CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें भिलाई नगर निगम चुनाव में ओबीसी आरक्षण बढ़ा, दुर्ग जिला अस्पताल की लैब में रील बनाने पर प्रभारी को नोटिस, भिलाई स्टील प्लांट से 10 हजार करोड़ की लोहा चोरी का मामला, बिलासपुर में इंस्टाग्राम कमेंट पर पथराव के बाद धारा 144 लागू, रायपुर कृषि विश्वविद्यालय में दुर्ग के कॉलेज से तीसरा पेपर लीक, ओडिशा से हिमाचल तक खैर की अवैध लकड़ी तस्करी का सिंडिकेट, छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में सेटअप की ऑनलाइन एंट्री के लिए 1 सितंबर की डेडलाइन, FSSAI का पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर लाल रंग का चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव, प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों के जनसमर्पण पर 17 सितंबर से भाजपा के विशेष कार्यक्रम, और सुकमा के पोटाकेबिन में 47 छात्राओं के बीमार होने की बड़ी घटनाएं समेत पढ़ें छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें…

CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की सभी बड़ी और छोटी खबरें रोजाना हमारी नजर में रहती हैं। दक्षिण कोसल के विशेष सेगमेंट ‘CG की 10 बड़ी खबरें’ में हम आपको समाचार जगत की हर गतिविधि का अपडेट सरल और सहज भाषा में प्रदान करेंगे। तो आइए, पत्रकारिता की इस दुनिया में बने रहें और छत्तीसगढ़ की हर ताजातरीन खबर से अपनी जानकारी को और विस्तृत करे

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भिलाई नगर निगम चुनाव: ओबीसी आरक्षण बढ़ने से बदला सियासी समीकरण और वार्डों की नई जंग

Politics: भिलाई नगर निगम चुनाव से ठीक पहले वार्ड आरक्षण की नई प्रक्रिया ने शहर के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की हालिया सर्वे रिपोर्ट के अनुसार भिलाई निगम क्षेत्र में ओबीसी आबादी 32 प्रतिशत पाई गई है, जिसके आधार पर आरक्षित सीटों की संख्या 18 से बढ़ाकर 23 करने की तैयारी है। महापौर का पद पहले ही ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित किया जा चुका है, और अब वार्डों में भी इस वर्ग का दबदबा बढ़ने से कई पुराने पार्षदों के समीकरण बिगड़ गए हैं। इस बदलाव के तहत जुनवानी वार्ड-1 सामान्य से एससी श्रेणी में जा सकता है, जबकि नेहरू नगर वार्ड-4 से एससी श्रेणी हटने की चर्चा है। इसके अलावा कोसा नगर वार्ड-5, प्रियदर्शिनी परिसर के वार्ड-6 व 10, और राजीव नगर वार्ड-9 जैसे महत्वपूर्ण वार्डों में भी फेरबदल तय माना जा रहा है, जिससे पूरे 70 वार्ड प्रभावित होंगे। वार्ड आरक्षण के इस नए फॉर्मूले के खिलाफ अब तीखा विरोध भी शुरू हो गया है। जिला प्रशासन द्वारा 15 सितंबर से पहले चुनाव की तारीख तय करने और अंतिम तस्वीर साफ किए जाने की संभावना के बीच, 25 से अधिक पार्षदों ने अपनी लिखित आपत्ति दर्ज कराते हुए कलेक्टर और निगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपा है। इन पार्षदों का मुख्य तर्क यह है कि देश में वर्ष 2011 के बाद से नई जनगणना नहीं हुई है और भिलाई में नया परिसीमन भी नहीं कराया गया है, ऐसे में पुराने और अपर्याप्त आंकड़ों के आधार पर एससी और एसटी की सीटें बदलना पूरी तरह नियमों के खिलाफ है। जानकारों और राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि इस स्थिति में राष्ट्रीय दलों के सामने सही उम्मीदवारों का चयन करना और महापौर प्रत्याशी के साथ वार्ड पार्षदों का बेहतर तालमेल बिठाना एक बड़ी चुनौती साबित होगा, जिसका असर आगामी स्थानीय चुनावों के परिणामों पर साफ दिखाई देगा।

