CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें कसडोल में हनीट्रैप का भंडाफोड़, महासमुंद में पिकाडली कंपनी के गेट पर ग्रामीणों का प्रदर्शन, रायपुर की सोसायटियों का नया महासंघ, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में राज्य देश में अव्वल, दूसरे राज्यों के डॉक्टरों की अनुमति पर विवाद, अबूझमाड़ अवैध कटाई मामले में IIT खड़गपुर करेगा सर्वे, हरियाणा के ईंट भट्ठे में बंधक बने सक्ती के मजदूर, दुर्ग जिला अस्पताल लापरवाही मामले में 4 स्वास्थ्यकर्मी बर्खास्त, UPSC की तर्ज पर CGPSC और व्यापम में AI तकनीक की मांग, और प्रदेश में TET न होने से 85 हजार शिक्षकों की पदोन्नति अटकी समेत पढ़ें छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें…

CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की सभी बड़ी और छोटी खबरें रोजाना हमारी नजर में रहती हैं। दक्षिण कोसल के विशेष सेगमेंट ‘CG की 10 बड़ी खबरें’ में हम आपको समाचार जगत की हर गतिविधि का अपडेट सरल और सहज भाषा में प्रदान करेंगे। तो आइए, पत्रकारिता की इस दुनिया में बने रहें और छत्तीसगढ़ की हर ताजातरीन खबर से अपनी जानकारी को और विस्तृत करे
कसडोल में हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग का भंडाफोड़, पत्रकार सहित 5 गिरफ्तार
बलौदाबाजार जिले के कसडोल थाना क्षेत्र में एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। यहां ग्राम कटगी के सरपंच और बीडीसी सदस्य को सामूहिक दुष्कर्म के झूठे मामले में फंसाकर मोटी रकम वसूलने की योजना बनाई गई थी। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए एक युवती और एक स्थानीय पत्रकार समेत कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। 3 लाख रुपये का दिया गया था लालचपुलिस जांच के अनुसार, 24 जून को एक 18 साल की युवती ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि नौकरी लगाने के नाम पर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया है। जब पुलिस ने मामले की गहराई से जांच की तो पता चला कि यह पूरी तरह से एक मनगढ़ंत कहानी थी। पूछताछ में युवती ने कुबूल किया कि उसकी सहेली और कुछ परिचितों ने मिलकर उसे सरपंच के खिलाफ शिकायत करने के लिए तैयार किया था। इसके बदले में उसे 3 लाख रुपये देने का लालच दिया गया था। गिरोह का मुख्य मकसद निर्दोष लोगों को डराकर जबरन वसूली करना था। गिरफ्तार आरोपियों में भागवत थवाईत, दीपक थवाईत, शिवा चेलक और पत्रकार विजय शंकर तिवारी शामिल हैं। सभी को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
महासमुंद में पिकाडली कंपनी के गेट पर ग्रामीणों का प्रदर्शन, स्थानीय रोजगार की मांग
महासमुंद के ग्राम आछोली में स्थित शराब निर्माता कंपनी पिकाडली के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों और मजदूरों का गुस्सा चरम पर है। रोजगार में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता न मिलने के विरोध में शनिवार से शुरू हुआ प्रदर्शन रविवार को भी जारी रहा। बड़ी संख्या में ग्रामीण कंपनी के मुख्य गेट के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। बाहरी राज्यों के मजदूरों को रखने का आरोप ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन स्थानीय युवाओं को नजरअंदाज करके उत्तर प्रदेश और बिहार से श्रमिकों को लाकर काम पर रख रहा है। इस बीच किसान कांग्रेस के अध्यक्ष मानिक साहू ने भी आंदोलन का समर्थन किया है। उन्होंने बताया कि कंपनी के एक अधिकारी के गैर-जिम्मेदाराना बयान के बाद विवाद और बढ़ गया, जिसमें अधिकारी ने कहा था कि यह सरकार की शराब बनाने वाली कंपनी है और वे अपनी मर्जी से किसी को भी काम पर रखेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि जिस क्षेत्र की जमीन और पर्यावरण का उपयोग उद्योग के लिए हो रहा है, वहां के युवाओं को पहला हक मिलना चाहिए।
रायपुर की 30 सोसायटियों ने बनाया महासंघ, बिल्डरों और रेरा के खिलाफ जाएंगे हाईकोर्ट
