CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें 5 सरकारी मेडिकल कॉलेजों पर एनएमसी का ब्रेक और आबकारी उप निरीक्षक सस्पेंड होने से लेकर हाई कोर्ट के मुआवजे पर अहम फैसले, मजदूरों के हक में कलेक्टर की फटकार, स्कूलों में नए एआई-ड्रोन कोर्स, मिडिल क्लास महिलाओं में बढ़ती अपराध प्रवृत्ति, सुशासन तिहार के आवेदनों का दबाव, 16 जून से कॉलेज एडमिशन, बिजली बिल और स्मार्ट मीटर का विवाद तथा खराब मौसम के कारण मंत्रियों की फ्लाइट डायवर्ट होने तक की सभी मुख्य सुर्खियां समेत पढ़ें छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें…

CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की सभी बड़ी और छोटी खबरें रोजाना हमारी नजर में रहती हैं। दक्षिण कोसल के विशेष सेगमेंट ‘CG की 10 बड़ी खबरें’ में हम आपको समाचार जगत की हर गतिविधि का अपडेट सरल और सहज भाषा में प्रदान करेंगे। तो आइए, पत्रकारिता की इस दुनिया में बने रहें और छत्तीसगढ़ की हर ताजातरीन खबर से अपनी जानकारी को और विस्तृत करे
छत्तीसगढ़ में नहीं खुलेंगे 5 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज, एनएमसी ने सैटेलाइट तस्वीरों से पकड़ी लापरवाही
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मेडिकल की पढ़ाई करने का सपना देख रहे छात्रों के लिए बड़ा झटका लगा है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने इस सत्र में राज्य में खुलने वाले 5 नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों की अनुमति देने से साफ मना कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारियों की लापरवाही की वजह से मनेंद्रगढ़, कवर्धा, गीदम (दंतेवाड़ा), जांजगीर और कुनकुरी में इस साल कॉलेज शुरू नहीं हो पाएंगे। सूत्रों के मुताबिक विभाग के अफसरों को इन जगहों पर एनएमसी के नियमों के तहत कॉलेज की तैयारी पूरी करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद अधिकारियों ने काम में तेजी नहीं दिखाई। हैरत की बात यह है कि स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले मनेंद्रगढ़ तक में न तो अस्पताल की ठीक व्यवस्था थी और न ही कॉलेज की बिल्डिंग तैयार हुई थी। इसके बाद भी अधिकारियों ने कागजों पर ही फाइल आगे बढ़ा दी।
दिल्ली में बैठकर खुली पोल, अधूरे निर्माण पर एनएमसी ने काटा पत्ता
एनएमसी के कड़े नियमों के अनुसार मेडिकल कॉलेज शुरू करने के लिए खुद की चालू बिल्डिंग और पूरी तरह सक्रिय अस्पताल होना जरूरी है। अफसरों को लगा कि केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार होने के कारण बिना काम पूरा हुए भी मंजूरी मिल जाएगी। इसी भरोसे पर प्रस्ताव दिल्ली भेज दिया गया। अनुमति देने से पहले एनएमसी के अधिकारियों ने दिल्ली में बैठकर ही सैटेलाइट इमेजिंग के जरिए इन जगहों की जमीन और निर्माण की जांच की। ऊपर से ली गई तस्वीरों में जब सिर्फ खाली मैदान और अधूरे ढांचे दिखे, तो कमीशन ने प्रस्ताव को तुरंत खारिज कर दिया। चौंकाने वाली बात यह भी है कि 5 में से 2 जगहों पर जिला अस्पताल तक नहीं था। वहां सिर्फ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) को बड़ा अस्पताल बताकर अनुमति मांगी गई थी। इस मामले में करीब 500 करोड़ रुपये के ओवररेटेड टेंडर जारी करने की कोशिश भी सामने आई थी। गड़बड़ी पकड़े जाने पर उस निविदा को रद्द करके दोबारा नए सिरे से टेंडर बुलाना पड़ा। इस पूरी लेटलतीफी और लापरवाही के कारण अब छत्तीसगढ़ के उन सैकड़ों छात्र-छात्राओं को नुकसान उठाना पड़ेगा जो इस साल डॉक्टर बनने की तैयारी कर रहे थे। विपक्षी दलों ने इस नाकामी पर स्वास्थ्य मंत्री से इस्तीफे की मांग की है।
आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई, ओवर रेट पर शराब बेचने वाले 4 सब-इंस्पेक्टर सस्पेंड
