वासेपुर का मोस्ट वांटेड गैंगस्टर छत्तीसगढ़ में चला रहा था करोड़ों का साम्राज्य, पुलिस की रेड से ठीक पहले हुआ फरार

झारखंड के कुख्यात इलाके वासेपुर का एक नामी गैंगस्टर पिछले 13 साल से छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था. इस दौरान उसने यहां न सिर्फ शरण ली बल्कि अपने एक सहयोगी के साथ मिलकर करोड़ों रुपये का कारोबारी साम्राज्य भी खड़ा कर लिया. झारखंड पुलिस की एक विशेष टीम तीन दिन पहले उसकी गिरफ्तारी के लिए अंबिकापुर पहुंची थी. स्थानीय स्तर पर छापेमारी की कार्रवाई शुरू होने से ठीक पहले ही यह शातिर अपराधी अपने साथी के साथ एक बार फिर चकमा देकर भागने में सफल रहा.

वासेपुर के दोहरे हत्याकांड में मिली थी उम्रकैद, 2013 से था लापता

यह पूरा मामला साल 2001 में हुए एक सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड से जुड़ा हुआ है. वासेपुर के गैंगस्टर शब्बीर आलम, उसके भाई शाहिद आलम और तीन अन्य सहयोगियों ने मिलकर विरोधी गुट के डॉन फहीम खान की मां नजमा खातून और मौसी शहनाज खातून की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस जघन्य अपराध के बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया था और अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी. साल 2013 में हाई कोर्ट में पेशी के दौरान शब्बीर आलम पुलिस कस्टडी से चकमा देकर फरार हो गया था, जिसके बाद से धनबाद पुलिस ने उसे भगोड़ा घोषित कर रखा था.

अंबिकापुर में आलीशान मकान और एंबुलेंस-बसों का फैलाया बड़ा कारोबार

पुलिस कस्टडी से भागने के बाद शब्बीर आलम ने छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग को अपना नया ठिकाना बनाया. वह अपने साथी जावेद के साथ अंबिकापुर में रहने लगा. यहां रहते हुए उसने स्थानीय रसूखदारों के साथ पार्टनरशिप में बसों का संचालन शुरू किया. इसके अलावा उसने क्षेत्र के औद्योगिक नेटवर्क में अपनी पैठ बनाई. उसने एक आलीशान मकान का निर्माण भी कराया था. शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह यहां पूरी तरह से स्थापित हो चुका था और किसी को उसकी असली पहचान की कानोंकान खबर नहीं थी.

एसईसीएल और औद्योगिक क्षेत्रों में चल रही थीं 40 से ज्यादा एंबुलेंस

जांच एजेंसियों को चकमा देकर फरार हुए इस गैंगस्टर का आर्थिक साम्राज्य बेहद मजबूत था. पुलिस की अब तक की छानबीन में यह बात सामने आई है कि शब्बीर आलम का नेटवर्क एसईसीएल (SECL) समेत अन्य बड़े औद्योगिक और कोलियरी इलाकों में फैला हुआ था. वह इन क्षेत्रों में विभिन्न ठेकों के जरिए 40 से ज्यादा एंबुलेंस और कई यात्री बसों का संचालन प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से कर रहा था. इस बड़े रसद और आर्थिक तंत्र के बूते वह इतने लंबे समय तक कानून की नजरों से बचकर ऐशो-आराम की जिंदगी काट रहा था.

पनाह देने वाले बस संचालक बैदुल खान के खिलाफ पुलिस ने दर्ज की एफआईआर

झारखंड पुलिस की टीम को खुफिया इनपुट मिला था कि शब्बीर अपने सहयोगी के साथ सरगुजा में सक्रिय है. इस सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी की, लेकिन ऐन वक्त पर वह भाग निकला. इस मामले में अंबिकापुर पुलिस ने स्थानीय बस संचालक बैदुल खान और गैंगस्टर के साथी जावेद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, बस संचालक बैदुल खान को पूरी तरह मालूम था कि शब्बीर आलम झारखंड का एक घोषित भगोड़ा और सजायाफ्ता मुजरिम है, इसके बावजूद उसने जानबूझकर उसे कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए अपने यहां पनाह दी थी.

आर्थिक नेटवर्क खंगालने में जुटी पुलिस, मददगारों की बन रही कुंडली

शब्बीर आलम के दोबारा फरार होने के बाद अब छत्तीसगढ़ और झारखंड पुलिस संयुक्त रूप से उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है. इसके साथ ही पुलिस इस पूरे मामले में शामिल उसके स्थानीय मददगारों के आर्थिक नेटवर्क को खंगालने में जुट गई है. पुलिस उन सभी सफेदपोश लोगों और कारोबारियों की कुंडली तैयार कर रही है जिन्होंने पिछले एक दशक में इस गैंगस्टर को व्यापार स्थापित करने और बेनामी संपत्ति जुटाने में वित्तीय मदद पहुंचाई थी. अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में जल्द ही कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं.

Also Read: CG School New Rule: सरकारी स्कूलों के लिए नया अल्टीमेटम: 5वीं और 8वीं के बच्चों को याद होना जरूरी इतने तक पहाड़ा, लापरवाही पर नपेंगे स्कूल प्रमुख

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button