CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें छत्तीसगढ़ के वकील अब रहेंगे एडवांस फैसले से अपडेट आजादी के 79 साल बाद भी सहेज कर रखी गई रायपुर दुर्ग टेंडर घोटाला बांगो डैम के 5 गेट खुले 35 गांवों में बाढ़ का अलर्ट सब इंस्पेक्टर को 15 साल की जेल निजी अस्पताल बिलिंग नियम सरकारी दफ्तरों पर 3432 करोड़ बकाया आजादी के 78 साल बाद भी छत्तीसगढ़ में जारी है रायपुर के होटल में युवती की हत्या कॉलेजों में एडमिशन की अंतिम तारीख बढ़ी समेत पढ़ें छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें…

CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की सभी बड़ी और छोटी खबरें रोजाना हमारी नजर में रहती हैं। दक्षिण कोसल के विशेष सेगमेंट ‘CG की 10 बड़ी खबरें’ में हम आपको समाचार जगत की हर गतिविधि का अपडेट सरल और सहज भाषा में प्रदान करेंगे। तो आइए, पत्रकारिता की इस दुनिया में बने रहें और छत्तीसगढ़ की हर ताजातरीन खबर से अपनी जानकारी को और विस्तृत करे

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में 15 अगस्त से शुरू हुई AIR ऑनलाइन कानूनी लाइब्रेरी

Legal Update: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में 15 अगस्त 2026 से ऑल इंडिया रिपोर्टर (AIR) की डिजिटल कानूनी लाइब्रेरी की औपचारिक शुरुआत की गई है, जिसका उद्घाटन मुख्य जस्टिस रमेश सिन्हा ने किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश का कोई भी वकील देश की शीर्ष अदालतों के फैसलों से अछूता न रहे। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुप्रीम कोर्ट और देश के सभी उच्च न्यायालयों के रिपोर्टेड जजमेंट मोबाइल पर ही आसानी से उपलब्ध होंगे, जिससे वकीलों को भारी-भरकम और मोटी किताबें साथ लेकर चलने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इस सुविधा का सबसे बड़ा लाभ नए और युवा अधिवक्ताओं को मिलेगा, जो अपने शुरुआती करियर में आर्थिक तंगी के कारण महंगे सब्सक्रिप्शन या कानूनी जनरल्स खरीदने में असमर्थ होते हैं। मूल रूप से करीब 22 हजार रुपए प्रति वर्ष मिलने वाला यह व्यक्तिगत सब्सक्रिप्शन हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के प्रयासों से सदस्यों को मात्र 2 हजार रुपए की रियायती दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे लगभग 20 हजार रुपए की सीधी राहत मिल रही है। शुरुआत में बिलासपुर, रायपुर, अंबिकापुर, दुर्ग, रायगढ़ और राजनांदगांव सहित विभिन्न जिलों के लगभग 400 अधिवक्ताओं ने इस सुविधा से जुड़कर इसका लाभ उठाना शुरू कर दिया है, जबकि पूरे प्रदेश से 4 हजार वकीलों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रजनीश सिंह बघेल और लाइब्रेरी सेक्रेटरी राहुल मिश्रा के अनुसार इस चार महीने पुराने प्रोजेक्ट का उद्देश्य वकीलों की कानूनी रिसर्च और अदालती बहस को अधिक धारदार बनाना है। इस डिजिटल पहुंच से वकीलों की तैयारी मजबूत होगी, जिसका अंततः सीधा और सकारात्मक लाभ न्याय की आस में अदालत आने वाले आम पक्षकारों को मिलेगा।