ब्लड सैंपल के बीच रील बनाने पर दुर्ग जिला अस्पताल की लैब प्रभारी को थमाया गया नोटिस

Crime Update: दुर्ग जिला अस्पताल की अटल आरोग्य लैब के अंदर महिला टेक्नीशियंस द्वारा बनाई गई एक इंस्टाग्राम रील ने स्वास्थ्य विभाग में भारी विवाद खड़ा कर दिया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि लैब के भीतर जहां मरीजों के गंभीर ब्लड सैंपल रखे हुए हैं और चिकित्सीय जांच से जुड़ी तमाम संवेदनशील गतिविधियां संचालित हो रही हैं, वहीं कर्मचारी बेपरवाह होकर वीडियो शूट कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने इस पर बेहद कड़ी संज्ञान लिया है, जिसके तहत सिविल सर्जन डॉ. आशीषन मिंज ने तुरंत जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन ने अटल आरोग्य लैब के प्रभारी जेपी मेश्राम को आधिकारिक तौर पर कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। प्रशासन अब इस बात की बारीकी से जांच कर रहा है कि यह वीडियो आखिर किस परिस्थिति में और कब रिकॉर्ड किया गया था, तथा क्या इस प्रकार की लापरवाह हरकतों से मरीजों की दैनिक जांच के काम पर कोई प्रतिकूल असर पड़ा या नहीं। उल्लेखनीय है कि इसी लैब से कुछ दिन पहले एक 24 वर्षीय मरीज की एचआईवी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने और दोबारा जांच में निगेटिव निकलने का गंभीर विवाद भी जुड़ा हुआ था, जिसके चलते मशीनों के कैलिब्रेशन और व्यवस्थाओं पर सवाल उठे थे, और अब इस नए रील कांड ने जिला अस्पताल की आंतरिक कार्यप्रणाली पर फिर से बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

भिलाई स्टील प्लांट से 10 हजार करोड़ के लोहा चोरी का सनसनीखेज मामला, बीजेपी विधायक ने लगाए गंभीर आरोप

Politics: भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) से लंबे समय से हो रहे कथित लोहा चोरी के मामले को लेकर राजनीति गरमा गई है, जिसमें बीजेपी विधायक रिकेश सेन ने बेहद चौंकाने वाले और गंभीर आरोप सामने रखे हैं। विधायक का दावा है कि प्लांट से पिछले 40 वर्षों में लगभग 10,000 करोड़ रुपये का लोहा चोरी किया जा चुका है और इस अवैध कारोबार के पीछे एक बहुत बड़ा संगठित नेटवर्क सक्रिय है। उन्होंने सोशल मीडिया और पुलिस महानिदेशक (DGP) को सौंपे गए आधिकारिक पत्र के जरिए सनसनीखेज बयान दिया है कि इस अवैध कमाई का बड़ा हिस्सा 4 आईपीएस अधिकारियों, 3 आईएएस अधिकारियों और 12 रसूखदार नेताओं के बीच आपस में बांटा जाता है। विधायक रिकेश सेन ने अपनी शिकायत में पुलिस को स्पष्ट रास्ता सुझाते हुए कहा है कि जिन 100 से अधिक गाड़ियों से यह लोहा चोरी किया जाता था, उन्हें रातों-रात काटकर गायब कर दिया गया है, जिनके मालिक और ट्रांसपोर्टर का सुराग आरटीओ रिकॉर्ड से आसानी से मिल सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भिलाई संयंत्र के जिन अधिकारियों की नाक के नीचे ट्रांसपोर्ट यूनियन द्वारा लाखों रुपए वसूले जाते थे और सीआईएसएफ द्वारा रोक नहीं लगाई जाती थी, उन पर भी एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। इसके अलावा, विधायक ने यह भी चिंता जताई है कि लोहा चोरी से मिलने वाले काले धन का इस्तेमाल जेल में बंद अपराधियों को पालने और सरकार के खिलाफ साजिश रचने तथा माहौल खराब करने के लिए किया जा रहा है, जिस पर डीजीपी को बिना किसी दबाव के निष्पक्ष और कड़ी कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।

