CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें सुकमा की बेटियों का खेलो इंडिया फुटबॉल में स्वर्ण पदक, 28 जून को राहुल गांधी का दो दिवसीय रायपुर दौरा, बिलासपुर में 60 लाख का सर्पदंश मुआवजा घोटाला उजागर, गरियाबंद-कोरिया के जंगलों में भारी मात्रा में कीमती सागौन लकड़ी जब्त, 15 जून से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में नियमित सुनवाई शुरू, हसदेव अरण्य खदान विस्तार के खिलाफ जुटे 5 हजार लोग, पर्यावरण मंत्रालय ने हसदेव कोल ब्लॉक को दी मंजूरी, आरटीई के तहत निजी स्कूलों की 39% सीटें खाली रहीं, रायपुर नगर निगम की 26 करोड़ की महिला योजनाएं बंद पड़ीं, और मानसून प्रतिबंध के चलते राज्य में रेत की कीमतों में भारी उछाल समेत पढ़ें छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें…

CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की सभी बड़ी और छोटी खबरें रोजाना हमारी नजर में रहती हैं। दक्षिण कोसल के विशेष सेगमेंट ‘CG की 10 बड़ी खबरें’ में हम आपको समाचार जगत की हर गतिविधि का अपडेट सरल और सहज भाषा में प्रदान करेंगे। तो आइए, पत्रकारिता की इस दुनिया में बने रहें और छत्तीसगढ़ की हर ताजातरीन खबर से अपनी जानकारी को और विस्तृत करे
खेलो इंडिया में सुकमा की बेटियों का कमाल, फुटबॉल में जीता गोल्ड
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के सुदूर गांवों से निकली महिला फुटबॉल खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। पहले खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स में छत्तीसगढ़ की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। रायपुर में खेले गए इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता के बेहद रोमांचक फाइनल मैच में छत्तीसगढ़ ने झारखंड की टीम को शिकस्त दी। नक्सल प्रभावित और बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझने वाले सुकमा जैसे इलाके के लिए यह जीत एक बड़ी उम्मीद लेकर आई है। सरकारी खेल अकादमियों और सही ट्रेनिंग की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों की यह प्रतिभाएं अब देश के सामने आ रही हैं। इस ऐतिहासिक जीत में सुकमा जिले के कोंटा ब्लॉक के तहत आने वाले चिपुरपाल गांव की शारदा प्रधानी और कोलईगुड़ा गांव की पूजा माड़वी ने सबसे खास भूमिका निभाई। ये दोनों खिलाड़ी इस समय रायपुर की आवासीय खेल अकादमी में रहकर फुटबॉल की ट्रेनिंग ले रही हैं। टीम के कोच शिवेंद्र ठाकुर के मार्गदर्शन में खेलते हुए छत्तीसगढ़ की टीम ने पहले सेमीफाइनल में अरुणाचल प्रदेश को हराया और फिर फाइनल में झारखंड जैसी मजबूत टीम को मात देकर पहला स्थान हासिल किया। खिलाड़ियों की इस सफलता पर सुकमा जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने उन्हें बधाई दी है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बाद भी इन बेटियों ने राज्य का मान बढ़ाया है। सुकमा पहुंचने पर दोनों खिलाड़ियों ने कलेक्टर अमित कुमार से मुलाकात की। कलेक्टर ने उनकी लगन की तारीफ की और जिला प्रशासन की तरफ से दोनों को विवेकानंद युवा प्रोत्साहन योजना के तहत आर्थिक सहायता देने का फैसला किया। इस राशि से खिलाड़ियों को भविष्य में बेहतर खेल किट, पौष्टिक आहार और आगे की प्रतियोगिताओं की तैयारी में मदद मिलेगी।
राहुल गांधी का दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा, कांग्रेस के ट्रेनिंग कैंप में होंगे शामिल