रायपुर के संस्कृति संचालनालय परिसर में मौजूद ब्रिटिश कालीन मूर्तियों पर उठे सवाल

Culture & Heritage: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के घड़ी चौक के पास स्थित संस्कृति संचालनालय की पार्किंग के शेड में रखी ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम और एडवर्ड सप्तम की आदमकद प्रतिमाएं इन दिनों शहर में एक बड़ा चर्चा और विवाद का विषय बनी हुई हैं। आजादी के 79 वर्ष बीत जाने के बाद भी गुलामी के इन प्रतीकों को सरकारी परिसर में बाकायदा शेड देकर सहेज कर रखे जाने पर स्थानीय नागरिकों और बुद्धिजीवियों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इतिहास के अनुसार, अंग्रेजों ने भारत पर दो सदियों तक शासन करते हुए फूट डालो और राज करो की नीति अपनाई थी, देश के संसाधनों का बेरहमी से दोहन किया था और हर जन-विरोध को क्रूरता से कुचला था, जिसके बाद अनगिनत कुर्बानियों के बाद देश को स्वतंत्रता मिली थी। पार्किंग में मौजूद इनमें से एक प्रतिमा ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज फ्रेडरिक अर्नेस्ट अल्बर्ट यानी जॉर्ज पंचम की है, जो 1910 से 1936 तक यूनाइटेड किंगडम के राजा रहे और जिन्हें 1915 में ब्रिटेन से रायपुर भेजा गया था। दूसरी प्रतिमा अल्बर्ट एडवर्ड यानी एडवर्ड सप्तम की है, जिन्होंने 1901 से 1910 तक हुकूमत संभाली थी और जिनके राज्यारोहण पर 1903 में लॉर्ड कर्जन ने दिल्ली दरबार का आयोजन किया था। आम जनता का यह तर्क है कि इतने दशक गुजर जाने के बाद भी अंग्रेजी राज के इन अवशेषों को इस तरह संभाल कर रखना भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का अनादर है। हालांकि संस्कृति विभाग की ओर से अभी तक इन मूर्तियों को हटाने या उनके सौंदर्यीकरण को लेकर कोई अंतिम प्रशासनिक निर्देश जारी नहीं किया गया है, लेकिन जनता की बढ़ती आपत्तियों के चलते यह मुद्दा शासन स्तर पर विचारणीय बन गया है और आने वाले दिनों में इन औपनिवेशिक अवशेषों के भविष्य को लेकर बड़ा निर्णय लिया जा सकता है।

दुर्ग टेंडर घोटाला: एसीबी ने पूर्व मुख्य अभियंता भागीरथी वर्मा पर पेश की 1500 पन्नों की चार्जशीट

Crime Update: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी-क Corruption Bureau (ACB) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बहुचर्चित टेंडर घोटाले में रिटायर्ड मुख्य अभियंता भागीरथी वर्मा के खिलाफ अदालत में 1500 पन्नों का विस्तृत अभियोग पत्र दाखिल किया है। यह पूरा मामला वर्ष 2019 से 2023 के बीच का है, जब आरोपी अधिकारी अपने पद पर रहते हुए निकायों में विकास कार्यों के टेंडर पास करने और बिल भुगतान की एवज में ठेकेदारों से भारी मात्रा में रिश्वत वसूल रहा था। एसीबी की शुरुआती जांच में यह खुलासा हुआ था कि आरोपी प्रत्येक कार्य के एवज में 25 प्रतिशत तक का मोटा कमीशन तय किए हुए था, जिसके चलते उसने अकूत संपत्ति अर्जित की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीबी ने प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर गत 17 जून को आरोपी को गिरफ्तार किया था और रायपुर, बिलासपुर तथा मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित कुल आठ ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। इन छापों के दौरान जांच एजेंसी को भारी मात्रा में बेनामी संपत्ति, अवैध बैंक लेनदेन के दस्तावेज, लगभग 1.68 करोड़ रुपए नकद, और लगभग 40 हजार रुपए कीमत की दो हीरे की अंगूठियां बरामद हुई थीं, इसके अलावा आरोपी ने अपने आवास में 3.39 लाख रुपए की महंगी टाइल्स और ग्रेनाइट लगवाने के साथ ही बड़ी मात्रा में महंगे घरेलू उपकरण भी जुटाए थे। एसीबी द्वारा प्रस्तुत इस 1500 पन्नों की पुख्ता चार्जशीट में आरोपी के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के तमाम डिजिटल व दस्तावेजी सबूत संलग्न किए गए हैं, जिससे अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष का मामला बेहद मजबूत हो गया है और आने वाले दिनों में कानूनी शिकंजा और अधिक कसने की पूरी संभावना है।

कोरबा में बांगो डैम के खुले 5 गेट, हसदेव नदी के 35 गांवों में प्रशासन ने जारी किया बाढ़ का अलर्ट

