
Panchayat Sarpanch No Confidence Motion Financial Fraud: छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के अंतर्गत आने वाले विकासखंड आरंग की ग्राम पंचायत गुजरा में इस समय भारी प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल मची हुई है। ग्राम पंचायत की महिला सरपंच बिंदू बंजारे (पति स्व. कोमल बंजारे) के खिलाफ उपसरपंच और अधिकांश पंचों ने मोर्चा खोल दिया है। असंतुष्ट जनप्रतिनिधियों द्वारा सरपंच के खिलाफ प्रस्तुत किए गए अविश्वास प्रस्ताव को प्रशासनिक स्तर पर विधिवत मंजूरी दे दी गई है। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं विहित प्राधिकारी आरंग ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश और ज्ञापन जारी कर दिया है, जिसके बाद से ही पूरे इलाके की नजरें इस पंचायत पर टिक गई हैं।
आगामी 17 जून को दोपहर 1 बजे बुलाई गई पंचों की विशेष बैठक, पंचायत भवन में ही होगा भाग्य का फैसला
Gujra Panchayat: सरपंच बिंदू बंजारे के खिलाफ लाए गए इस अविश्वास प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा और मतदान (वोटिंग) कराने के लिए प्रशासन ने समय तय कर दिया है। आगामी 17 जून 2026 को दोपहर ठीक 1 बजे ग्राम पंचायत भवन गुज़रा में सभी निर्वाचित पंचों का एक विशेष सम्मेलन आहूत किया गया है। इसी बैठक में पंचों के मतों के आधार पर यह तय होगा कि मौजूदा महिला सरपंच अपने पद पर बनी रहेंगी या उन्हें अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ेगी। प्रशासन ने बैठक की सूचना सभी संबंधितों को भेज दी है।
छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम के तहत सौंपा गया शिकायती पत्र, पंचों ने लगाए हैं गंभीर वित्तीय आरोप
ग्राम पंचायत के उपसरपंच और पंचों ने एकजुट होकर छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 21 और छत्तीसगढ़ पंचायत राज नियम 1994 के कड़े प्रावधानों के तहत एक विस्तृत शिकायती आवेदन उच्च अधिकारियों को सौंपा था। इस आवेदन में सरपंच की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पंचों का कहना है कि पंचायत राज व्यवस्था में सामूहिक निर्णय सर्वोपरि होता है, लेकिन वर्तमान सरपंच द्वारा नियमों को ताक पर रखकर लगातार मनमानी की जा रही है, जिससे विकास कार्य ठप हैं।
बिना काम बताए 6 लाख रुपये की सरकारी राशि निकालने का आरोप, हिसाब मांगने पर दिया गया गोलमोल जवाब
शिकायती पत्र में वित्तीय गबन का एक बड़ा मामला सामने आया है। पंचों का सीधा आरोप है कि पंचायत के बैंक खाते से लगभग 6 लाख रुपये की शासकीय राशि स्वीकृत कराकर आहरित (निकाल) की गई है। सबसे बड़ी गड़बड़ी यह है कि यह भारी-भरकम राशि किस विकास कार्य या सामग्री की खरीदी के लिए निकाली गई, इसका कोई भी विवरण पंचायत के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। जब भी मासिक बैठकों में पंचों ने इस खर्च का हिसाब मांगा, तो सरपंच की ओर से हमेशा गोलमोल जवाब देकर बात को टाल दिया गया।
सरपंच के सगे भाई का अनुचित हस्तक्षेप, बैठकों में बाहरी व्यक्ति के दखल से पंच नाराज
अविश्वास प्रस्ताव के आवेदन में सरपंच के पारिवारिक सदस्यों के हस्तक्षेप को लेकर भी गंभीर आपत्ति जताई गई है। पंचों ने लिखित शिकायत की है कि सरपंच बिंदू बंजारे द्वारा पंचायत की महत्वपूर्ण शासकीय बैठकों और निर्णय लेने की संवेदनशील प्रक्रिया में अपने सगे भाई को अनुचित रूप से शामिल किया जाता है। हैरान करने वाली बात यह है कि सरपंच का भाई न तो गुज़रा ग्राम पंचायत का निवासी है और न ही वह किसी पद पर निर्वाचित प्रतिनिधि है। इस तरह एक बाहरी व्यक्ति का पंचायत के कामों में दखल देना नियमों के खिलाफ है।

मायके में रहने के कारण कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही, जरूरी प्रमाण पत्रों के लिए भटक रहे हैं ग्रामीण
