CG Liquor Scam: भाजपा सरकार में हुआ 3870 करोड़ का शराब ओवर रेटिंग घोटाला, ED-CBI जांच की मांग

CG Liquor Scam: छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर शराब का मुद्दा पूरी तरह गरमा गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने वर्तमान भारतीय जनता पार्टी सरकार पर आबकारी विभाग के जरिए इतिहास का सबसे बड़ा ओवर रेटिंग घोटाला करने का सीधा आरोप मढ़ा है। कांग्रेस का दावा है कि राज्य के भीतर बिकने वाली शराब की बोतलों पर तय कीमत से कहीं अधिक पैसे वसूल कर पिछले ढाई साल के दौरान लगभग 3870 करोड़ रुपये का एक बड़ा संगठित आर्थिक अपराध किया गया है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर अब राज्य में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।

Table of Contents

सत्ता के संरक्षण में चल रहा है पूरा खेल, कांग्रेस संचार प्रमुख का बड़ा दावा

कांग्रेस के प्रदेश संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने रायपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस कथित घोटाले की पूरी रूपरेखा सामने रखी। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि पूरे प्रदेश की सरकारी शराब दुकानों में धड़ल्ले से तय एमआरपी से ज्यादा कीमत पर शराब बेची जा रही है और इस पूरे काले खेल को बड़े राजनेताओं का सीधा संरक्षण मिला हुआ है। शुक्ला ने दावा किया कि काउंटरों पर बैठे कर्मचारियों से जब जनता ज्यादा पैसे लेने का कारण पूछती है, तो वे साफ कहते हैं कि यह अतिरिक्त पैसा ऊपर बैठे बड़े आकाओं तक पहुंचाया जा रहा है।

आरोप लगाने वाले नेता सुशील आनंद शुक्ला,

छोटे कर्मचारियों को बनाया जा रहा है बलि का बकरा, असली गुनहगारों पर मेहरबानी

प्रेस वार्ता के दौरान सुशील आनंद शुक्ला ने हाल ही में विभाग द्वारा की गई कुछ दंडात्मक कार्रवाइयों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब यह मामला स्थानीय मीडिया में प्रमुखता से आया और आम जनता ने दुकानों पर खुलकर विरोध करना शुरू किया, तब जाकर आबकारी विभाग ने महज दिखावे के लिए कुछ छोटे कर्मचारियों और स्थानीय अधिकारियों को सस्पेंड करने की खानापूर्ति की। कांग्रेस नेता का आरोप है कि ये छोटे कर्मचारी तो केवल ऊपर से मिलने वाले मौखिक निर्देशों का पालन कर रहे थे, जिन्हें असली चेहरों को बचाने के लिए बलि का बकरा बना दिया गया।

सरकारी आंकड़ों के जरिए समझें हर दिन होने वाली करोड़ों की इस अवैध कमाई का गणित

Congress Sushil Anand Shukla: कांग्रेस ने इस कथित घोटाले की रकम का ब्यौरा देते हुए कुछ हैरान करने वाले गणितीय आंकड़े भी पेश किए हैं। सुशील आनंद शुक्ला के अनुसार सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में रोजाना औसतन 28 लाख 65 हजार शराब की बोतलों की बिक्री होती है। दुकानों पर हर छोटी-बड़ी बोतल के पीछे ग्राहकों से जबरन 10 रुपये से लेकर 60 रुपये तक की अतिरिक्त वसूली की जा रही है। अगर इस गणित को देखें तो प्रदेश में रोजाना करीब 4 करोड़ 29 लाख रुपये की नाजायज रकम सीधे तौर पर सिंडिकेट के खातों में जमा हो रही है।

महीने की कमाई 129 करोड़ रुपये, पिछले ढाई साल में हुआ हजारों करोड़ का घोटाला

इस दैनिक वसूली के आंकड़े को अगर महीने के स्तर पर आंका जाए, तो यह राशि हर महीने लगभग 129 करोड़ रुपये के करीब पहुंच जाती है। इसी तरह एक साल के भीतर यह अवैध मुनाफा 1548 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लेता है। कांग्रेस का आरोप है कि पिछले ढाई साल के बीजेपी शासनकाल के दौरान यह पूरा सिंडिकेट कुल 3870 करोड़ रुपये की अवैध कमाई डकार चुका है। शुक्ला ने कहा कि यदि इस पूरे संगठित मामले की निष्पक्षता से किसी स्वतंत्र एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, तो सरकार में बैठे कई रसूखदार चेहरों के नाम बेनकाब हो जाएंगे।