Weather Alert: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते मिनीमाता बांगो डैम का जलस्तर तेजी से बढ़कर उसकी कुल क्षमता का 92.48 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिसके बाद सुरक्षा के एहतियाती कदम उठाते हुए प्रशासन ने बांध के 5 गेट खोलकर हसदेव नदी में 3005 क्यूसेक पानी छोड़ दिया है। इस बड़े जल निकासी के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने हसदेव नदी के निचले तटों और आसपास बसे कुल 35 गांवों में आधिकारिक तौर पर बाढ़ का हाई अलर्ट जारी कर दिया है। प्रभावित होने वाले प्रमुख गांवों और क्षेत्रों में बांगो, चर्रा, पोड़ी-उपरोड़ा, कोनकोना, लेपरा, टुनियाकछार, पाथा, गाड़ाघाट, छिनमेर, कछार, कलमीपारा, सिलीयारीपारा, जूनापारा, तिलाईडाड, डुगुपारा, टुंगुमांड़ा, छिर्रापारा, मछलीबाटा, कोरियाघाट, धनगांव, डोंगाघाट, नरमदा, औराकछार, सोनगुड़ा, जेलगांव, झाबू, नवागांव, तिलसाभाटा, लोतलोता, स्याहीमुड़ी, कोडा, हथमार, झोरा और सिरकीकला शामिल हैं, जहां प्रशासनिक अमले द्वारा मुनादी कराकर ग्रामीणों को पूरी तरह सतर्क रहने की हिदायत दी गई है। मौसम विभाग के अनुसार, झारखंड और उससे लगे पश्चिम बंगाल के ऊपर बना एक गहरा डिप्रेशन वर्तमान में काफी सक्रिय है, जिसके प्रभाव से अगले दो दिनों तक छत्तीसगढ़ के कई संभागों में भारी से अति भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। पिछले 24 घंटों के दौरान सरगुजा संभाग के कुसमी क्षेत्र में सबसे अधिक 180 मिमी यानी करीब 7.1 इंच बारिश दर्ज की गई है, जबकि दौरा कोचली, बिहारपुर और प्रतापपुर में भी 130-130 मिमी भारी वर्षा रिकॉर्ड की गई है। आपदा प्रबंधन टीमों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद कर दिया गया है ताकि निचले इलाकों के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

जगदलपुर में फेसबुक के जरिए फंसाकर दुष्कर्म करने वाले सब-इंस्पेक्टर को 15 साल की सश्रम कैद

Crime Update: बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर की एक फास्ट ट्रैक कोर्ट ने प्रेमजाल में फंसाकर शारीरिक शोषण करने और कानून के विरुद्ध दूसरी शादी रचाने के एक सनसनीखेज मामले में कड़ा ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी पुलिस सब-इंस्पेक्टर विकेश चौहान को दोषी करार देते हुए कुल 15 साल के कठोर सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने अपराधी पर 15,000 रुपए का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है, जिसे अदा न करने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता और आरोपी सब-इंस्पेक्टर की पहली मुलाकात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के माध्यम से हुई थी, जहां आरोपी ने खुद को तलाकशुदा बताकर पीड़िता का विश्वास जीता और उसे शादी का झूठा वादा देकर बस्तर के जगदलपुर ले आया। यहां किराए के मकान में और बाद में एक स्थानीय मंदिर में शादी का भरोसा देकर उसने लगातार पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाए, लेकिन कुछ समय बाद जब पीड़िता को यह पता चला कि आरोपी की पहली पत्नी अभी भी जीवित है और उनके बीच कोई कानूनी तलाक नहीं हुआ है, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। सच्चाई सामने आने के बाद पीड़िता ने सीधे गंज थाने में साहस दिखाते हुए लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दुष्कर्म और द्विविवाह यानी बिगैमी की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन द्वारा पेश किए गए ठोस वैज्ञानिक साक्ष्यों, डिजिटल चैट्स और गवाहों के बयानों के आधार पर माननीय न्यायाधीश ने आरोपी को दोषी पाया और अपने फैसले में कड़ी टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि एक लोक सेवक के पद पर रहते हुए इस तरह का घृणित अपराध करना समाज के लिए बेहद खतरनाक है, जिससे खाकी की गरिमा धूमिल हुई है। फैसले के तुरंत बाद अदालत परिसर से ही दोषी पुलिसकर्मी को हिरासत में लेकर केंद्रीय जेल भेज दिया गया है, जो पूरे महकमे के लिए एक बड़ा सबक माना जा रहा है।

संसद की स्वास्थ्य समिति की रिपोर्ट: निजी अस्पतालों में इमरजेंसी इलाज और बिलिंग व्यवस्था में होगा बड़ा सुधार

