CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें रेंट कंट्रोल एक्ट 2026 पास, जेलों में 5 साल में 375 मौतें, रायपुर में 80 टन खैर लकड़ी जब्त, अंबिकापुर बाल सुधार गृह से फिर 13 नाबालिग फरार, सड़कों के मुद्दे पर विधानसभा में 8 विधायकों ने पूछे सवाल, सहायक शिक्षकों की हड़ताल से स्कूलों में तालाबंदी, जगदलपुर में गोंचा महापर्व शुरू, कॉल मी प्लेसमेंट एजेंसी पर विधानसभा में तीखी बहस, कैग रिपोर्ट में DMF के 4536 करोड़ के खर्च पर सवाल और डोंगरगढ़ में पानी भरे गड्ढे में डूबने से 3 मासूमों की मौत समेत पढ़ें छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें…

CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की सभी बड़ी और छोटी खबरें रोजाना हमारी नजर में रहती हैं। दक्षिण कोसल के विशेष सेगमेंट ‘CG की 10 बड़ी खबरें’ में हम आपको समाचार जगत की हर गतिविधि का अपडेट सरल और सहज भाषा में प्रदान करेंगे। तो आइए, पत्रकारिता की इस दुनिया में बने रहें और छत्तीसगढ़ की हर ताजातरीन खबर से अपनी जानकारी को और विस्तृत करे
छत्तीसगढ़ रेंट कंट्रोल बिल 2026 पास: मकान मालिक और किरायेदारों के बीच का विवाद होगा खत्म
छत्तीसगढ़ विधानसभा ने भाड़ा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी है। इस नए कानून के जरिए राज्य में मकान मालिकों और किरायेदारों के रिश्तों को और ज्यादा पारदर्शी और संतुलित बनाने का प्रयास किया गया है। सरकार के मुताबिक, यह नया बदलाव बदलते समय की जरूरतों और केंद्र सरकार के मॉडल टेनेंसी एक्ट 2021 को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य किरायेदारी से जुड़े मुकदमों को कम करना और दोनों पक्षों को मजबूत कानूनी सुरक्षा देना है।नए कानून के तहत किरायेदारी का एग्रीमेंट सिर्फ दो पक्षों तक ही सीमित नहीं रहेगा। अगर मकान मालिक या किरायेदार में से किसी की मृत्यु हो जाती है या कोई अन्य परिस्थिति आती है, तो यह एग्रीमेंट उनके कानूनी वारिसों पर भी पूरी तरह लागू रहेगा। इस कदम से भविष्य में खड़े होने वाले विवादों को काफी हद तक रोका जा सकेगा और कोर्ट में लंबित मामलों में भी कमी आएगी।आजकल बहुत से मकान मालिक अपनी संपत्तियों की देखरेख के लिए प्रॉपर्टी मैनेजर रखते हैं। इस कानून में पहली बार प्रॉपर्टी मैनेजर को कानूनी मान्यता दी गई है। कानून में उनके अधिकार और जिम्मेदारियां स्पष्ट की गई हैं। अगर कोई प्रॉपर्टी मैनेजर अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता भी साफ कर दिया गया है।कई बार ऐसे हालात बनते हैं जब किसी विवाद के कारण मकान मालिक किराया स्वीकार करने से मना कर देता है। नए कानून में इसका भी समाधान निकाला गया है। अब किरायेदार एक तय प्रक्रिया के तहत सरकारी माध्यम से किराया जमा करा सकेंगे। इससे किरायेदारों के अधिकारों की सुरक्षा होगी और भुगतान को लेकर होने वाले विवादों में कमी आएगी।विधेयक में रेंट कंट्रोल ट्रिब्यूनल की कार्यप्रणाली को तेज करने पर विशेष जोर दिया गया है। मामलों की सुनवाई के दौरान होने वाली अनावश्यक देरी को रोकने के लिए स्थगन की सीमा तय कर दी गई है। कोर्ट में अब अधिकतम तीन बार ही तारीख दी जा सकेगी। कोशिश यह होगी कि किरायेदारी से जुड़े सभी विवादों का निपटारा 60 दिनों के भीतर कर दिया जाए। इसके अलावा ट्रिब्यूनल को समन जारी करने जैसी सिविल कोर्ट की शक्तियां भी दी गई हैं।
छत्तीसगढ़ की जेलों में 5 साल में 375 मौतें, 62 मामलों की जांच रिपोर्ट अब भी पेंडिंग
छत्तीसगढ़ की जेलों में कैदियों की मौत का आंकड़ा सामने आने के बाद चिंता बढ़ गई है। पिछले पांच वर्षों में राज्य की अलग-अलग जेलों में कुल 375 बंदियों की जान गई है। इनमें से 311 मामलों में जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन 62 मामलों की जांच रिपोर्ट का अब भी इंतजार है। यह जानकारी गृह मंत्री विजय शर्मा ने विधानसभा में कांग्रेस विधायक उमेश पटेल के एक सवाल के जवाब में दी।सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2021 से 25 जून 2026 के बीच जेलों में 375 कैदियों की मौत हुई। इनमें से 373 मामलों में मजिस्ट्रेट या न्यायिक जांच के आदेश दिए गए थे। आंकड़ों का सालवार ब्यौरा इस प्रकार है:
