
छत्तीसगढ़ में मानसून सत्र की शुरुआत से पहले ही राजनीतिक तापमान काफी बढ़ गया है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में अचानक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) विधायक दल की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है. इस बैठक के सामान्य समय से करीब एक हफ्ते पहले आयोजित होने की वजह से राज्य के राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया है. दरअसल रायपुर के नकटी गांव में हुई हालिया प्रशासनिक कार्रवाई के बाद उत्पन्न परिस्थितियों और विपक्ष के कड़े तेवरों को देखते हुए सत्ता पक्ष समय रहते अपनी रणनीति को चाक-चौबंद कर लेना चाहता है.
सत्र शुरू होने से छह दिन पहले बुलाई बैठक, मंत्रियों और विधायकों को निर्देश
आमतौर पर विधानसभा का सत्र शुरू होने के ठीक एक दिन पहले या उसी दिन सुबह विधायक दल की बैठक करने की परंपरा रही है. इस बार बीजेपी ने इस स्थापित परंपरा से हटकर लगभग छह दिन पहले ही अपने सभी मंत्रियों और विधायकों को रायपुर तलब कर लिया है. मंगलवार शाम होने वाली इस बैठक की अध्यक्षता खुद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय करेंगे. समय से पहले विधायकों को एकजुट करने के इस फैसले से यह साफ जाहिर होता है कि सरकार आगामी सत्र के दौरान विपक्ष को किसी भी मुद्दे पर हावी होने का मौका नहीं देना चाहती.
रायपुर का नकटी विवाद बना मुसीबत, बयानों में अंतर से घिरी सरकार
सूत्रों के मुताबिक इस आपात बैठक को बुलाने की सबसे बड़ी वजह रायपुर के नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई और उसके बाद उपजा विवाद है. इस पूरे घटनाक्रम को लेकर जमीनी स्तर पर सरकार की काफी किरकिरी हो रही है. रही-सही कसर संगठन के पदाधिकारियों और मंत्रियों के बयानों ने पूरी कर दी है, जिनमें आपसी तालमेल की कमी और विरोधाभास साफ नजर आ रहा है. विधानसभा में कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखे तीर चलाने की तैयारी में है, जिसके जवाब के लिए एक साझा रणनीति बनाई जाएगी.
13 जुलाई से शुरू होगा पांच दिवसीय मानसून सत्र, पांच बैठकें हैं प्रस्तावित
छत्तीसगढ़ विधानसभा का आगामी मानसून सत्र 13 जुलाई से प्रारंभ होकर 17 जुलाई तक संचालित होगा. पांच दिनों की अल्पावधि वाले इस सत्र के दौरान कुल पांच बैठकें आयोजित करने का प्रस्ताव है. भले ही कार्यदिवसों की संख्या कम है, लेकिन सरकार के सामने मौजूदा समय में कई ऐसी चुनौतियां हैं जिन पर जवाब देना आसान नहीं होगा. बीजेपी इस बैठक में अपने विधायकों को विभागवार पूरी तैयारी के साथ सदन में मौजूद रहने और विपक्ष के हर हमले का तथ्यात्मक रूप से मुकाबला करने का पाठ सिखाएगी.
अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है विपक्ष, सरकार की उपलब्धियां गिनाने पर जोर
राजनीतिक हलकों से छनकर आ रही खबरों के अनुसार कांग्रेस इस बार विधानसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बना रही है. विपक्ष की इसी आक्रामक घेराबंदी को भांपते हुए बीजेपी ने समय से पहले अपनी ढाल तैयार करना शुरू कर दिया है. बैठक के एजेंडे में सरकार के अब तक के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों को सदन के पटल पर मजबूती से रखने, मंत्रियों द्वारा अपने विभागों की मुस्तैद तैयारी की समीक्षा करने और सभी विधायकों की सक्रिय भागीदारी तय करना शामिल है.
विपक्षी विधायकों ने दागे 1033 से अधिक सवाल, रेत विवाद पर भी मचेगा रार
विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए जमीनी स्तर पर व्यापक आंकड़े जुटाए हैं और विभिन्न सरकारी महकमों से जुड़े 1033 से अधिक सवाल विधानसभा सचिवालय में दर्ज कराए हैं. नकटी गांव के मामले के अलावा कोरिया जिले के सोनहत इलाके में अवैध रेत के कारोबार को लेकर हुए हालिया खूनी संघर्ष का मुद्दा भी सदन में गूंजेगा. इसके साथ ही प्रदेश के किसानों को खरीफ सीजन में खाद-बीज की किल्लत, ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल कानून-व्यवस्था और जनहित से जुड़ी अन्य योजनाओं की धीमी रफ्तार को लेकर भी तीखी बहस होना तय है.
हंगामेदार रहने के आसार, दोनों पक्षों की आक्रामक तैयारी से बढ़ा सियासी पारा
राजनीतिक जानकारों का स्पष्ट मानना है कि यह पांच दिवसीय सत्र बेहद संक्षिप्त होने के बावजूद जबरदस्त हंगामेदार रहने वाला है. एक तरफ जहां विपक्ष जनहित के मुद्दों का हवाला देकर सरकार को पूरी तरह बैकफुट पर धकेलने की कोशिश करेगा, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी भी अपने बहुमत और तर्कों के सहारे पलटवार करने की फिराक में है. ऐसे में मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास में होने वाली यह बैठक केवल एक औपचारिक चर्चा नहीं है, बल्कि यह आगामी विधानसभा सत्र की पूरी दशा और दिशा तय करने वाली साबित होगी.