Government: देश के आम नागरिकों को निजी अस्पतालों की मनमानी और भारी-भरकम बिलों से राहत दिलाने के उद्देश्य से संसद की स्वास्थ्य समिति ने अपनी महत्वपूर्ण 176वीं रिपोर्ट लोकसभा और राज्यसभा में आधिकारिक तौर पर प्रस्तुत कर दी है, जिसमें कुल 365 व्यापक सिफारिशें शामिल हैं। प्रो. राम गोपाल यादव की अध्यक्षता में गठित इस 31 सदस्यीय समिति ने लगभग 18 महीने तक देश के विभिन्न राज्यों का विस्तृत दौरा करने और गहन अध्ययन करने के बाद यह 361 पन्नों का रोडमैप तैयार किया है। इस रिपोर्ट का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी प्रस्ताव यह है कि अब निजी अस्पतालों को अपनी मानक प्रक्रियाओं और उपचार पैकेजों की दरें सार्वजनिक करनी होंगी, तथा मरीज को अस्पताल में भर्ती करते समय ही इलाज के अनुमानित खर्च की पूरी लिखित जानकारी देनी होगी ताकि डिस्चार्ज के वक्त अचानक आने वाले भारी बिलों के मानसिक तनाव से परिजनों को बचाया जा सके। इसके अलावा, समिति ने అత్యంత कड़े शब्दों में यह सिफारिश की है कि किसी भी गंभीर इमरजेंसी या दुर्घटना की स्थिति में अस्पताल प्रबंधन मरीज के परिजनों से इलाज से पहले पैसे जमा करने के लिए कदापि नहीं कहेंगे, बल्कि जान बचाने को सर्वोपरि मानते हुए तुरंत इलाज शुरू करना होगा और भुगतान की प्रक्रिया उपचार आरंभ होने के बाद पूरी की जाएगी। चिकित्सा क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए दवाओं और सर्जिकल उपकरणों की लैंडिंग प्राइस तथा अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के बीच का अंतर अधिकतम 20 प्रतिशत तक सीमित करने का सुझाव दिया गया है, ताकि मरीजों को महंगी ब्रांडेड दवाओं के जाल से मुक्ति मिल सके। साथ ही, आयुष्मान भारत योजना (AB-PMJAY) का दायरा मौजूदा 5 लाख रुपए से बढ़ाकर 10 लाख रुपए प्रति परिवार करने, इसमें 600 नई महंगी बीमारियों को शामिल करने, तथा 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों व 60 वर्ष से अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को आय सीमा के बंधन से मुक्त कर इस बीमा कवर का सीधा लाभ देने की संस्तुति की गई है। हालांकि यह रिपोर्ट अभी तक प्रत्यक्ष कानून नहीं बनी है, किंतु स्वास्थ्य मंत्रालय को इस पर अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करनी होगी, जिसके बाद इन नियमों को चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाने की पूरी उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ के सरकारी दफ्तरों पर 3432 करोड़ का बिजली बिल बकाया, अगस्त से लगेंगे स्मार्ट प्री-पेड मीटर

Government: छत्तीसगढ़ सरकार ने बिजली विभाग के बढ़ते घाटे और सरकारी विभागों में बरती जाने वाली लापरवाही पर अंकुश लगाने के लिए एक कड़ा कदम उठाते हुए अगस्त 2026 से सभी सरकारी कार्यालयों में स्मार्ट प्री-पेड मीटर अनिवार्य रूप से लागू करने का बड़ा निर्णय लिया है। ऊर्जा विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक सरकारी विभागों पर बिजली बिल का बकाया 2883.42 करोड़ रुपए था, जो मात्र तीन महीने यानी जून 2026 तक बढ़कर भारी-भरकम 3432.64 करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिसके कारण यह नीतिगत बदलाव करना आवश्यक हो गया है। राज्य के कुल विद्युत कनेक्शनों की स्थिति पर नजर डालें तो 31 मई 2026 तक छत्तीसगढ़ में कुल 1,65,727 सरकारी कनेक्शन रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से 1,43,800 कनेक्शनों पर पहले ही स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, और अब शेष बचे हुए 22,741 कनेक्शनों को तत्काल प्रभाव से प्री-पेड प्रणाली से जोड़ा जा रहा है। इस पूरी योजना के प्रथम चरण में विकासखंड स्तर के कार्यालयों के साथ-साथ सभी उच्च स्तरीय और प्रमुख राजकीय भवनों को शामिल किया गया है, जहां अब पुरानी व्यवस्था के विपरीत पहले बिजली रिचार्ज कराना होगा और अग्रिम राशि उपलब्ध होने पर ही बिजली का उपयोग संभव हो सकेगा। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस नई व्यवस्था के लागू होने से आम नागरिकों की बुनियादी जनसुविधाएं किसी भी सूरत में प्रभावित नहीं होनी चाहिए, अर्थात जलापूर्ति, सीवरेज सिस्टम, स्ट्रीट लाइट और स्वच्छता अभियान पूरी तरह निर्बाध रूप से चलते रहेंगे। इसके साथ ही, पुराने 30 जून 2026 तक के बकाए को माफ न करते हुए उसे चार आसान किस्तों में वसूलने का शिड्यूल तय किया गया है, जिसके तहत जुलाई से सितंबर 2026 के बीच पहली किस्त, अक्टूबर से दिसंबर में दूसरी, जनवरी से मार्च 2027 में तीसरी, और अंतिम चौथी किस्त अप्रैल से जून 2027 के बीच जमा कराई जाएगी। प्रत्येक नगरीय निकाय में एक प्री-पेड नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जिन्हें हर महीने की 5 तारीख तक अनिवार्य रूप से राज्य शहरी विकास अभिकरण को रिचार्ज और खपत की रिपोर्ट भेजनी होगी ताकि प्रशासनिक पारदर्शिता बनी रहे।