रायपुर। छत्तीसगढ़ में शराब को तय कीमत से अधिक दाम (ओवर रेटिंग) पर बेचने के मामले में आबकारी विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने इस लापरवाही और अनियमितता के आरोप में चार आबकारी उप निरीक्षकों (सब-इंस्पेक्टर) को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। इसके साथ ही आठ अन्य कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। निलंबित किए गए अधिकारियों में आबकारी उप निरीक्षक कौशल किशोर सोनी, प्रभाकर सिरमौर, पुरुषोत्तम सिन्हा और मनराखन नेताम शामिल हैं। विभाग ने इन सभी को अपनी सफाई देने के लिए एक हफ्ते का समय दिया है। जवाब संतोषजनक नहीं होने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, पट्टाधारी किसान को भी मिलेगा भू-स्वामी जितना मुआवजा
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण के एक मामले में जमीन के पट्टाधारियों के हक में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि वैध रूप से जमीन पर काबिज पट्टाधारी भी मुआवजे का उतना ही हकदार है जितना कि उस जमीन का मूल मालिक होता है। हाई कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे कानून के तहत अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर प्रभावित किसान को उचित मुआवजा दें। यह पूरा मामला मुंगेली जिले के जरहागांव के रहने वाले किसान अजीत कश्यप का है। उन्हें सरकारी योजना के तहत जमीन का पट्टा मिला था और राजस्व रिकॉर्ड में भी उनका नाम दर्ज है। राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण और निर्माण के लिए विभाग ने उन्हें जमीन खाली करने का नोटिस थमा दिया था। किसान ने इस कार्रवाई के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दलील दी कि वे वैध कब्जाधारी हैं, इसलिए उन्हें भी भू-स्वामी के समान मुआवजा मिलना चाहिए। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि सिर्फ पट्टाधारी होने के आधार पर किसी को मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने साफ किया कि पट्टाधारी के अधिकारों की भी रक्षा होनी चाहिए।
मजदूरी मांगना भीख नहीं, लापरवाही पर कलेक्टर ने मंच से ही वन विभाग के अफसर को डांटा
गौरेला पेंड्रा मरवाही। सरकार के सुशासन तिहार के तहत मरवाही में आयोजित जन समस्या निवारण शिविर में उस समय हड़कंप मच गया जब कलेक्टर संतोष देवांगन ने लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया। वन विभाग में काम करने वाले मजदूरों का पिछले दो महीने का भुगतान रुका हुआ था। शिविर में जब इस बात की शिकायत आई और विभाग के उपमंडलाधिकारी (SDO) अविनाश इमानुअल इस पर कोई साफ जवाब नहीं दे पाए, तो कलेक्टर ने मंच से ही उन्हें कड़ी फटकार लगाई। कलेक्टर ने कहा कि गरीब मजदूर अपनी मेहनत की कमाई मांग रहा है, कोई भीख नहीं। शिविर में एक ग्रामीण ने बताया था कि मजदूरों के कुल 6 लाख रुपये के वाउचर अटके हुए हैं, जिसमें से एक अकेले मजदूर के ही 70 हजार रुपये बाकी हैं। कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब तहसीलदार पशु हानि का भुगतान 3 दिन में कर देते हैं, तो मजदूरों के पैसे के लिए दो महीने क्यों चक्कर कटवाए जाते हैं। उन्होंने मरवाही वनमंडल के डीएफओ के शिविर से गायब रहने पर भी तंज कसा। कलेक्टर की सख्ती के बाद एसडीओ ने जनता के सामने बात रखी कि 30 जून से पहले सारा भुगतान कर दिया जाएगा। कलेक्टर ने विभाग को एक हफ्ते के भीतर पूरी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। जब कलेक्टर ने मंच से मजदूरों के हक में अफसरों की जवाबदेही तय की, तो वहां मौजूद सैकड़ों ग्रामीणों और महिलाओं ने तालियां बजाकर इस फैसले की सराहना की।
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शुरू होंगे 5 नए कोर्स, एआई और ड्रोन टेक्नोलॉजी पढ़ेंगे छात्र
