धमतरी में गंगरेल बांध के पानी ने मचाई तबाही, जिले में 10 हजार एकड़ में धान की फसल डूबी, किसानों को राहत दिलाने शासन को भेजा गया विशेष प्रस्ताव

Dhamtari Gangrel Dam Flood Paddy Crop Loss: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में दो दिनों की भारी बारिश और गंगरेल बांध से छोड़े गए पानी ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। गंगरेल से रुद्री और महानदी में अचानक ढाई लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़े जाने के कारण तटीय इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए। कृषि विभाग के शुरुआती सर्वे के अनुसार जिले में लगभग 4000 हेक्टेयर यानी 10 हजार एकड़ में लगी खरीफ धान की तैयार फसल पूरी तरह पानी में डूब गई है। इससे क्षेत्र के सैकड़ों किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

अर्ली वैरायटी और गबोद अवस्था की फसल पर सबसे ज्यादा खतरा

Dhamtari Paddy Crop PM Fasal Bima Yojana Issue: उपसंचालक कृषि मोनेश कुमार साहू के मुताबिक, जलभराव वाले खेतों से अब पानी धीरे-धीरे निकल रहा है। हालांकि, खेतों में लंबे समय तक पानी ठहरा रहने के कारण जल्दी पकने वाली (अर्ली वैरायटी) धान की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचने की आशंका है। इसके अलावा जो फसल इस समय गबोद अवस्था में है, उसकी बालियों पर भी बुरा असर पड़ेगा। वहीं देरी से पकने वाली (लेट वैरायटी) फसल के तुलनात्मक रूप से सुरक्षित रहने की उम्मीद जताई जा रही है।

खेतों में बिछी रेत की परत, बह गई तैयार फसल

Dhamtari Flood News Agriculture Department Survey: बाढ़ के तेज बहाव के कारण महानदी किनारे स्थित दर्जनों गांवों के खेतों में पानी भर गया है। कई जगहों पर जलभराव के साथ-साथ उपजाऊ खेतों में रेत और मिट्टी की मोटी परत जम गई है, जिससे फसल दबकर नष्ट हो गई है। कुछ इलाकों में तेज धारा के साथ तैयार धान के पौधे बह गए हैं। मुजगहन, रत्नाबांधा, पोटियाडीह, परसतराई, खरतुली, कोलियारी, अछोटा, तेलीनसत्ती, रुद्री, खरेंगा, देवपुर, मुड़पार, बरारी और कोटाभर्री समेत कई गांवों में खेत तालाब में तब्दील नजर आ रहे हैं।

पीएम फसल बीमा कराने के बाद भी तकनीकी पेंच से नहीं मिलेगा लाभ

बाढ़ की मार झेल रहे किसानों ने प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसलों का बीमा कराया हुआ था, लेकिन मौजूदा स्थिति में उन्हें इसका सीधा लाभ मिलने में तकनीकी अड़चन आ रही है। बीमा योजना के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, फसल की कटाई के बाद अगले 14 दिनों के भीतर खेत में पानी भरने से हुए नुकसान को ही विशेष परिस्थितियों में कवर किया जाता है। चूंकि धान को तकनीकी रूप से जलीय पौधा माना जाता है, इसलिए खड़ी फसल में बाढ़ से हुए नुकसान पर बीमा दावा खारिज होने का खतरा बना हुआ है।

राहत राशि दिलाने के लिए शासन को भेजा गया विशेष प्रस्ताव

Dhamtari Flood Farmer Relief Government Proposal: बीमा नियमों के इस पेंच से किसानों को राहत दिलाने के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने पहल की है। धान को जलीय पौधा मानने की बाध्यता को शिथिल करते हुए इस विशेष परिस्थिति में प्रभावित किसानों को मुआवजा और बीमा लाभ देने के लिए शासन स्तर पर एक प्रस्ताव भेजा गया है। यदि राज्य सरकार इस प्रस्ताव को हरी झंडी देती है, तो न केवल इस बार प्रभावित किसानों को राहत मिलेगी, बल्कि आने वाले वर्षों में भी ऐसी स्थिति में किसानों के नुकसान की भरपाई का रास्ता साफ हो सकेगा।

समय पर पानी की निकासी ही बचा सकती है बची-कुची फसल

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खेतों में जमा बाढ़ का पानी दो से तीन दिनों के भीतर पूरी तरह बाहर निकल जाता है, तो पौधों के सड़ने की रफ्तार थम सकती है। लेकिन यदि जलजमाव हफ्तों तक बना रहा, तो धान की जड़ें गल जाएंगी और पूरी फसल सड़ जाएगी। फिलहाल किसान अपने स्तर पर खेतों की मेढ़ें तोड़कर पानी निकालने का जतन कर रहे हैं, ताकि किसी तरह अपनी बाकी बची फसल को बचाया जा सके।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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