रायपुर की निजी हाउसिंग सोसायटियों और कॉलोनियों में रहने वाले नागरिकों ने अपनी समस्याओं को उठाने के लिए एक साझा मंच तैयार किया है। शहर की 30 से अधिक रेसिडेंशियल सोसायटियों ने मिलकर ‘फेडरेशन ऑफ रेसिडेंशियल सोसायटीज़’ का गठन किया है। यह संगठन बिल्डरों की मनमानी, अधूरे प्रोजेक्ट्स और रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी रेरा की कार्यप्रणाली के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेगा। जनहित याचिका दायर करने की तैयारी पाम बेलाजियो में हुई फेडरेशन की पहली बैठक में प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि रेरा की कार्यप्रणाली कई मामलों में बिल्डरों के पक्ष में झुकी हुई नजर आती है, जिससे आम खरीदारों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। संगठन ने निर्णय लिया है कि यदि रेरा ने अपने ही नियमों का कड़ाई से पालन नहीं कराया, तो वे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल करेंगे। छत्तीसगढ़ शासन ने भी इस संगठन को सहयोग का भरोसा दिया है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में छत्तीसगढ़ देश में पहले स्थान पर
छत्तीसगढ़ ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के तहत एक बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि हासिल की है। गर्भवती और शिशुवती माताओं के पंजीकरण के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के शुरुआती 9 दिनों में ही राज्य ने पूरे देश में पहला स्थान प्राप्त कर लिया है। छत्तीसगढ़ ने इस अवधि में अपने निर्धारित लक्ष्य का 72 प्रतिशत पूरा कर लिया है, जो कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है। जांजगीर-चांपा जिला प्रदेश में सबसे आगे शीर्ष जिला: इस अभियान के क्रियान्वयन में जांजगीर-चांपा जिला 96 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर राज्य में सबसे ऊपर रहा है। आर्थिक सहायता: इस योजना के तहत पहली संतान के जन्म पर पात्र महिलाओं को 5,000 रुपये और दूसरी संतान के रूप में बेटी होने पर 6,000 रुपये की राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। अभियान की अवधि: महिला एवं बाल विकास विभाग इस विशेष अभियान को 15 जुलाई 2026 तक जारी रखेगा ताकि बचे हुए लक्ष्य को भी समय से पहले पूरा किया जा सके।
दूसरे राज्यों के डॉक्टरों को अनुमति देने पर विवाद, स्वास्थ्य मंत्री ने दी सफाई
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दूसरे राज्यों में पंजीकृत डॉक्टरों को स्थानीय रजिस्ट्रेशन के बिना प्रदेश में प्रैक्टिस करने की अनुमति देने के प्रस्ताव पर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय डॉक्टर इस फैसले का कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि इससे छत्तीसगढ़ के चिकित्सकों के हितों और उनके अवसरों पर विपरीत असर पड़ेगा। विशेषज्ञों की कमी को दूर करने की कोशिश विवाद बढ़ता देख स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सरकार का पक्ष रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम राज्य में डॉक्टरों की कमी को देखते हुए उठाया जा रहा है। केवल उन्हीं डॉक्टरों को अनुमति मिलेगी जो राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग में वैध रूप से पंजीकृत होंगे। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसरों के 125 पदों के लिए भर्ती निकाली गई थी, लेकिन केवल 78 पद ही भरे जा सके क्योंकि योग्य उम्मीदवार नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि स्थानीय डॉक्टरों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर उनकी आपत्तियों का समाधान निकाला जाएगा।
अबूझमाड़ में पेड़ों की अवैध कटाई पर सरकार सख्त, IIT खड़गपुर करेगा सर्वे
नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हो रही वनों की अवैध कटाई और बिना अनुमति सड़क निर्माण के मामलों को छत्तीसगढ़ सरकार ने गंभीरता से लिया है। वन मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर इस पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जा रहा है, जो विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के लिए नया कदम अबूझमाड़ का क्षेत्र लंबे समय तक बिना सर्वे के रहा है, जिसके कारण वन विभाग को कानूनी कार्रवाई करने में तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। अब सरकार इस समस्या के वैज्ञानिक समाधान के लिए IIT खड़गपुर की मदद ले रही है। संस्थान द्वारा इस क्षेत्र का सटीक सैटेलाइट और भू-डाटा तैयार किया जाएगा। इसके माध्यम से भविष्य में किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे, कटाई या निर्माण पर तुरंत रोक लगाई जा सकेगी।
हरियाणा के ईंट भट्ठे में बंधक बने सक्ती के मजदूर, वापस लाने की गुहार