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूली शिक्षा को आधुनिक और रोजगार से जोड़ने के लिए बड़ा फैसला लिया है। आने वाले सत्र से राज्य के सरकारी स्कूलों में कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए 5 नए प्रोफेशनल कोर्स शुरू किए जाएंगे। इन नए विषयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन टेक्नोलॉजी, सोलर टेक्नोलॉजी, ई-व्हीकल रिपेयरिंग और डेटा ऑटोमेशन शामिल हैं। सरकारी योजना के मुताबिक इन कोर्स का मुख्य उद्देश्य छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान देकर आत्मनिर्भर बनाना है। ड्रोन टेक्नोलॉजी के तहत छात्रों को ड्रोन उड़ाने और उसकी मैपिंग की जानकारी मिलेगी। एआई कोर्स में रोबोटिक्स और डेटा एनालिसिस सिखाया जाएगा। सोलर टेक्नोलॉजी में सोलर पैनल सुधारना और ई-व्हीकल कोर्स में इलेक्ट्रिक वाहनों की मरम्मत सिखाई जाएगी। अभी राज्य के 1250 स्कूलों में 15 अलग-अलग ट्रेड के प्रोफेशनल कोर्स चल रहे हैं। नए कोर्स शुरू होने के बाद यह संख्या बढ़कर 20 ट्रेड और 1450 स्कूलों तक पहुंच जाएगी। इस योजना का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के बच्चों को मिलेगा। उन्हें आधुनिक तकनीक सीखने के लिए बड़े शहरों या महंगे निजी संस्थानों में नहीं जाना पड़ेगा।छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक कोर्स की शुरुआत साल 2014-15 में हुई थी। तब केवल 10 ट्रेड से शुरुआत हुई थी, जिसमें अब लगातार बढ़ोतरी की जा रही है।
दिखावे की चाहत और सोशल मीडिया का दबाव, मिडिल क्लास महिलाओं में बढ़ रही अपराध की प्रवृत्ति
रायपुर। समाज में लंबे समय तक अपराध को सिर्फ पुरुषों से जोड़कर देखा जाता रहा है, लेकिन अब इसमें बदलाव आ रहा है। छत्तीसगढ़ पुलिस की महिला डीएसपी डॉ. रोशनी वासनिक के एक नए शोध में सामने आया है कि अब मध्यम वर्ग (मिडिल क्लास) की महिलाएं भी तेजी से अपराध की दुनिया की तरफ बढ़ रही हैं। दिखावे की जिंदगी, सोशल मीडिया पर बेहतर दिखने का दबाव और कम समय में अमीर बनने की चाहत इसकी मुख्य वजह बन रही है। इस शोध के लिए रायपुर जिले की करीब 800 महिलाओं से आमने-सामने बातचीत और इंटरव्यू किए गए। रिपोर्ट के मुताबिक चोरी, साइबर ठगी, ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे मामलों में महिलाओं की संलिप्तता पहले से ज्यादा पाई गई है। कई मामलों में महिलाएं पहले खुद किसी धोखे का शिकार होती हैं और बाद में हालात के दबाव में खुद अपराध करने लगती हैं। अध्ययन में यह भी पाया गया कि घरेलू तनाव, आर्थिक तंगी और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां भी महिलाओं को गलत रास्ते पर ले जा रही हैं। डॉ. रोशनी वासनिक का कहना है कि इस समस्या को सिर्फ कड़े कानून से नहीं सुधारा जा सकता। इसके लिए महिलाओं को अच्छी शिक्षा, रोजगार के सही अवसर और मानसिक परामर्श देना जरूरी है।
सुशासन तिहार में मिले 6.43 लाख आवेदन, अब अफसरों को हर दिन निपटाने होंगे 20 हजार केस
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार का 40 दिनों का सुशासन तिहार अभियान पूरा हो चुका है। इस अभियान के तहत पूरे राज्य से सरकार को 6.43 लाख से ज्यादा आवेदन मिले हैं। इनमें से सबसे ज्यादा 6.17 लाख आवेदन जनता की विकास संबंधी मांगों और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े हैं, जबकि करीब 26 हजार आवेदन शिकायत श्रेणी के हैं। अब इन सभी का निपटारा करने के लिए प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है। सरकार ने इन सभी आवेदनों को पूरा करने के लिए 30 दिनों का समय तय किया है। इसका सीधा मतलब है कि अब पूरे प्रशासनिक अमले को हर दिन औसतन 20,570 आवेदनों की फाइलों को आगे बढ़ाना होगा और उन्हें धरातल पर उतारना होगा। लोगों ने सबसे ज्यादा मांगें सड़क, बिजली, पानी, सिंचाई और आवास को लेकर की हैं। यह अभियान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बेहद अहम प्रोजेक्ट है। मुख्यमंत्री खुद इस बात की निगरानी कर रहे हैं कि फाइलों पर क्या कार्रवाई हो रही है। अधिकारियों को हर दिन मुख्यमंत्री सचिवालय को रिपोर्ट देनी होगी कि उन्होंने कितने आवेदनों का निपटारा किया। अफसरों के इसी काम के आधार पर तय होगा कि उनकी अगली पोस्टिंग कहां होगी।