शिकायत के मुताबिक, सरपंच निर्वाचित होने के बाद से ही अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीन बनी हुई हैं। वे नियमित रूप से अपने पंचायत क्षेत्र गुज़रा में उपस्थित नहीं रहती हैं, बल्कि महासमुंद जिले में स्थित अपने मायके ग्राम बिमचा में जाकर निवास करती हैं। सरपंच के लगातार अनुपस्थित रहने के कारण स्थानीय ग्रामीणों को अपने दैनिक और आवश्यक कार्यों जैसे जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और पहचान से जुड़े अन्य जरूरी सरकारी दस्तावेजों के सत्यापन और प्रमाणन के लिए अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
कागजों पर ही दौड़ रहा पानी का टैंकर, बिना सप्लाई हुए ही दो बार में निकाल ली गई हजारों रुपये की राशि
पेयजल व्यवस्था के नाम पर भी पंचायत में बड़ा फर्जीवाड़ा होने का आरोप लगाया गया है। पंचों ने साक्ष्यों के साथ बताया कि भीषण गर्मी के दौर में भी ग्रामीणों के लिए पंचायत में आज तक कोई नया पानी टैंकर खरीदकर नहीं लाया गया। इसके विपरीत, सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार 17 और 18 अक्टूबर 2025 को क्रमशः 11,000 रुपये और 29,750 रुपये की शासकीय राशि पानी टैंकर सप्लाई करने के नाम पर बकायदा आहरित कर ली गई। इस तरह बिना सामग्री आए ही पैसों का भुगतान कर दिया गया।
पुरानी मोटर पंप और पानी टंकी को नया बताकर निकाला बजट, मरम्मत के नाम पर 32 हजार के फर्जीवाड़े का दावा
इसी प्रकार का एक और आर्थिक हेरफेर 12 अगस्त 2025 को किए जाने का दावा शिकायत में किया गया है। पंचों के अनुसार, पंचायत में पहले से ही स्थापित पुरानी मोटर पंप और सिंटेक्स पानी टंकी को रिकॉर्ड में “नवीन निर्माण और विशेष मरम्मत” के रूप में प्रदर्शित किया गया। इस पुराने ढांचे को नया कार्य दिखाकर पंचायत के खाते से 32,000 रुपये की अतिरिक्त राशि का आहरण कर लिया गया, जबकि धरातल पर कोई भी नया निर्माण कार्य या सुधार कार्य नहीं कराया गया था।
बैंक पासबुक और सरकारी रजिस्टर छिपाने का भी लगा आरोप, हिसाब मांगने पर पंचों के साथ दुर्व्यवहार
ग्राम पंचायत के पंचों ने प्रशासनिक अधिकारियों को बताया कि जब भी वे कानूनन पंचायत के वित्तीय अभिलेख, बैंक पासबुक या प्रस्ताव रजिस्टर देखने की इच्छा व्यक्त करते हैं, तो पंचायत सचिव और सरपंच द्वारा सामूहिक रूप से उन्हें साफ मना कर दिया जाता है। निर्वाचित पंचों से जानकारी छिपाना और उनके साथ अभद्र व्यवहार करना पंचायती राज व्यवस्था के मूल सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है। इसी गोपनीयता और तानाशाही रवैये के कारण पंचों को अविश्वास प्रस्ताव का रास्ता चुनना पड़ा।
तहसीलदार मंदिरहसौद विनोद साहू बने पीठासीन अधिकारी, निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से कराई जाएगी वोटिंग
अविश्वास प्रस्ताव पत्र पर त्वरित एक्शन लेते हुए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं विहित प्राधिकारी आरंग, अभिलाषा पैकरा ने 8 जून 2026 को दो महत्वपूर्ण आधिकारिक आदेश जारी किए हैं। आधिकारिक आदेश क्रमांक 511 के तहत पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए मंदिरहसौद के तहसीलदार विनोद साहू को पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया है। वे खुद इस विशेष बैठक की अध्यक्षता करेंगे और गुप्त मतदान की पूरी कार्यवाही की रिपोर्ट सीधे कलेक्टर रायपुर और एसडीएम कार्यालय को सौंपेंगे।
कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात रहेगा भारी पुलिस बल, सचिव को 7 दिन पहले सूचना तामिल कराने के निर्देश
मामले की संवेदनशीलता और विवाद की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। थाना प्रभारी मंदिरहसौद को पत्र जारी कर 17 जून को बैठक के दौरान पर्याप्त संख्या में महिला एवं पुरुष पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही पंचायत सचिव को पाबंद किया गया है कि वे बैठक से ठीक 7 दिन पहले सभी पंचों को अनिवार्य रूप से लिखित सूचना देकर उसकी पावती एसडीएम कार्यालय में जमा कराएं। इस पूरी कार्यवाही की प्रतिलिपि वरिष्ठ आंतरिक लेखा परीक्षक एबल सिंह सिदार को भी आवश्यक निगरानी के लिए भेजी गई है।