- 2021: 71 मौतें (सभी मामलों की जांच पूरी)
- 2022: 90 मौतें (सबसे अधिक, 89 मामलों की जांच रिपोर्ट प्राप्त)
- 2023: 57 मौतें (सभी मामलों की जांच पूरी)
- 2024: 67 मौतें (64 की रिपोर्ट मिली, 3 लंबित)
- 2025: 55 मौतें (28 की रिपोर्ट मिली, 27 लंबित)
- 2026 (25 जून तक): 35 मौतें (केवल 3 की जांच रिपोर्ट मिली, 32 लंबित)
इतनी बड़ी संख्या में जांच रिपोर्ट का पेंडिंग रहना सरकार और जेल प्रशासन दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, क्योंकि इन रिपोर्टों से ही मौत के असली कारणों और लापरवाही का पता चल पाता है।
रायपुर में वन विभाग की बड़ी रेड: 80 टन खैर की अवैध लकड़ी बरामद, गोदाम सील
रायपुर के तेंदुआ गांव में वन विभाग ने लकड़ी तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। विभाग की टीम ने एक गोदाम पर छापा मारकर करीब 80 टन प्रतिबंधित खैर की लकड़ी जब्त की है, जिसे हरियाणा भेजने की तैयारी चल रही थी। बरामद की गई लकड़ी की कीमत लगभग 20 से 25 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने मौके से गोदाम के मुंशी इमरान खान को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल अभी फरार है। जांच में पता चला है कि तस्कर आंध्र प्रदेश और ओडिशा से लकड़ी लाकर छत्तीसगढ़ में जमा करते थे। इसके बाद कंप्यूटर ऑपरेटर की मदद से असली जैसा दिखने वाला फर्जी ट्रांजिट परमिट तैयार किया जाता था। चेकपोस्ट पर तैनात कर्मचारी इस फर्जीवाड़े को पकड़ नहीं पाते थे और गाड़ियां आसानी से राज्य की सीमा पार कर जाती थीं।देशभर में नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम लागू है, जिसके तहत क्यूआर कोड वाले डिजिटल पास जारी किए जाते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि चेकपोस्ट पर इस क्यूआर कोड को जांचने के लिए स्कैनर ही मौजूद नहीं हैं। साथ ही कई कर्मचारियों को कंप्यूटर सिस्टम की पूरी जानकारी भी नहीं है। तस्करों ने प्रशासन की इसी कमजोरी का फायदा उठाया। फरार मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल पुराना अपराधी है और उसके खिलाफ पहले भी लकड़ी व वन्यजीव तस्करी के मामले दर्ज हो चुके हैं।
अंबिकापुर बाल सुधार गृह की सुरक्षा में बड़ी चूक: फिर भागे 13 नाबालिग
छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित गांधीनगर बाल सुधार गृह से एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है। 14 जुलाई की रात को 13 नाबालिग बच्चे परिसर का एक पुराना और कमजोर दरवाजा तोड़कर भाग निकले। भागे हुए बच्चों में हत्या, दुष्कर्म और लूट जैसे संगीन मामलों के आरोपी शामिल हैं। पुलिस ने नाकेबंदी कर फिलहाल 2 बच्चों को वापस पकड़ लिया है, लेकिन 11 बच्चे अब भी लापता हैं। इस बाल सुधार गृह में सुरक्षा की यह कोई पहली चूक नहीं है। इससे पहले 24 जून को भी 11 बच्चे खिड़की तोड़कर भाग गए थे, जिन्हें बाद में पुलिस ने पकड़ लिया था। जांच में सामने आया है कि इस बार भी भागने की पूरी योजना उसी नाबालिग ने बनाई थी जो पिछली बार भागा था। उसने इस बार अपने साथ 2 पुराने और 10 नए बच्चों को मिलाया और रात के भोजन के बाद कमरे से बाहर निकलकर जर्जर दरवाजे को निशाना बनाया। हाल ही में बिलासपुर के बाल सुधार गृह में भी चार नाबालिगों ने ड्यूटी पर तैनात गार्ड की हत्या कर दी थी और फरार हो गए थे। इन लगातार हो रही घटनाओं ने प्रदेश के सुधार गृहों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब खिड़कियों और दरवाजों को मजबूत करने के लिए वेल्डिंग का काम करा रहा है।
विधानसभा में बना अनोखा रिकॉर्ड: जर्जर सड़कों के मुद्दे पर एक साथ 8 विधायकों ने पूछे सवाल