छत्तीसगढ़ में कॉलेजों के एडमिशन 16 जून से, छात्र यूनिवर्सिटी पोर्टल पर कर सकेंगे अप्लाई
रायपुर। छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए तारीखों का एलान कर दिया है। राज्य के कॉलेजों में प्रथम सेमेस्टर के लिए दाखिले की प्रक्रिया 16 जून 2026 से शुरू होगी। छात्र जुलाई के अंत तक कॉलेजों में सीधे एडमिशन ले सकेंगे। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने अप्रैल में ही 12वीं के नतीजे घोषित कर दिए थे, जिसके बाद से छात्र इस तारीख का इंतजार कर रहे थे। यदि जुलाई के बाद भी किसी कॉलेज में सीटें खाली रह जाती हैं, तो विशेष परिस्थिति में छात्र 14 अगस्त तक कुलपति की अनुमति से एडमिशन ले सकते हैं। यह प्रवेश प्रक्रिया सिर्फ पहले सेमेस्टर के छात्रों के लिए है। बाकी के सेमेस्टरों में दाखिले पुरानी कक्षाओं के नतीजे आने के 10 दिनों के भीतर शुरू होंगे। यूनिवर्सिटी ने एडमिशन के लिए अपने ऑनलाइन पोर्टल खोल दिए हैं। छात्र अपनी पसंदीदा यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर जाकर केंद्रीकृत व्यवस्था के तहत आवेदन कर सकते हैं। फॉर्म भरते समय छात्रों को अपनी पसंद के 5 कॉलेजों का विकल्प चुनना होगा, जिसके बाद मेरिट के आधार पर लिस्ट जारी की जाएगी।
स्मार्ट मीटर से आ रहा दोगुना बिल, पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने दी आंदोलन की चेतावनी
रायपुर। राजधानी रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में बिजली उपभोक्ताओं के एक्चुअल रीडिंग बिल और भुगतान वाले बिल की राशि में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। इस गड़बड़ी को लेकर पूर्व विधायक विकास उपाध्याय के नेतृत्व में कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) के प्रबंध निदेशक (एमडी) से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान एमडी ने माना कि बिजली बिल में गड़बड़ी के करीब 2700 मामले उनके सामने आ चुके हैं। विकास उपाध्याय ने कहा कि जब रायपुर जैसे शहर में यह हाल है, तो पूरे प्रदेश में लाखों लोग इस गड़बड़ी से परेशान होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली विभाग स्मार्ट मीटर लगाकर जनता को परेशान कर रहा है। जिन लोगों का बिल ऑनलाइन ऑटो-पे मोड पर है, उन्हें तो पता भी नहीं चल रहा कि उनके खाते से कितनी ज्यादा राशि कट रही है। कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि राज्य में स्मार्ट मीटर लगाने का काम तुरंत बंद किया जाए। पहले ही बिजली बिल हाफ योजना के तहत मिलने वाली 400 यूनिट की छूट बंद हो चुकी है, ऊपर से आ रहे इन भारी-भरकम बिलों से आम जनता त्रस्त है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस गड़बड़ी की जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई और स्मार्ट मीटर नहीं हटाए गए, तो कांग्रेस पार्टी ऊर्जा विभाग और मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेगी।
रायपुर में तेज आंधी और बारिश, उप मुख्यमंत्री साव और भूपेश बघेल की फ्लाइट नागपुर डायवर्ट
रायपुर। राजधानी रायपुर में मौसम के अचानक बदलने से हवाई सेवाओं पर बुरा असर पड़ा है। तेज आंधी, तूफान और भारी बारिश के कारण दृश्यता (विजिबिलिटी) काफी कम हो गई, जिसके चलते रायपुर आ रहे दो बड़े विमानों को लैंडिंग की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद दोनों उड़ानों को नागपुर के लिए डायवर्ट कर दिया गया। जानकारी के अनुसार एयर इंडिया की दिल्ली-रायपुर फ्लाइट (AI1718) को रायपुर में उतरने की जगह नागपुर भेजा गया। इस विमान में छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज समेत कई वरिष्ठ नेता सवार थे। इसके अलावा इंडिगो की हैदराबाद-रायपुर फ्लाइट (6E7248) को भी खराब मौसम के कारण नागपुर डायवर्ट करना पड़ा। रायपुर में दिनभर तेज धूप के बाद शाम को अचानक मौसम बदल गया था।