रायपुर के कांग्रेस दफ्तर में इन दिनों राजनीतिक हलचल काफी तेज है। पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए आलाकमान ने एक नया प्लान तैयार किया है जिसकी शुरुआत छत्तीसगढ़ से हो रही है। राजधानी रायपुर में 21 जून से 30 जून तक 10 दिनों का एक विशेष ट्रेनिंग कैंप आयोजित किया जा रहा है। इस कैंप में राज्य भर के बड़े कांग्रेस नेता शामिल होंगे। इस बीच सबसे ज्यादा चर्चा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के दौरे को लेकर है।सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी 28 जून को दो दिनों के दौरे पर रायपुर आ रहे हैं। वे यहां चल रहे ट्रेनिंग कैंप में हिस्सा लेंगे और सीधे जिला व शहर अध्यक्षों से जमीनी हकीकत जानेंगे। राहुल गांधी खुद इस बात का फीडबैक लेंगे कि बूथ स्तर पर पार्टी किस तरह काम कर रही है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से पत्र जारी होने के बाद रायपुर में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इस दौरे के दौरान हर बूथ पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता को परखा जाएगा और नेताओं को जमीनी स्तर पर काम करने के गुर सिखाए जाएंगे। इस कैंप का मुख्य उद्देश्य संगठन को नए सिरे से मजबूत करना है ताकि कार्यकर्ता हर राजनीतिक चुनौती का सामना कर सकें।
बिलासपुर में सर्पदंश मुआवजा घोटाला, सामान्य मौतों को बता दिया सांप का काटना
बिलासपुर जिले में सरकारी मुआवजे की राशि हड़पने का एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। डॉक्टरों और वकीलों के एक गुट ने मिलकर जहर खाने से हुई मौतों और सामान्य मौतों को सांप के काटने से हुई मौत साबित कर दिया। इस तरह फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी खजाने से लगभग 60 लाख रुपये निकाल लिए गए। जांच में कुल 17 मामले पूरी तरह फर्जी पाए गए हैं जिसके बाद प्रशासन अब 15 से ज्यादा एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी में है। इस घोटाले को अंजाम देने के लिए दलालों ने डॉक्टरों, पुलिस जांच अधिकारियों और वकीलों के साथ मिलकर एक नेटवर्क बनाया था। खुदकुशी और सामान्य मौतों के मामलों में फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अस्पताल में भर्ती होने के नकली कागज तैयार किए गए। इसके बाद जिला प्रशासन से मुआवजा राशि ले ली गई। बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक सुशांत शुक्ला ने इस मामले को विधानसभा में उठाया था। इसके बाद सचिव स्तर की जांच हुई तो इस संगठित भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ। बिलासपुर के बिल्हा और सरकंडा थानों में पहले ही मामले दर्ज किए जा चुके हैं और अब बाकी थानों में भी केस दर्ज किया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि जशपुर जिले में, जिसे सांपों का इलाका कहा जाता है, वहां सर्पदंश से 96 मौतें हुईं और 3 करोड़ का मुआवजा बंटा। वहीं बिलासपुर में 431 मौतें दिखाकर 17 करोड़ से ज्यादा का मुआवजा बांट दिया गया। इसी भारी अंतर की वजह से पूरे मामले पर शक हुआ और जांच शुरू हुई। एसडीएम मनीष साहू के मुताबिक 17 मामलों में धोखाधड़ी पूरी तरह साबित हो चुकी है और जिम्मेदार डॉक्टरों व वकीलों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
छत्तीसगढ़ के जंगलों में पेड़ों की अवैध कटाई, भारी मात्रा में कीमती लकड़ी जब्त
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद और कोरिया जिले में बड़े पैमाने पर हरे-भरे पेड़ों को काटने का मामला सामने आया है। वन विभाग की टीम ने अलग-अलग जगहों पर छापेमारी कर भारी मात्रा में कीमती लकड़ियां जब्त की हैं जिससे वन अमले की सतर्कता पर सवाल उठ रहे हैं। पिछले दो दिनों में उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के पास ग्रामीणों द्वारा छिपाकर रखी गई सागौन की लकड़ियां मिली हैं। वहीं कोरिया वनमंडल में एक ट्रक में भरकर ले जाई जा रही कीमती लकड़ी पकड़ी गई है। उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व की टीम और गरियाबंद पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए ओडिशा सीमा से लगे दक्षिण उदंती क्षेत्र के