आजादी के बाद भी छत्तीसगढ़ के मजदूरों का पलायन और बंधुआ मजदूरी का दर्द बना हुआ है नासूर

Social Issue: देश को स्वतंत्रता मिले भले ही दशकों बीत चुके हों और छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद विकास के तमाम दावे किए जा रहे हों, परंतु आज भी राज्य के ग्रामीण अंचलों से गरीबों और जरूरतमंदों का दूसरे राज्यों में पलायन और बंधुआ मजदूरी की दर्दनाक प्रथा एक गंभीर सामाजिक नासूर बनी हुई है। राजधानी रायपुर से लेकर दूरदराज के गांवों में पक्की सड़कों और बड़े निर्माण कार्यों का जाल बिछने के बावजूद धरातल पर गरीब मजदूरों की आर्थिक बदहाली में कोई खास सुधार नहीं आया है, और वे दलालों के जाल में फंसकर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, ओडिशा और राजस्थान जैसे राज्यों के ईंट भट्ठों व निर्माण स्थलों पर नारकीय जीवन जीने को विवश हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, छत्तीसगढ़ से मजदूरों के पलायन का यह पूरा खेल ‘एडवांस की रकम’ यानी अग्रिम भुगतान के काले चक्र से जुड़ा हुआ है, जहां गांवों में सक्रिय दलाल या ‘सरदार’ गरीब परिवारों को अच्छी मजदूरी का झांसा देकर पहले ही कुछ हजार रुपए नकद एडवांस थमा देते हैं। बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 की धारा 2 के तहत किसी भी मजदूर को कर्ज या अग्रिम भुगतान देकर उससे जबरन काम कराना स्पष्ट रूप से अवैध और एक दंडनीय अपराध है, परंतु विडंबना यह है कि श्रम विभाग के कई स्थानीय अधिकारियों को खुद इस कानून की बुनियादी बारीकियों और प्रावधानों की सटीक जानकारी नहीं है। मानवाधिकार अधिवक्ता विनोद कुमार सिंह का कहना है कि जब कोई पूरा परिवार ठेकेदार से ली गई अग्रिम राशि को चुकाने के लिए बिना निश्चित समय सीमा और उचित वेतन के बंधक बनकर काम करता है, तो वह सीधे तौर पर बंधुआ मजदूरी की श्रेणी में आता है। ‘नेशनल कैंपेन कमिटी फॉर ईरेडिकेशन ऑफ बॉन्डेड लेबर’ (NCCEBL) के संयोजक निर्मल गोराना ने भी इस बात की पुष्टि की है कि किस प्रकार छत्तीसगढ़ के भोले-भाले मजदूरों को संगठित गिरोहों द्वारा तस्करी कर दूसरे राज्यों में धकेला जा रहा है, और यदि समय रहते सरकार ने श्रम कानूनों का सख्ती से पालन नहीं कराया, तो यह अमानवीय त्रासदी यूं ही मासूमों की जिंदगी निगलती रहेगी।