कई जिलों में चल रहा है मिलावटी और नकली होलोग्राम वाली शराब का अवैध नेटवर्क

ओवर रेटिंग के अलावा मुख्य विपक्षी दल ने प्रदेश में बेची जा रही शराब की गुणवत्ता पर भी बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी सरकार के आते ही राज्य में नकली और मिलावटी शराब का नेटवर्क बहुत ज्यादा मजबूत हो गया है। हाल ही में रायगढ़ जिले में अवैध रूप से नकली शराब की री-पैकिंग करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ था, जबकि राजधानी रायपुर के तेलीबांधा जैसे पॉश इलाके में नकली होलोग्राम चस्पा की गई शराब की बड़ी खेप पकड़ी गई थी। इन घटनाओं से साफ है कि विभाग की नाक के नीचे समानांतर नेटवर्क चल रहा है।

राजनांदगांव से लेकर बलरामपुर तक फैला जाल, बीयर की बोतल से निकला गंदा पानी

सुशील आनंद शुक्ला ने राज्य के अलग-अलग जिलों का हवाला देते हुए कहा कि राजनांदगांव इस समय अवैध शराब की तस्करी का एक बहुत बड़ा केंद्र बन चुका है। वहीं बलरामपुर जिले की एक सरकारी शराब दुकान से खरीदे गए बीयर के केन और बोतल के भीतर से नाली जैसा गंदा पानी निकलने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। इसके अलावा बस्तर संभाग के जगदलपुर में भी हाल के दिनों में भारी मात्रा में बिना रिकॉर्ड वाली अवैध शराब जब्त की गई है। इन मामलों ने सरकारी दावों की पोल खोल कर रख दी है।

बिना बड़े राजनीतिक वरदहस्त के जिलों की सीमाएं पार करना नामुमकिन, उठे गंभीर सवाल

कांग्रेस ने प्रशासनिक व्यवस्था पर उंगली उठाते हुए पूछा कि आखिर पुलिस और आबकारी विभाग की इतनी कड़ी नाकेबंदी के बावजूद हजारों पेटी अवैध शराब कई जिलों की सरहदें पार करके एक जगह से दूसरी जगह कैसे पहुंच रही है। शुक्ला ने आरोप लगाया कि बिना किसी बड़े राजनीतिक वरदहस्त और प्रशासनिक मिलीभगत के इतना बड़ा परिवहन संभव ही नहीं है। उन्होंने दावा किया कि हर सरकारी दुकान में दो अलग-अलग गल्ले (कैश काउंटर) चलाए जा रहे हैं, जिसमें एक पैसा सरकारी खजाने में जाता है और दूसरा सिंडिकेट की जेब में।

सरकार में आते ही शराब की काली कमाई में जुटी बीजेपी, ED और CBI जांच की मांग

कांग्रेस ने साय सरकार को चुनौती देते हुए कहा है कि अगर वे पूरी तरह से साफ-सुथरे हैं, तो इस पूरे मामले की जांच तुरंत प्रवर्तन निदेशालय (ED) या केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप देनी चाहिए। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि जो बीजेपी नेता पिछले 5 साल तक विपक्ष में बैठकर छत्तीसगढ़ में पूर्ण शराबबंदी लागू करने की बड़ी-बड़ी कसमें खाते थे, वे सत्ता की कुर्सी पर बैठते ही इस काले कारोबार के मुनाफे में हिस्सेदार बन गए हैं। तत्कालीन कांग्रेस सरकार को कोसने वाली बीजेपी आज शराब की खपत बढ़ाने के लिए रोज नए-नए नियम बना रही है।

सरकार की तरफ से अभी तक नहीं आई कोई प्रतिक्रिया, आरोपों की पुष्टि होना बाकी

हालांकि कांग्रेस द्वारा लगाए गए इन सभी वित्तीय और प्रशासनिक आरोपों पर फिलहाल आबकारी विभाग या राज्य सरकार के किसी भी अधिकृत मंत्री की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। बीजेपी के स्थानीय प्रवक्ताओं का कहना है कि विपक्ष अपनी पुरानी गलतियों को छुपाने के लिए बिना किसी पुख्ता सबूत के मनगढ़ंत आंकड़ेबाजी कर रहा है। बहरहाल, सरकार की तरफ से इन गंभीर आरोपों की कोई प्रशासनिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस खुलासे के बाद से छत्तीसगढ़ का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।

Also Read: Bilaspur Snakebite Scam: छत्तीसगढ़ में सर्पदंश मुआवजा महाघोटाला, सामान्य मौt को सांप का काटना बताकर हड़पे 60 लाख रुपये

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button