साहेबिनकछार गांव में छापा मारा। वहां भारी मात्रा में सागौन से बने फर्नीचर और लकड़ियां बरामद हुईं। टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन के निर्देश पर वन विभाग की टीम ने संदिग्धों के घरों की तलाशी ली। कार्रवाई की खबर मिलते ही कुछ आरोपियों ने लकड़ियों को घरों के पीछे बने गड्ढों और तालाबों में छिपा दिया था। वन विभाग ने स्निफर डॉग टीना की मदद से इन जगहों से 193 नग सागौन के स्लीपर बरामद किए। जब्त की गई कुल लकड़ी की कीमत लगभग 6 लाख रुपये आंकी गई है। इसके साथ ही वन्यप्राणियों के शिकार में इस्तेमाल होने वाले जाल और पोटाश बम भी बरामद किए गए हैं।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में छुट्टियां खत्म, आज से नियमित तौर पर होगी मामलों की सुनवाई
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में गर्मी की छुट्टियां समाप्त हो गई हैं। 15 जून से अदालत में दोबारा नियमित रूप से न्यायिक कामकाज शुरू हो रहा है। इसके साथ ही हाईकोर्ट प्रशासन ने ईंधन बचाने, गाड़ियां साझा करने और वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था को खत्म करने के नए निर्देश भी जारी किए हैं।हाईकोर्ट में 18 मई से ग्रीष्मकालीन अवकाश चल रहा था। इस दौरान केवल जरूरी मामलों की सुनवाई के लिए वेकेशन बेंच बनाई गई थी जो हफ्ते में निर्धारित दिनों पर बैठती थी। अब सोमवार से सभी निर्धारित बेंचों में सामान्य रूप से सुनवाई शुरू हो जाएगी। हाईकोर्ट प्रशासन ने नए मुकदमों की सूची भी जारी कर दी है। इसके तहत वकीलों को अब सीधे कोर्ट रूम में आकर मामलों की पैरवी करनी होगी। हालांकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वर्चुअल सुनवाई में शामिल होने की सुविधा पहले की तरह मिलती रहेगी। इसके साथ ही कोर्ट के अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा गया है कि वे पेट्रोल-डीजल की बचत के लिए सरकारी गाड़ियों को आपस में साझा करें ताकि संसाधनों का सही उपयोग हो सके।
हसदेव अरण्य में खदान विस्तार के खिलाफ जुटे 5 हजार लोग, आंदोलन तेज
छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खदानों के विस्तार का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। रामगढ़ बचाओ संघर्ष समिति की ओर से आयोजित एक बड़ी चर्चा में पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव सहित हजारों लोग शामिल हुए। इस दौरान सिंहदेव ने कहा कि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है और इस लड़ाई को सबको मिलकर लड़ना होगा। केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने हसदेव क्षेत्र में स्थित केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को मंजूरी दे दी है जिससे इलाके के करीब 4.48 लाख पेड़ों के कटने का खतरा है। इस फैसले के विरोध में रामगढ़ की नाट्यशाला के पास एक बड़ी सभा हुई जिसमें आसपास के गांवों से 5 हजार से ज्यादा लोग पहुंचे। इस आंदोलन को विपक्ष के नेताओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों का भी समर्थन मिला है। टीएस सिंहदेव ने कहा कि सरकार की मंशा इस क्षेत्र को बचाने की नहीं है और उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भी लिखा था। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई शासन तंत्र और बड़े उद्योगपतियों के खिलाफ है जिसमें राजनीतिक दलों और एनजीओ को एक साथ आना होगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर हसदेव में 7 लाख से ज्यादा पेड़ काटने और 5000 हेक्टेयर जमीन खाली कराने की तैयारी में हैं। उन्होंने एलान किया कि जल, जमीन और जंगल बचाने के लिए आने वाले समय में एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा। हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति के संस्थापक आलोक शुक्ला ने बताया कि स्थानीय लोग पिछले 12 सालों से संघर्ष कर रहे हैं और खदानों के बढ़ने से पूरे छत्तीसगढ़ के पर्यावरण को भारी नुकसान होगा।
