
Dhamtari Seonikhurd Brother Case: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है. अर्जुनी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम सिवनीखुर्द में बड़े भाई की असमय मौत के गम में छोटे भाई ने भी अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली. बड़े भाई के निधन के बाद से वह गहरे अवसाद में था और इसी मानसिक तनाव के चलते उसने जहरीली कृषि दवाई का सेवन कर लिया. इस दर्दनाक हादसे के बाद अब एक बुजुर्ग पिता के सामने उनके तीनों बेटों में से कोई भी जीवित नहीं बचा है.
भाई के बिछड़ने के बाद से मानसिक तनाव में था दानीराम, गम गलत करने के लिए लिया नशे का सहारा
अस्पताल पुलिस चौकी और परिजनों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिवनीखुर्द निवासी 33 वर्षीय दानीराम ध्रुव अपने बड़े भाई के जाने के बाद से काफी अकेला हो गया था. मृतक के बुजुर्ग पिता सुकालूराम ध्रुव ने बताया कि उनका दूसरा बेटा डगेश्वर ध्रुव पेशे से शिक्षक था, जिसका स्वास्थ्य खराब होने की वजह से बीते 26 मई को निधन हो गया था. डगेश्वर की मौत के बाद से दानीराम पूरी तरह टूट चुका था और मानसिक रूप से परेशान रहने के कारण उसने अत्यधिक शराब का सेवन करना शुरू कर दिया था.
दोपहर के वक्त नशे की हालत में खा ली थी निंदानाशक दवाई, कुरूद से जिला अस्पताल किया गया था रेफर
परिजनों के मुताबिक, 30 मई की दोपहर को दानीराम शराब के नशे में धुत होकर घर पहुंचा और उसने खेतों में डाली जाने वाली निंदानाशक कृषि दवाई पी ली. जैसे ही इस बात की जानकारी पिता और अन्य ग्रामीणों को हुई, वे तुरंत उसे इलाज के लिए नजदीकी कुरूद अस्पताल लेकर भागे. दानीराम की गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया था.
पांच दिनों तक चला जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष, अस्पताल में इलाज के दौरान तोड़ा दम
जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड में डॉक्टरों की विशेष टीम दानीराम को बचाने की लगातार कोशिश कर रही थी. जहर का असर शरीर में ज्यादा फैल जाने के कारण उसकी स्थिति लगातार नाजुक बनी हुई थी. लगभग पांच दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच चले संघर्ष के बाद आखिरकार 4 जून को इलाज के दौरान दानीराम ने दम तोड़ दिया. इस खबर के बाद से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है.
नियति का क्रूर मजाक: तीन बेटों के जन्म के बाद भी आज बेसहारा रह गए बुजुर्ग सुकालूराम
बुजुर्ग सुकालूराम ध्रुव के परिवार के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. उन्होंने रुआंसे मन से बताया कि उनके तीन बेटे थे. उनके सबसे बड़े बेटे गोवर्धन का कई साल पहले महज 16 वर्ष की अल्पायु में ही निधन हो गया था. इसके बाद शिक्षक बेटे डगेश्वर ने साथ छोड़ दिया और अब सबसे छोटे बेटे दानीराम की मौत के बाद बूढ़े पिता के बुढ़ापे की आखिरी लाठी भी टूट गई है. अर्जुनी थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर शव का पोस्टमार्टम कराया है और मामले की जांच में जुट गई है.



