इस अंतर्धार्मिक प्रेम प्रसंग की भनक लगी, तो घर के भीतर उनका कड़ा विरोध शुरू हो गया. दोनों प्रेमियों को अलग करने के लिए उन पर सामाजिक और पारिवारिक दबाव बनाया जाने लगा. जब अपनी बात मनवाने का कोई रास्ता नहीं बचा, तो दोनों चुपचाप शहर छोड़कर देश की राजधानी दिल्ली चले गए. वहां जाकर दोनों ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए 6 दिसंबर 2023 को शाहदरा के जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय (एसडीएम कोर्ट) में स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत पंजीकृत विवाह कर लिया.

ऑनर किलिंग की धमकियां

शादी के बंधन में बंधने के बाद भी आन्या और जीशान की मुश्किलें कम नहीं हुईं. दोनों को अपने ही परिवारों से लगातार जान से मारने, ऑनर किलिंग करने और अपहरण जैसे झूठे आपराधिक मुकदमों में फंसाने की धमकियां मिलने लगीं. भय के माहौल में जी रहे जोड़े ने सुरक्षा के लिए स्थानीय पुलिस से लिखित शिकायत की, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव के चलते पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की. थक-हारकर इस नवविवाहित जोड़े ने अधिवक्ता विवेक कुमार अग्रवाल के माध्यम से हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

सरकार के तर्क खारिज

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के सरकारी वकील ने जोड़े की याचिका का विरोध करते हुए एक अजीब दलील दी. सरकारी वकील ने कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा लगाए गए धमकियों के आरोप बेहद सामान्य और अस्पष्ट हैं, इसलिए इस रिट याचिका को तत्काल खारिज कर दिया जाना चाहिए. हालांकि उच्च न्यायालय ने सरकार के इस ढीले तर्क को पूरी तरह से अमान्य करार दिया. अदालत ने कहा कि जब मामला अंतर-धार्मिक विवाह से जुड़ा हो, तो धमकियों की आशंका को हल्के में बिल्कुल नहीं लिया जा सकता.

सर्वोच्च अदालत का पुराना हवाला

खंडपीठ ने अपने फैसले को मजबूती देने के लिए देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के वर्ष 2006 के ऐतिहासिक फैसले ‘लता सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ का विशेष रूप से उल्लेख किया. कोर्ट ने कहा कि अंतर-जातीय या अंतर-धार्मिक विवाह राष्ट्रीय हित में हैं क्योंकि ये समाज में बरसों से जमी रूढ़िवादी जाति व्यवस्था को तोड़ने में मददगार साबित होते हैं. यदि माता-पिता ऐसे विवाह से असहमत हैं, तो वे ज्यादा से ज्यादा अपने बच्चों से अपने सामाजिक संबंध तोड़ सकते हैं, लेकिन उन्हें डराने, धमकाने, हिंसा करने या प्रताड़ित करने का कोई कानूनी हक नहीं है.

पुलिस को सख्त आदेश

बिलासपुर हाई कोर्ट ने मामले पर आखिरी मुहर लगाते हुए संबंधित पुलिस अधीक्षक (SP) और थाना प्रभारी (TI) को नवविवाहित जोड़े की जान-माल की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी है. अदालत ने साफ कहा कि यदि जोड़े द्वारा भविष्य में अपने परिजनों के खिलाफ कोई भी नई शिकायत दर्ज कराई जाती है, तो पुलिस बिना किसी देरी के उसकी जांच करे और कानून के तहत आवश्यक दंडात्मक कदम उठाए. इसके साथ ही कोर्ट ने नाराज परिजनों को भी सख्त हिदायत दी है कि वे दोनों के शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन में किसी भी प्रकार की दखलअंदाजी न करें.

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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