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से रोजगार की तलाश में हरियाणा गए दर्जनों मजदूरों के एक ईंट भट्ठे में बंधक होने की खबर सामने आई है। पीड़ितों ने सक्ती जिला प्रशासन को वीडियो संदेश भेजकर खुद को सुरक्षित वापस बुलाने की मांग की है। ये मजदूर सक्ती के परसाडीह, बाराद्वार और कारी भावर गांवों के रहने वाले हैं। मजदूरी न मिलने और मारपीट की धमकी का आरोप हरियाणा के हिसार जिले के हांसी क्षेत्र में फंसे इन मजदूरों का कहना है कि लेबर ठेकेदार उन्हें अधिक पैसों का लालच देकर वहां ले गया था। अब उनसे काम तो कराया जा रहा है, लेकिन पूरी मजदूरी नहीं दी जा रही है। जब वे वापस आने की बात करते हैं, तो उन्हें मारपीट की धमकी दी जाती है। मजदूरों का यह भी आरोप है कि वहां के स्थानीय श्रम अधिकारी उनकी मदद करने के बजाय ठेकेदारों का पक्ष ले रहे हैं। सक्ती जिले की श्रम अधिकारी मंजुलता कुर्रे ने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद इस पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई शुरू की जा रही है।
दुर्ग जिला अस्पताल में लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई, 4 स्वास्थ्यकर्मी बर्खास्त
दुर्ग जिला अस्पताल में सिकल सेल बीमारी से पीड़ित एक युवती की मौत के मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उच्चस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर सात स्वास्थ्यकर्मियों पर गाज गिरी है, जिनमें से चार संविदा कर्मचारियों की सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है। यह घटना 1 जून 2026 की है, जब इलाज के दौरान लापरवाही के कारण युवती की जान चली गई थी। ब्लड बैंक में खून होने के बाद भी नहीं मिला समय पर कलेक्टर द्वारा गठित की गई जांच टीम की रिपोर्ट में सामने आया कि घटना के समय अस्पताल के ब्लड बैंक में 85 यूनिट रक्त उपलब्ध था। इसके बावजूद मरीज को समय पर खून चढ़ाने की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई और परिजनों से ही डोनर लाने को कहा गया। इस गंभीर लापरवाही के कारण रेडक्रॉस और एनएचएम के तहत कार्यरत दो लैब टेक्नीशियन और दो स्टाफ नर्सों को नौकरी से निकाल दिया गया है। इसके अलावा तीन अन्य नियमित डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
UPSC की तर्ज पर CGPSC और व्यापम में भी AI तकनीक लागू करने की मांग
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का सहारा लेना शुरू कर दिया है। इस नई तकनीक की मदद से आयोग ने शुरुआती स्तर पर ही 569 संदिग्ध और डुप्लीकेट आवेदनों को पहचानकर निरस्त कर दिया है। इस सफल प्रयोग के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी CGPSC और व्यापम की परीक्षाओं में इस तकनीक को अपनाने की मांग तेज हो गई है। सॉफ्टवेयर पकड़ता है संदिग्ध पैटर्न तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, AI सिस्टम एक जैसे नाम, जन्मतिथि, फोटो और डिजिटल फुटप्रिंट का बारीकी से विश्लेषण करता है। इससे उन मामलों को आसानी से पकड़ा जा सकता है जहां एक ही अभ्यर्थी अलग-अलग पहचान से कई फॉर्म भर देता है। रायपुर के प्रतियोगी छात्रों और कोचिंग संचालकों का कहना है कि राज्य की भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने के लिए इस डिजिटल अपग्रेडेशन की सख्त जरूरत है। हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि तकनीक केवल संदिग्धों की पहचान कर सकती है, अंतिम फैसला इंसानी जांच के बाद ही होना चाहिए।
छत्तीसगढ़ में शिक्षक पात्रता परीक्षा न होने से 85 हजार शिक्षकों की पदोन्नति अटकी
छत्तीसगढ़ में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के आयोजन की तारीख घोषित न होने से सरकारी स्कूलों के हजारों शिक्षकों में असमंजस की स्थिति है। शिक्षा विभाग के नए नियमों और अदालती निर्देशों के कारण अब सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए भी यह परीक्षा उत्तीर्ण करना आवश्यक हो गया है, जिसके बिना उन्हें पदोन्नति का लाभ नहीं मिल सकेगा। वरिष्ठ शिक्षकों के सामने बड़ी चुनौती
| शिक्षक श्रेणी | संख्या | स्थिति |
| कुल कार्यरत सरकारी शिक्षक | लगभग 1,90,000 | कार्यरत |
| TET उत्तीर्ण शिक्षक | लगभग 35,000 | सुरक्षित |
| बिना TET वाले शिक्षक | लगभग 85,000 | पदोन्नति प्रभावित |
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, प्रभावित शिक्षकों में से लगभग 70 हजार शिक्षक ऐसे हैं जिनकी सेवानिवृत्ति में पांच साल से कम का समय बचा है। वरिष्ठ शिक्षकों का कहना है कि करियर के इस अंतिम पड़ाव पर अचानक परीक्षा देना उनके लिए कठिन है। शिक्षक संगठनों ने सुझाव दिया है कि अनुभवी शिक्षकों के लिए किसी अलग विभागीय मूल्यांकन या अनुभव आधारित पात्रता का विकल्प दिया जाना चाहिए। फिलहाल लोक शिक्षण संचालनालय इस मामले में विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहा है।