बिलासपुर में सोशल मीडिया कमेंट को लेकर भड़की हिंसा, पथराव के बाद शहर में धारा 144 लागू

Weather Alert: बिलासपुर शहर में शुक्रवार की देर रात इंस्टाग्राम पर किए गए एक मामूली कमेंट को लेकर उपजा विवाद अचानक हिंसक झड़प और बड़े पैमाने पर पथराव में बदल गया, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई। दो अलग-अलग गुटों के बीच शुरू हुई कहासुनी कुछ ही देर में खूनी संघर्ष में तब्दील हो गई, जिसमें उपद्रवियों ने कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए पुलिस की गाड़ियों पर भी जमकर पथराव किया। इस अचानक हुए हमले में तारबाहर थाना प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। बिगड़ते हालात और उग्र भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को भारी बल प्रयोग करना पड़ा और स्थिति को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इस गंभीर घटना के तुरंत बाद एक्शन लेते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने सिटी कोतवाली क्षेत्र में तत्काल प्रभाव से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) के तहत धारा 144 लागू कर दी है, जिसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर चार या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, किसी भी प्रकार की सभा, रैली या प्रदर्शन करने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और शहर की शांति भंग करने वाले उपद्रवियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा, और साइबर सेल लगातार सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट करने वालों की ऑनलाइन निगरानी कर रही है।

रायपुर पेपर लीक मामला: दुर्ग के भारती कॉलेज से जुड़ा तीसरा पर्चा लीक, प्रोफेसर पर तीसरी एफआईआर दर्ज

Education News: इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर से संबद्ध शैक्षणिक संस्थानों में परीक्षाओं के पर्चे लगातार लीक होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे पूरे छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक जगत में हड़कंप मच गया है। ताजा मामला प्रथम वर्ष की द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें 19 अगस्त को आयोजित होने वाले ‘आनुवंशिकी के मूल सिद्धांत’ (APB-5121) विषय का प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से पहले ही व्हाट्सएप ग्रुप्स पर धड़ल्ले से वायरल हो गया। विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रारंभिक और आंतरिक जांच में यह बात सामने आई कि यह तीसरा महत्वपूर्ण पर्चा भी दुर्ग स्थित भारती कृषि महाविद्यालय से ही लीक किया गया था। तेलीबांधा पुलिस ने विश्वविद्यालय की औपचारिक शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर योगेश सोनकेशरिया को पहले ही 22 अगस्त को दुर्ग से 5 अन्य सहयोगियों के साथ गिरफ्तार किया था, जिसे पुलिस रिमांड पर लेकर लगातार पूछताछ की जा रही है। शुरुआती पूछताछ में आरोपी प्रोफेसर ने केवल दो पेपर लीक करने की बात स्वीकार की थी, लेकिन तीसरे पेपर के लीक होने के पुख्ता सबूत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ तेलीबांधा थाने में तीसरी गंभीर एफआईआर दर्ज कर ली है। इससे पहले कीट-शास्त्र विषय का पर्चा भी इसी प्रकार लीक हुआ था, और अब पुलिस इस पूरे संगठित नकल व पेपर लीक माफिया के नेटवर्क की तह तक जाने के लिए आरोपियों के मोबाइल डाटा और वित्तीय लेन-देन की गहराई से पड़ताल कर रही है।

ओडिशा से हिमाचल तक फैला खैर की अवैध लकड़ी तस्करी का विशाल सिंडिकेट, छत्तीसगढ़ बना मुख्य ट्रांजिट पॉइंट

