
CG Congress Politics: छत्तीसगढ़ कांग्रेस के भीतर हाल ही में बदले राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। भिलाई विधायक देवेंद्र यादव के साथ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के एक साथ नजर आने के बाद प्रदेश की राजनीति में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इन दिग्गज नेताओं की एक साथ मौजूदगी को कांग्रेस के अंदरूनी शक्ति संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है। इस नए घटनाक्रम के बाद विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी को भी हमला बोलने का मौका मिल गया है।

अजय चंद्राकर का कांग्रेस पर तंज, बोले भूपेश के खिलाफ जोर लगा रहे नेता
कांग्रेस नेताओं की इस एकजुटता पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने कड़ा प्रहार किया है। अजय चंद्राकर ने मीडिया से चर्चा करते हुए तंज कसा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ जोर लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के भीतर जारी कलह और खींचतान अब खुलकर सड़कों और मंचों पर दिखाई देने लगी है। वरिष्ठ नेताओं का इस तरह एकजुट होना पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी का ही नतीजा है।
कांग्रेस की अंदरूनी कलह सतह पर आई, प्रदेश हित से ध्यान भटका
अजय चंद्राकर ने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी के भीतर जारी विवाद अब कोई छिपी हुई बात नहीं रह गई है। उनके अनुसार कांग्रेस नेताओं को राज्य के ज्वलंत मुद्दों और प्रदेश की जनता के हितों के बारे में सोचने की फुर्सत नहीं है, क्योंकि वे लगातार आपसी खींचतान में उलझे हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में चल रही गुटबाजी का सीधा असर उनकी राजनीतिक गतिविधियों पर पड़ रहा है और उनका पूरा ध्यान केवल अपनी अंदरूनी स्थिति को मजबूत करने पर टिका है।
भूपेश बघेल के राष्ट्रीय प्रभारों और कार्यशैली पर उठाए सवाल
भूपेश बघेल के राष्ट्रीय राजनीति में प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए भाजपा विधायक ने कहा कि भूपेश बघेल को जब भी केंद्रीय नेतृत्व ने किसी राज्य की जिम्मेदारी सौंपी, वहां कांग्रेस को असफलता ही हाथ लगी। पंजाब चुनाव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के दौर में भी पार्टी में इतनी कलह नहीं थी, जितनी भूपेश बघेल के वहां जाने के बाद बढ़ गई। चंद्राकर ने दावा किया कि बघेल किसी भी राज्य में अपनी राजनीतिक उपयोगिता साबित करने में असफल रहे हैं।
पड़ोसी राज्यों में कांग्रेस की राजनीतिक साख पर टिप्पणी
अजय चंद्राकर ने झारखंड राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि वहां कांग्रेस पार्टी महज झारखंड मुक्ति मोर्चा की सहयोगी भूमिका तक सीमित रह गई है। उन्होंने कहा कि जो नेता अपने-अपने प्रभार वाले राज्यों में कांग्रेस को मजबूत नहीं कर पा रहे हैं, वे दूसरों को सीख दे रहे हैं। सरगुजा क्षेत्र के संदर्भ में बात करते हुए चंद्राकर ने कहा कि वहां की राजनीति संभालने के लिए टीएस सिंहदेव खुद सक्षम हैं और उन्हें किसी बाहरी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
टीएस सिंहदेव के पुराने इस्तीफे का जिक्र कर सरकार को घेरा
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए भाजपा नेता ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि टीएस सिंहदेव ने तत्कालीन सरकार के समय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था और अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया कि भाजपा में ऐसा कभी नहीं होता कि कोई मंत्री अपनी ही सरकार की असफलता स्वीकार कर इस्तीफा दे दे। कांग्रेस में यह खींचतान चरम पर पहुंच चुकी है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और वैचारिक मुद्दों पर विपक्षी रुख की आलोचना
देश की सुरक्षा और राष्ट्रविरोधी तत्वों के मुद्दे पर बोलते हुए अजय चंद्राकर ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू-कश्मीर और नक्सलवाद से जुड़े मामलों में केंद्र सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशविरोधी ताकतों से सीधी लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन कांग्रेस नेता इन गंभीर विषयों को समझने के बजाय केवल राजनीतिक विरोध करने में व्यस्त हैं। उन्होंने राष्ट्रविरोधी तत्वों के प्रति किसी भी तरह के नरमी के रुख को अस्वीकार्य बताया।
कांग्रेस की आंतरिक कलह पर टिकी प्रदेश की भावी राजनीति
फिलहाल नेताओं की इस मुलाकात और बीजेपी के हमलों के बाद प्रदेश कांग्रेस के भीतर हलचल तेज हो गई है। एक ओर जहां कांग्रेस नेता इसे सामान्य शिष्टाचार और पार्टी कार्यकर्ताओं की एकजुटता बता रहे हैं, वहीं भाजपा इस पूरे घटनाक्रम को बघेल विरोधी गुट की लामबंदी के रूप में भुनाने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन नए राजनीतिक समीकरणों का असर पार्टी के संगठन पर किस तरह पड़ता है।



