
New Rajendra Nagar Crime Cas: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के न्यू राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहां एक पिता अपनी ही नाबालिग बेटी का शारीरिक शोषण करता रहा। पीड़िता के गर्भवती होने पर उसकी असली उम्र छिपाकर फर्जी दस्तावेजों के सहारे एक निजी अस्पताल में प्रसव कराया गया। इसके बाद नवजात बच्चे को किसी अन्य व्यक्ति को सौंप दिया गया। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी पिता, बुआ और साजिश में शामिल 4 अन्य सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया है।
वर्ष 2023 से शुरू हुआ था शोषण का सिलसिसा, डर के मारे चुप रही पीड़िता
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मुख्य आरोपी पिता ने वर्ष 2023 में अमलीडीह स्थित अपने एक रिश्तेदार के घर में पीड़िता को जान से मारने की धमकी देकर पहली बार दुष्कर्म किया था। इसके बाद वह लगातार डरा-धमकाकर उसका यौन उत्पीड़न करता रहा। भय के माहौल में रहने के कारण पीड़िता ने लंबे समय तक किसी को इस बात की जानकारी नहीं दी। लगातार शोषण के कारण जब वह पहली बार गर्भवती हुई, तब उसने हिम्मत जुटाकर अपनी बुआ को पूरे घटनाक्रम के बारे में बताया।
पहली बार गर्भवती होने पर बुआ की मदद से दी गई गर्भपात की दवा
जब पीड़िता ने बुआ को अपने गर्भवती होने की बात बताई, तो बुआ ने यह जानकारी उसके पिता तक पहुंचा दी। इसके बाद आरोपी पिता बाजार से गर्भपात की दवा लेकर आया। आरोप है कि बुआ और पिता ने मिलकर पीड़िता के साथ मारपीट की और जबरन उसे दवा खिला दी। इस कारण उसका गर्भपात हो गया। कुछ समय बीत जाने के बाद आरोपी पिता ने दोबारा नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया, जिससे वर्ष 2025 में वह फिर से गर्भवती हो गई।
पहचान छिपाने के लिए दो महिलाओं के घर रखा, फर्जी दस्तावेज किए तैयार
दोबारा गर्भवती होने की खबर मिलते ही आरोपी पिता ने मामले को छिपाने की साजिश रची। वह पीड़िता को रायपुर की एक महिला के घर ले गया, जहां से उसे दूसरी महिला के पास भेज दिया गया। पीड़िता लगभग दो महीने तक वहां रही। इस दौरान गिरोह के सदस्यों ने पीड़िता की असली उम्र छिपाकर उसे बालिग और शादीशुदा साबित करने के लिए फर्जी पहचान पत्र और दस्तावेज तैयार किए।
डंगनिया के निजी अस्पताल में कराया प्रसव, नवजात को दूसरे व्यक्ति को सौंपा
तैयार किए गए फर्जी कागजातों के आधार पर पीड़िता को रायपुर के डंगनिया स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां ऑपरेशन के जरिए पीड़िता ने एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया। शिशु के जन्म के तुरंत बाद पिता और अन्य आरोपियों की मौजूदगी में बच्चे को किसी अज्ञात व्यक्ति को सौंप दिया गया। इस दौरान डरी-सहमी पीड़िता से कई सादे और तैयार कागजातों पर जबरन हस्ताक्षर भी कराए गए। प्रसव के कुछ दिन बाद पिता उसे वापस घर ले आया।
17 अगस्त को पीड़िता पहुंची थाने, पुलिस ने शुरू की कड़ी वैधानिक कार्रवाई
आरोपियों के चंगुल से निकलने के बाद पीड़िता ने 17 अगस्त 2026 को हिम्मत दिखाकर न्यू राजेंद्र नगर पुलिस थाने में पूरी आपबीती सुनाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने तत्काल विशेष टीम का गठन किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए जांच के बाद 6 नामजद आरोपियों को हिरासत में ले लिया। पकड़े गए आरोपियों में पीड़िता का पिता, उसकी बुआ, रोहित कुमार राय, साहेब मंडल, योगिता राय और बरखा वर्मा शामिल हैं।
बीएनएस और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज, फॉरेंसिक जांच जारी
पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(2)(एफ), 65, 336, 337, 61(2), 351(2), 115(2), 89, 3(5) के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 4(2), 5(एन), 6 और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 81 के तहत मामला पंजीबद्ध किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 2 मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं।
अस्पताल प्रशासन और फर्जी दस्तावेज बनाने वालों पर भी कसेगा शिकंजा
पुलिस प्रशासन अब इस मामले के तकनीकी और कागजी पहलुओं की गहनता से पड़ताल कर रहा है। फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह, अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही और नवजात को हासिल करने वाले व्यक्ति की तलाश में छापे मारे जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती के समय जमा किए गए पहचान पत्रों का सत्यापन किया जा रहा है और इस आपराधिक षड्यंत्र में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।