रायपुर के होटल में प्रेमिका की संदिग्ध मौत और प्रेमी द्वारा गला काटने की सनसनीखेज घटना से फैली सनसनी

Crime Update: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के गंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत झूलेलाल चौक के पास स्थित एक निजी होटल के कमरे में शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई और उसी कमरे में उसका साथी युवक बेहद गंभीर हालत में खून से लथपथ पाया गया। घटना की सूचना तब मिली जब होटल के कमरा नंबर 401 का दरवाजा काफी लंबे समय तक अंदर से नहीं खुला और दोपहर करीब साढ़े तीन से पौने चार बजे के बीच कमरे के अंदर से चीखने-चिल्लाने की आवाजें सुनाई देने पर होटल कर्मचारियों ने खिड़की से झांककर देखा। पुलिस और फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर वीडियोग्राफी के साथ दरवाजा खुलवाया, जहां मृत पाई गई युवती की पहचान रिमन मंडावी के रूप में हुई, जो मूल रूप से मोहला-मानपुर जिले की रहने वाली थी और रायपुर स्थित कृषि विश्वविद्यालय में एमएससी (एक्सटेंशन) प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रही थी। वहीं, गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिले युवक की पहचान किशन कुमार भारद्वाज के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित मोहावन का रहने वाला था और रायपुर में रहकर सशस्त्र बलों (Armed Forces) की भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। दोनों ने होटल में अपने वैध पहचान पत्र जमा कर चेक-इन किया था, लेकिन अचानक ऐसी कौन सी परिस्थितियां उत्पन्न हुईं कि कमरे के भीतर यह खूनी संघर्ष हुआ, इसका वास्तविक खुलासा अभी तक आधिकारिक रूप से सामने नहीं आया है। पुलिस और एफएसएल टीम ने घटनास्थल को पूरी तरह सील कर गहन जांच शुरू कर दी है, जिसमें होटल के सीसीटीवी फुटेज, दोनों के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल और डिजिटल साक्ष्य खंगाले जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या या आपसी विवाद का प्रतीत हो रहा है, परंतु मौत के असली कारणों और गुनाह की तह तक पहुंचने के लिए विसरा रिपोर्ट तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद ही आगे की सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

छत्तीसगढ़ के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एडमिशन की अंतिम तिथि बढ़कर हुई 31 अगस्त 2026

Education News: छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र में प्रवेश से वंचित रहे हजारों विद्यार्थियों को बड़ी राहत प्रदान करते हुए महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर अब 31 अगस्त 2026 कर दिया है। पहले के निर्धारित नियमों के अनुसार प्राचार्य स्तर पर प्रवेश की अंतिम तिथि 31 जुलाई तय की गई थी, जिसे बाद में कुलपति की विशेष अनुमति के साथ 14 अगस्त तक बढ़ाया गया था, लेकिन कई छात्रों की शैक्षणिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए शासन ने यह नया आदेश जारी किया है। इस अवधि के विस्तार से उन तमाम विद्यार्थियों को अपना भविष्य सुरक्षित करने का सुनहरा अवसर मिल गया है जो किन्हीं कारणों से पूर्व निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए थे। इस नए चरण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब कॉलेजों में प्रवेश के लिए कोई नई मेरिट सूची जारी नहीं की जाएगी, बल्कि उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार ‘पहले आओ, पहले पाओ’ (First Come, First Served) के पारदर्शी आधार पर रिक्त सीटों पर सीधा प्रवेश दिया जाएगा, यानी जिस भी महाविद्यालय में सीटें खाली हैं, वहां पात्र छात्र पहुंचकर तुरंत दाखिला ले सकते हैं। इस फैसले से विशेष रूप से छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं की द्वितीय (सप्लीमेंट्री) परीक्षा में शामिल होकर सफलता हासिल करने वाले लगभग 23 हजार विद्यार्थियों को सबसे बड़ा फायदा मिला है, क्योंकि मुख्य परीक्षा में असफल रहने या अपने अंकों में सुधार के लिए दोबारा परीक्षा देने वाले इन छात्रों के परिणाम देर से आने के कारण कॉलेज एडमिशन के लिए बेहद कम समय बचा था। उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और महाविद्यालयों के प्राचार्यों को इस संबंध में सख्त निर्देश भेज दिए हैं ताकि 31 अगस्त से पहले सभी इच्छुक और पात्र विद्यार्थियों की प्रवेश प्रक्रिया सुगमता से पूरी कराई जा सके।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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