CGPDS Grain ATM System: फिंगरप्रिंट लगाइए और बोरा भरकर राशन पाइए, जानिए कैसे काम करेगी यह नई मशीन

CGPDS Grain ATM System: छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीब और जरूरतमंद परिवारों को राशन बांटने के पारंपरिक तरीके में बहुत जल्द एक बड़ा तकनीकी बदलाव होने जा रहा है। अब तक राशन कार्ड धारकों को हर महीने चावल और अन्य सामग्री लेने के लिए शासकीय उचित मूल्य की दुकानों पर निर्भर रहना पड़ता था। इस व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए राज्य सरकार प्रदेश में ग्रेन एटीएम (अन्नपूर्णा मशीन) लगाने की तैयारी कर रही है। यह मशीन ठीक बैंक के नकदी निकालने वाले एटीएम की तरह काम करेगी, लेकिन इससे रुपये नहीं बल्कि सीधे तौर पर राशन का चावल बाहर आएगा।

रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट, रावांभाठा में जगह तय

खाद्य विभाग इस नई वितरण प्रणाली की शुरुआत शुरुआती तौर पर एक प्रायोगिक परियोजना (पायलट प्रोजेक्ट) के रूप में करने जा रहा है। इसके लिए पहले चरण में प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर का चयन किया गया है। इन तीनों ही जिला मुख्यालयों में एक-एक ग्रेन एटीएम केंद्र स्थापित किया जाएगा। राजधानी रायपुर में इस केंद्र के लिए रावांभाठा क्षेत्र में आरटीओ कार्यालय के ठीक पीछे मौजूद एक सरकारी भवन का चयन किया गया है। खाद्य विभाग और नागरिक आपूर्ति निगम के आला अधिकारी इस जगह का भौतिक निरीक्षण कर चुके हैं। यहां का प्रयोग सफल रहने पर इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।

उचित मूल्य की दुकानों की कतारों से मिलेगी मुक्ति, 24 घंटे चालू रहेगा सेंटर

पारंपरिक राशन दुकानों पर अक्सर यह देखा जाता है कि महीने के शुरुआती दिनों में उपभोक्ताओं की भारी भीड़ उमड़ती है, जिससे लोगों को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता है। कई बार कामगारों को अपना काम छोड़कर राशन के लिए दिनभर इंतजार करना पड़ता है। खाद्य विभाग के मुताबिक, यह नया ग्रेन एटीएम केंद्र पूरी तरह से ऑटोमैटिक होगा और आम जनता के लिए दिन-रात यानी 24 घंटे चालू रहेगा। राशन कार्ड धारक अपनी दिहाड़ी या नौकरी पूरी करने के बाद रात के समय भी अपनी सुविधा के अनुसार यहां आकर बिना किसी कतार के राशन ले सकेंगे।

राशन कार्ड नंबर और फिंगरप्रिंट से होगा सत्यापन, 30 सेकंड में निकलेगा अनाज

इस मशीन से राशन प्राप्त करने की पूरी विधि बेहद सरल और सुरक्षित रखी गई है। उपभोक्ता को सबसे पहले मशीन के स्क्रीन पर अपने राशन कार्ड का विशिष्ट नंबर दर्ज करना होगा। इसके बाद मशीन में लगे बायोमेट्रिक स्कैनर पर अपना अंगूठा या उंगली रखकर फिंगरप्रिंट का सत्यापन करना होगा। जैसे ही उपभोक्ता की पहचान की पुष्टि होगी, वैसे ही राशन कार्ड में दर्ज पात्र सदस्यों की संख्या के आधार पर आवंटित चावल का कोटा स्क्रीन पर दिखने लगेगा। इसके बाद मशीन के नीचे बोरी या थैला लगाते ही अनाज सीधे उसमें गिर जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में महज 30 से 50 सेकंड का समय लगेगा।

सुरक्षा के लिए तैनात रहेंगे गार्ड, रायपुर खाद्य नियंत्रक ने दी स्थान की जानकारी

चूंकि यह केंद्र चौबीसों घंटे चालू रहेगा और इसमें भारी मात्रा में अनाज का स्टॉक सुरक्षित रखा जाएगा, इसलिए प्रत्येक केंद्र की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। हर ग्रेन एटीएम सेंटर पर सुरक्षा गार्ड की तैनाती रहेगी जो रात के समय आने वाले लोगों को सुरक्षित माहौल देंगे। रायपुर के खाद्य नियंत्रक भूपेंद्र मिश्रा ने इस संबंध में बताया कि राजधानी में पहले केंद्र के लिए स्थान का चयन अंतिम रूप से कर लिया गया है। बहुत जल्द इस भवन में अन्नपूर्णा मशीन और अन्य जरूरी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण स्थापित कर इसका जमीनी स्तर पर ट्रायल शुरू कर दिया जाएगा।

ओडिशा, हरियाणा और राजस्थान के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी लागू होगी यह तकनीक

अनाज वितरण की यह आधुनिक तकनीक देश के लिए बिल्कुल नई नहीं है। छत्तीसगढ़ से पहले ओडिशा, बिहार, राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों के कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में इस तरह के ग्रेन एटीएम का सफल संचालन किया जा रहा है। वहां के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए ही छत्तीसगढ़ सरकार ने भी इस पारदर्शी तकनीक को अपनाने का फैसला किया है। विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था के पूरी तरह लागू होने से न केवल राशन की कालाबाजारी और तौल में होने वाली गड़बड़ी पर पूरी तरह लगाम लगेगी बल्कि गरीब परिवारों को सम्मानजनक तरीके से अनाज मिल सकेगा।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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