
CG School Opening Date 2026: छत्तीसगढ़ में 16 जून से शुरू हो रहे नए शैक्षणिक सत्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ ने इस तपती गर्मी, उमस और जल संकट के बीच स्कूलों को खोलने के सरकार के फैसले का पुरजोर विरोध किया है। शिक्षक संगठन ने स्कूल शिक्षा मंत्री से इस संवेदनशील निर्णय पर तुरंत पुनर्विचार करने की गुहार लगाई है। संघ का कहना है कि नौनिहालों और शिक्षकों के स्वास्थ्य को दांव पर लगाकर इतनी जल्दी स्कूल खोलना किसी भी तरह से व्यावहारिक नहीं है।
1 जुलाई से शैक्षणिक सत्र शुरू करने का दिया सुझाव
नवीन शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत और जिलाध्यक्ष छन्नूलाल साहू ने शिक्षा विभाग के इस आदेश पर अपनी गहरी चिंता जाहिर की है। संगठन ने सरकार को लिखित सुझाव देते हुए मांग की है कि वर्तमान मौसमी परिस्थितियों को देखते हुए स्कूलों के संचालन की तारीख को आगे बढ़ाया जाए और इसे 1 जुलाई 2026 से नियमित किया जाए। उनका तर्क है कि जून के महीने में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सूरज के तल्ख तेवर और हवा में भारी उमस रहती है, जिससे खासकर प्राथमिक स्तर के छोटे बच्चों के बीमार पड़ने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।
बच्चों की सेहत और सुरक्षा को सर्वोपरि रखने की वकालत
शिक्षक संघ के प्रांतीय पदाधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि किसी भी नए सत्र की शुरुआत से ज्यादा जरूरी बच्चों की सुरक्षा और उनकी सेहत होनी चाहिए। कई मैदानी जिलों में जून के मध्य में भी पारा सामान्य से ऊपर चल रहा है और दोपहर के वक्त लू के थपेड़े आम जनता को बेहाल कर रहे हैं। ऐसे में सुबह और दोपहर की पालियों में स्कूल आने-जाने वाले छात्र-छात्राओं को गंभीर शारीरिक दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। संघ के महिला प्रकोष्ठ की पदाधिकारियों ने भी इस मांग को जायज बताते हुए कहा कि मौसम के पूरी तरह सामान्य होने के बाद ही क्लास शुरू की जाएं।
ग्रामीण अंचलों के स्कूलों में गहराया पेयजल का गंभीर संकट
तारीख आगे बढ़ाने के पीछे केवल गर्मी ही नहीं, बल्कि पानी की भारी किल्लत भी एक बड़ी वजह बनकर सामने आई है। संघ के पदाधिकारियों ने मैदानी हकीकत बयां करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ के कई ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में भू-जल स्तर खतरनाक ढंग से नीचे गिर चुका है। इस वजह से स्कूलों में लगे सरकारी नलकूप और बोरवेल पूरी तरह सूख चुके हैं या बेहद कम पानी दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में अगर कल से स्कूल खुलते हैं, तो बच्चों के लिए पीने के साफ पानी और मध्याह्न भोजन के संचालन में भारी अव्यवस्था फैल जाएगी।
शिक्षक संघ के दर्जनों पदाधिकारियों ने सरकार से की अपील
इस विरोध प्रदर्शन और मांग पत्र को संगठन के भीतर व्यापक समर्थन मिला है। महिला विंग की उमा जाटव, बलविंदर कौर, गंगा शरण पासी, नंदिनी देशमुख और ज्योति सक्सेना सहित अन्य महिला नेताओं ने बच्चों के हित में आवाज उठाई है। वहीं दूसरी ओर प्रांतीय टीम के प्रमुख सदस्यों जैसे गिरीश साहू, अमितेश तिवारी, दुष्यंत कुम्भकार, रूपेंद्र सिन्हा, संजय साहू और प्रकाशचंद कांगे ने भी संयुक्त बयान जारी कर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से जमीनी दिक्कतों को समझते हुए स्कूलों को कुछ दिन और बंद रखने का आग्रह किया है।
पहली और छठवीं कक्षा में सीधे दाखिले की प्रशासनिक तैयारी
इस विरोध के बीच स्कूल शिक्षा विभाग अपनी प्रशासनिक तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है। नए सत्र में प्रवेश प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एक विशेष गाइडलाइन जारी की गई है। इसके तहत आंगनबाड़ी केंद्रों से बच्चों का पूरा रिकॉर्ड लेकर उन्हें सीधे सरकारी स्कूलों की पहली कक्षा में दाखिला दिया जाएगा। ठीक इसी तरह पांचवीं पास करने वाले विद्यार्थियों की सूची और टीसी सीधे नजदीकी माध्यमिक शालाओं को भेजकर उन्हें छठवीं क्लास में रोल नंबर आवंटित कर दिया जाएगा। साथ ही बीच में पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को दोबारा स्कूल लाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।