Crime Update: छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और ओडिशा के घने जंगलों से खैर की अवैध कटाई और तस्करी का एक ऐसा अंतरराज्यीय नेटवर्क उजागर हुआ है, जिसकी जड़ें देश के लगभग 10 राज्यों तक फैली हुई हैं। वन विभाग की विस्तृत जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ओडिशा के संबलपुर, बलांगीर और पटनागढ़ जैसे दूरदराज के जंगलों से अवैध रूप से काटी गई खैर की लकड़ी को सबसे पहले छत्तीसगढ़ के महासमुंद, सरायपाली, पिथौरा, रायपुर और रायगढ़ के रास्ते ट्रांजिट पॉइंट तक लाया जाता है। यहां लकड़ी को गोदामों में उतारकर उसकी छंटाई की जाती है और फिर फर्जी दस्तावेजों व नकली नंबर प्लेट वाले बड़े ट्रकों में लादकर मध्य प्रदेश के रास्ते उत्तर भारत की विभिन्न फैक्ट्रियों तक पहुंचाया जाता है। खैर की लकड़ी का मुख्य उपयोग कत्था बनाने के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवाओं और चमड़े की रंगाई में किया जाता है, जिसकी बाजार में ऊंची कीमत (करीब 8 से 9 हजार रुपए प्रति क्विंटल) होने के कारण यह धंधा अपराधियों के लिए सबसे बड़ा मुनाफा कमाने का जरिया बन गया है। तस्कर इस अवैध परिवहन को सुरक्षित रखने के लिए नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम (NTPS) जैसे दिखने वाले फर्जी डिजिटल परमिट और जाली क्यूआर कोड का इस्तेमाल करते थे, जबकि ट्रकों के आगे-पीछे एस्कॉर्ट गाड़ियां चलाकर पुलिस व वन विभाग की गतिविधियों की पूरी रेकी की जाती थी। इस पूरे गिरोह के कथित मास्टरमाइंड मनीष अग्रवाल की तलाश में वन विभाग और जांच एजेंसियां जुटी हुई हैं, जो नेपाल सीमा के आसपास छिपे होने की आशंका है, और अब एजेंसियों का मुख्य फोकस इस विशाल सप्लाई चेन की अंतिम कड़ियों को तोड़ने पर है।

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में सेटअप की ऑनलाइन एंट्री और सत्यापन के लिए 1 सितंबर की डेडलाइन तय

Education News: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों के प्रशासनिक सेटअप और मानव संसाधन प्रबंधन को पारदर्शी बनाने के लिए लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) पर अपना शिकंजा कस दिया है। विभाग ने सभी शासकीय शालाओं के प्रचलित सेटअप की ऑनलाइन प्रविष्टि और उसका सटीक भौतिक सत्यापन हर हाल में आगामी 01 सितंबर 2026 तक पूरा करने का अंतिम और कड़ा निर्देश जारी किया है। 27 अगस्त को जारी इस अंतिम स्मरण पत्र में स्पष्ट कर दिया गया है कि कई जिलों में अब तक यह महत्वपूर्ण कार्य अधूरा है, जिसे किसी भी स्तर पर और अधिक बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभागीय निर्देशों के अनुसार, स्कूलों के स्वीकृत पदों, रिक्तियों और अन्य कार्य विवरण से जुड़ी तमाम जानकारियों को आधिकारिक पोर्टल पर दर्ज करने की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (DDO) की होगी, जिसकी अंतिम और पुख्ता जांच की जिम्मेदारी संबंधित जिले के DEO की तय की गई है। विभाग ने विशेष रूप से चेताया है कि सेटअप के साथ-साथ शिक्षकों के स्थानांतरण और अन्य सेवा विवरणों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या तय सीमा के भीतर पोर्टल पर अधूरा डेटा मिलने की स्थिति में सीधे तौर पर जिला शिक्षा अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

FSSAI का बड़ा कदम: पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर लगेगा लाल रंग का षटकोणीय चेतावनी लेबल

