
छत्तीसगढ़ के जगदलपुर स्थित महारानी अस्पताल (मेकाज) से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां प्रसव के लिए आई एक HIV पॉजिटिव महिला के साथ अस्पताल के कर्मचारियों ने बेहद अमानवीय व्यवहार किया। आरोप है कि डिलीवरी होने के ठीक बाद महिला को आराम देने के बजाय उससे जबरन लेबर रूम की साफ-सफाई करवाई गई। इस घटना ने न केवल स्वास्थ्य विभाग की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि अस्पताल के भीतर मरीजों के साथ होने वाले बर्ताव की पोल भी खोल दी है।
पहचान उजागर कर निजता की उड़ाई गईं धज्जियां
पीड़िता का आरोप है कि अस्पताल के स्टाफ ने उसकी बीमारी की जानकारी गुप्त रखने के बजाय उसे सार्वजनिक कर दिया। कानूनन किसी भी HIV संक्रमित व्यक्ति की पहचान उजागर करना अपराध है, लेकिन यहां स्टाफ ने सरेआम महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाई। इस बर्ताव से आहत होकर पीड़िता के परिजनों ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया। शिकायत मिलने के बाद परपा थाना पुलिस ने संबंधित स्टाफ नर्स और अन्य कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस अब मामले की गहराई से तफ्तीश कर रही है।
सामाजिक संगठनों में उबाल, आंदोलन की दी चेतावनी
इस मामले के सामने आते ही सामाजिक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। बस्तर पॉजिटिव नेटवर्क नामक संस्था ने इस घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि एक तरफ सरकार HIV पीड़ितों को मुख्यधारा में जोड़ने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर सरकारी संस्थानों में ही उनके साथ ऐसा भेदभाव हो रहा है। संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर दोषियों के खिलाफ जल्द ही कड़ी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे।
स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों के अधिकारों पर उठे सवाल
इस शर्मनाक वाकये ने स्वास्थ्य विभाग में मरीजों की गोपनीयता और सम्मान से जुड़े नियमों के पालन पर बड़े प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा तो दिया है, लेकिन स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि लेबर रूम जैसे संवेदनशील स्थान पर एक प्रसूता से सफाई करवाना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ाता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में नजीर पेश करने वाली कार्रवाई करता है या इसे भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।



