
E100 Flex Fuel Rules India: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 में ऐतिहासिक संशोधन की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके तहत देश में अब 100 प्रतिशत इथेनॉल (E100) और 85 प्रतिशत इथेनॉल (E85) से चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों (FFV) के निर्माण, टेस्टिंग और बाजार में उतारने का कानूनी रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। इस फैसले के बाद आम नागरिकों और वाहन चालकों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। आइए 5 आसान सवालों में समझते हैं इस बड़े फैसले के मायने।
1. फ्लेक्स-फ्यूल को लेकर सरकार का नया फैसला क्या है?
Central Motor Vehicle Rules Amendment 2026: सड़क परिवहन मंत्रालय ने नियम 115 के तहत एमिशन नॉर्म्स (उत्सर्जन नियमों), फ्यूल टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन मानकों में बदलाव किया है। इस संशोधन में E85 के साथ E100 (100% बायो-इथेनॉल) को शामिल कर लिया गया है। इसके अलावा, हल्के वाहनों के ग्रॉस व्हीकल वेट की सीमा को 3,000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3,500 किलोग्राम कर दिया गया है। इससे वाहन कंपनियों (OEMs) के लिए 100% इथेनॉल आधारित कारें और व्यावसायिक वाहन तैयार करने के नियम स्पष्ट हो गए हैं।
2. फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी क्या है और यह काम कैसे करती है?
फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल (FFV) में केवल एक ही फ्यूल टैंक होता है। इसकी मुख्य खासियत यह है कि यह पेट्रोल और इथेनॉल के किसी भी मिश्रण पर आसानी से चल सकती है। चाहे टैंक में 100% पेट्रोल हो, E85 हो या फिर शुद्ध E100 इथेनॉल, गाड़ी का इंजन और फ्यूल डिलीवरी सिस्टम खुद-ब-खुद ईंधन के अनुपात को भांपकर परफॉर्मेंस एडजस्ट कर लेता है।
3. क्या मौजूदा पेट्रोल गाड़ियों में E100 या E85 फ्यूल इस्तेमाल हो सकता है?
Maruti WagonR Flex Fuel Test Drive: नहीं, आपकी मौजूदा पेट्रोल कार या बाइक में सीधे E85 या E100 फ्यूल नहीं डाला जा सकता। वर्तमान में सड़कों पर दौड़ रही गाड़ियां E10 या E20 (20% इथेनॉल) के लिए ही डिजाइन की गई हैं। साधारण इंजन में अधिक इथेनॉल डालने पर जंग लगने, रबर पाइप खराब होने और इंजन ब्लॉक होने का खतरा रहता है। E100 का इस्तेमाल केवल उन्हीं नई गाड़ियों में हो सकेगा, जिन्हें विशेष रूप से OEMs द्वारा इसके अनुकूल बनाया और सर्टिफाई किया गया हो।
4. क्या इस फैसले के बाद पुरानी पेट्रोल-डीजल गाड़ियां बंद हो जाएंगी?
MoRTH E100 Ethanol Notification: बिल्कुल नहीं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि फ्लेक्स-फ्यूल नीति का उद्देश्य पुरानी या मौजूदा गाड़ियों को बंद करना नहीं है। यदि आपके पास मौजूदा समय की पेट्रोल या डीजल कार है, तो आप उसे बिना किसी डर के आगे भी सालों तक चला सकते हैं। फ्लेक्स-फ्यूल एक नया और वैकल्पिक विकल्प है, जिससे देश की कच्चे तेल पर निर्भरता कम हो सके।
5. E100 कारें कब तक बाजार में आएंगी और इसका क्या फायदा होगा?
मारुति सुजुकी ने हाल ही में देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार WagonR Flex Fuel पेश की थी, जो E20 से E100 तक के मिश्रण पर दौड़ सकती है। टोयोटा, टाटा और हुंडई जैसी बड़ी कंपनियां भी जल्द अपने मॉडल पेश करने की तैयारी में हैं। सरकारी तेल कंपनियां देश भर में E85 और E100 फ्यूल आउटलेट्स का नेटवर्क बढ़ा रही हैं। इथेनॉल पेट्रोल की तुलना में सस्ता होने के कारण जहां उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ कम होगा, वहीं पर्यावरण में प्रदूषण का स्तर भी काफी घटेगा।
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