Government: भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देश के उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री के खिलाफ एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाने का प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट में पेश किया है। FSSAI ने सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल अपने हलफनामे में यह प्रस्ताव रखा है कि अब बाजार में बिकने वाले सभी पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के ठीक सामने लाल रंग का एक स्पष्ट षटकोणीय (Hexagonal) चेतावनी लेबल लगाया जाएगा। इस विशेष लेबल के माध्यम से आम जनता और विशेष रूप से बच्चों को यह साफ-साफ पढ़ने को मिल जाएगा कि उस उत्पाद में अतिरिक्त चीनी, सोडियम (नमक) या सैचुरेटेड फैट की मात्रा तय सीमा से अत्यधिक अधिक है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा पैकेज्ड फूड में इन हानिकारक तत्वों की मात्रा स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने वाले इंटरप्रिटेटिव फ्रंट-ऑफ-पैक लेबल को अब तक लागू न किए जाने को लेकर मांगे गए जवाब के बाद यह प्रस्ताव सामने आया है। इस योजना के पहले चरण में उन खाद्य उत्पादों को शामिल किया जाएगा जिनमें दो या अधिक पोषक तत्व खतरनाक रूप से अधिक मात्रा में पाए जाते हैं, जबकि दूसरे चरण में अन्य उत्पादों को भी इसके दायरे में लाया जाएगा। इन पैमानों को तय करने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पोषण संस्थान (ICMR-NIN) के वैज्ञानिक दिशा-निर्देशों को आधार बनाया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के नौनिहालों और आम नागरिकों को जंक फूड के दुष्प्रभावों से बचाना है।

प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों के जनसमर्पण पर भाजपा का विशेष अभियान, 17 सितंबर से होगा आयोजनों का आगाज

Politics: देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और राष्ट्र सेवा के यशस्वी 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी द्वारा आगामी 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक पूरे देश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में भी व्यापक स्तर पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसी कड़ी में राजधानी रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों की एक उच्चस्तरीय महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई, जिसमें भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में प्रदेश के प्रमुख मंत्री और वरिष्ठ नेता शामिल हुए, जहां संगठन के प्रति प्रधानमंत्री मोदी की अद्वितीय कार्यशैली और अटूट समर्पण पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश ने कहा कि अनुच्छेद 370 की समाप्ति, भव्य राम मंदिर का निर्माण और सेना को ऑपरेशन के दौरान पूरी छूट देना जैसे ऐतिहासिक और कड़े निर्णय केवल प्रधानमंत्री मोदी के दृढ़ इच्छाशक्ति से ही संभव हो सके हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के अनुशासन का उदाहरण देते हुए बताया कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की साढ़े चार घंटे चली लंबी बैठक के दौरान मोदी ने एक बार भी अपना मोबाइल फोन नहीं छुआ और सभागार में मौजूद सभी 59 वक्ताओं की बात बेहद तन्मयता से सुनी। भाजपा इस महीनेभर चलने वाले विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से केंद्र सरकार की जनहितकारी योजनाओं और प्रधानमंत्री के विजन को जन-जन तक पहुंचाने की बड़ी रणनीति पर काम कर रही है।

सुकमा के पोटाकेबिन में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की खुली पोल, 47 छात्राएं अचानक बीमार, एक की हालत गंभीर

Weather Alert: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले से शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है, जहां के पोटाकेबिन पोलमपल्ली में रहने वाली 47 छात्राएं अचानक गंभीर रूप से बीमार हो गईं। पिछले दो दिनों के भीतर बड़ी संख्या में छात्राओं को एक साथ तेज बुखार, उल्टी और दस्त की गंभीर शिकायत होने के बाद संस्थान में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में सभी पीड़ित छात्राओं को उपचार के लिए दोरनापाल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां से स्थिति की नजाकत को देखते हुए एक गंभीर छात्रा को बेहतर और उन्नत इलाज के लिए सुकमा जिला अस्पताल रेफर किया गया है। इस घटना के बाद, जहां कुछ प्राथमिक उपचार के बाद स्वस्थ होकर वापस लौट चुकी हैं, वहीं 23 छात्राओं का अभी भी दोरनापाल के स्वास्थ्य केंद्र में लगातार इलाज जारी है। उल्लेखनीय है कि इस पोटाकेबिन संस्थान में कुल 350 से अधिक छात्राएं रहकर अपनी शिक्षा ग्रहण करती हैं, और इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का अचानक फूड पॉइजनिंग या किसी अन्य संक्रमण की चपेट में आना सीधे तौर पर वहां की भोजन, पेयजल और साफ-सफाई की लचर व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की विशेषज्ञ टीमें स्थिति पर लगातार कड़ी नजर बनाए हुए हैं और बीमारी के असली कारणों का पता लगाने में जुटी हुई हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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