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान एक नया इतिहास बन गया। पहली बार ऐसा हुआ जब जनहित के एक ही मुद्दे पर अध्यक्ष ने रिकॉर्ड 8 विधायकों को सवाल पूछने की अनुमति दी। यह मामला सरगुजा संभाग के लुण्ड्रा से भाजपा विधायक प्रबोध मिंज द्वारा अपने क्षेत्र की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की बदहाल सड़कों का मुद्दा उठाने पर शुरू हुआ था। विधायक प्रबोध मिंज ने उपमुख्यमंत्री और ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा से पूछा था कि क्षेत्र की कितनी सड़कें जर्जर हैं और उनका संधारण कब तक होगा। इस पर मंत्री विजय शर्मा ने जवाब दिया कि लुण्ड्रा क्षेत्र में कुल 171 सड़कों में से 31 सड़कें मरम्मत के योग्य पाई गई हैं, जिन्हें बजट की उपलब्धता के आधार पर सुधारा जाएगा। उन्होंने बताया कि ग्रामीण सड़कों की सामान्य उम्र 5 साल होती है और निर्माण के एस्टीमेट में ही मेंटेनेंस का बजट शामिल रहता है।लुण्ड्रा की सड़क का मुद्दा उठते ही सदन के अन्य सदस्य भी अपने-अपने क्षेत्रों की बदहाल सड़कों को लेकर खड़े हो गए। स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने विषय की संवेदनशीलता को देखते हुए विधायक धर्मजीत सिंह, नीलकंठ टेकाम, द्वारिकाधीश यादव, दलेश्वर साहू, कुंवर सिंह निषाद, रायमुनी भगत, सुशांत शुक्ला और धरमलाल कौशिक को सवाल पूछने का मौका दिया। विधानसभा अध्यक्ष ने खुद माना कि यह सदन में एक कीर्तिमान है और सड़कों की स्थिति वाकई चिंताजनक है, जिस पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।
सहायक शिक्षकों की हड़ताल से स्कूलों में लगा ताला, रसोइयों के भरोसे रहे बच्चे
अपनी मांगों को लेकर सहायक शिक्षक फेडरेशन के नेतृत्व में प्रदेशभर के सहायक शिक्षक एक दिवसीय सामूहिक हड़ताल पर रहे। इस प्रदर्शन के कारण छत्तीसगढ़ के प्राथमिक स्कूलों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई। विशेष रूप से मोहला-मानपुर जैसे आदिवासी बहुल जिलों में इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिला, जहां करीब 400 से अधिक प्राथमिक स्कूलों के शिक्षक हड़ताल पर चले गए थे।हड़ताल के कारण कई स्कूलों में सुबह से ही ताला लगा रहा। कुछ जगहों पर मध्याह्न भोजन बनाने वाले रसोइयों ने स्कूल के कमरों को खोला, लेकिन पढ़ाने के लिए शिक्षक न होने के कारण बच्चे केवल खेलते हुए नजर आए। कुछ गांवों में स्थानीय युवतियों या पड़ोसी माध्यमिक शाला के शिक्षकों ने कुछ देर के लिए व्यवस्था संभालने की कोशिश की, लेकिन कुल मिलाकर दिनभर पढ़ाई नहीं हो सकी। जिला शिक्षा अधिकारी के दफ्तर से संपर्क करने पर पता चला कि वे खुद भी छुट्टी पर हैं, जिससे व्यवस्था को संभालने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं था।
बस्तर में नेत्रोत्सव के साथ गोंचा महापर्व शुरू, दिव्य रूप में दिखे भगवान जगन्नाथ
जगदलपुर शहर एक बार फिर बस्तर की ऐतिहासिक और पारंपरिक संस्कृति के रंग में रंग गया है। भगवान जगन्नाथ के नेत्रोत्सव के साथ ही प्रसिद्ध गोंचा महापर्व की औपचारिक शुरुआत हो गई है। अस्वस्थता के दिन के बाद आज भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा ने दिव्य श्रृंगार में भक्तों को दर्शन दिए।जगदलपुर के जगन्नाथ मंदिर में सुबह से ही दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। नेत्रोत्सव को इस पर्व का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है क्योंकि इसके अगले दिन भगवान रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं। बस्तर का यह पर्व सामाजिक समरसता की एक अनोखी मिसाल है। यहां पुरी की तर्ज पर होने वाले इस उत्सव को संपन्न कराने में आरण्यक ब्राह्मण, उत्कल ब्राह्मण और स्थानीय आदिवासी समाज मिलकर काम करते हैं। बस्तर में यह परंपरा सदियों से इसी आपसी भाईचारे के साथ निभाई जा रही है।
कॉल मी प्लेसमेंट एजेंसी के काम और करोड़ों के भुगतान पर विधानसभा में तीखी बहस
छत्तीसगढ़ विधानसभा में स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों में कॉल मी प्लेसमेंट एजेंसी को काम देने और उसे 14 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करने का मामला गरमाया रहा। भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने आरोप लगाया कि नियमों को ताक पर रखकर इस निजी एजेंसी को फायदा पहुंचाया गया है।विधायक धरमलाल कौशिक ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से पूछा कि नियमों के तहत प्लेसमेंट एजेंसी के सभी कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य है, लेकिन विभाग ने पहले केवल 40 कर्मचारियों के ही सत्यापन की बात स्वीकार की थी। उन्होंने सवाल उठाया कि बिना सत्यापन के काम करने वाले कर्मचारियों को 2024 से जून 2026 तक कितना भुगतान किया गया और इसकी अनुमति किस अधिकारी ने दी। विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि मेडिकल कॉलेजों में इस एजेंसी के कुछ कर्मचारियों द्वारा मरीजों के परिजनों के साथ बदसलूकी और चोरी की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। इस पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सदन को आश्वासन दिया कि कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन कराया जा रहा है और अगर नियमों के उल्लंघन का कोई मामला मिलता है, तो संबंधित अधिकारियों और एजेंसी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कैग रिपोर्ट में खुलासा: DMF के 4,536 करोड़ खर्च, फिर भी आधे खनन प्रभावित गांव विकास से दूर
छत्तीसगढ़ विधानसभा में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट ने जिला खनिज न्यास निधि के खर्चों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, खनन से प्रभावित इलाकों के विकास के लिए बनी इस योजना में भारी बजट खर्च होने के बावजूद जरूरतमंदों तक इसका लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।कैग की ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया है कि जिला खनिज न्यासों ने अपनी उपलब्ध राशि में से 4,536.58 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। इसके बावजूद, जिन 11 जिलों के 1,734 प्रभावित गांवों की जांच की गई, उनमें से 754 गांवों में विकास का एक भी काम शुरू नहीं हो सका। यानी करीब 44 फीसदी गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। इसकी मुख्य वजह यह रही कि बिना किसी मास्टर प्लान या वार्षिक कार्ययोजना के ही पैसों को स्वीकृत कर दिया गया।रिपोर्ट में एक और बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। कई जिलों में प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने में 5 से 65 महीने तक की देरी की गई, लेकिन इस पहचान से पहले ही 1,060 करोड़ रुपये के काम स्वीकृत कर दिए गए। इसके अलावा:
डोंंगरगढ़ में लापरवाही की भेंट चढ़ी तीन मासूमों की जान: पानी से भरे गड्ढे में डूबने से मौत
राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विकासखंड के अंतर्गत आने वाले गांधीनगर गांव में बुधवार की शाम एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ। गांव के पास ही बारिश का पानी भरे एक गहरे गड्ढे में डूबने से तीन आदिवासी बच्चों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान सार्थक कोकोटे (8 वर्ष), कृष मंडावी (8 वर्ष) और दानेश मंडावी (6 वर्ष) के रूप में हुई है। इस घटना के बाद पूरे गांव में मातम छा गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि रेलवे के निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदार ने मिट्टी खोदकर एक बड़ा और गहरा गड्ढा वहीं छोड़ दिया था। लगातार हुई बारिश के कारण यह गड्ढा पानी से लबालब भर गया और ऊपर से देखने पर सामान्य तालाब जैसा दिखने लगा। खेलते-खेलते बच्चे इस गड्ढे के पास चले गए और गहराई का अंदाजा न होने के कारण उसमें डूब गए। ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद बच्चों के शवों को बाहर निकाला। इस घटना के बाद प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर इतना गहरा गड्ढा बिना किसी बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड के खुला क्यों छोड़ दिया गया। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और आश्वासन दिया है कि लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार या जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।