पर्यावरण मंत्रालय की हसदेव कोल ब्लॉक को मंजूरी, पहले 5 साल में कटेंगे 98 हजार पेड़
केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के हसदेव-अरण्य क्षेत्र में केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक के लिए 1,742 हेक्टेयर वन भूमि के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद से पर्यावरणविदों और स्थानीय संगठनों में चिंता बढ़ गई है क्योंकि इस परियोजना के कारण कुल 4.48 लाख पेड़ काटे जाने हैं। इनमें से लगभग 97,837 पेड़ पहले पांच वर्षों के भीतर ही काट दिए जाएंगे। साल 2021 में भारतीय वन्यजीव संस्थान की एक रिपोर्ट में हसदेव-अरण्य को बेहद संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया था। रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि इस क्षेत्र में किसी भी नई खदान को मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि यह इलाका हाथियों का प्रमुख निवास स्थान है। यहां खनन बढ़ने से इंसानों और हाथियों के बीच टकराव बढ़ने की आशंका है। हालांकि मंत्रालय ने कुछ शर्तों के साथ यह मंजूरी दी है जिसके तहत काम दो चरणों में होगा। पहले चरण में 15 सालों तक 1,001 हेक्टेयर भूमि पर खनन होगा और दूसरे चरण की अनुमति तभी मिलेगी जब पहले चरण में पुनर्वनीकरण की शर्तों को पूरा किया जाएगा। इस खदान से निकलने वाला कोयला राजस्थान के सरकारी बिजली संयंत्रों को भेजा जाएगा। पेड़ों की कटाई के बदले में अन्य जगहों पर नए पौधे लगाने और छोटे पेड़ों को दूसरी जगहों पर शिफ्ट करने के निर्देश भी दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि इस फैसले से स्थानीय आदिवासी समुदायों की आजीविका और पारंपरिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो जाएगा।
छत्तीसगढ़ आरटीई: आधी से ज्यादा सीटें खाली, 8500 गरीब बच्चों को नहीं मिला प्रवेश
छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) योजना के तहत निजी स्कूलों में गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों के दाखिले की स्थिति चिंताजनक है। राज्य के निजी स्कूलों में आरक्षित 21,975 सीटों में से इस बार केवल 13,383 सीटों पर ही एडमिशन हो पाया है। करीब 8,500 सीटें खाली रह गई हैं जो कुल सीटों का लगभग 39 प्रतिशत है। इससे साफ है कि योजना का लाभ जरूरतमंद बच्चों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा है। हैरानी की बात यह है कि रायपुर और बिलासपुर जैसे बड़े शहरों में भी बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गईं। रायपुर में 3,096 सीटों में से केवल 2,297 बच्चों को ही प्रवेश मिल सका और करीब 799 सीटें खाली रह गईं। आदिवासी बहुल जिलों में स्थिति सबसे ज्यादा खराब रही। सुकमा में 97 प्रतिशत, बीजापुर में 96 प्रतिशत और दंतेवाड़ा में 93 प्रतिशत आरटीई सीटें खाली रह गईं। दूरदराज के इलाकों में योजना को लेकर जागरूकता की भारी कमी देखी जा रही है। शिक्षा विभाग के मुताबिक एडमिशन न होने के पीछे कई वजहें हैं। कई मामलों में अभिभावक समय पर जरूरी दस्तावेज जमा नहीं कर पाए तो कुछ को पूरी प्रक्रिया की जानकारी ही नहीं थी। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों की दूरी भी एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ सीटें आरक्षित करना काफी नहीं है, बल्कि प्रक्रिया को सरल बनाकर बच्चों को स्कूल तक पहुंचाना असली चुनौती है। शिक्षा विभाग अब इस मामले की समीक्षा कर कमियों को दूर करने की तैयारी कर रहा है।
26 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी बंद पड़ी हैं महिलाओं से जुड़ी योजनाएं
रायपुर शहर में महिलाओं को रोजगार देने और उनके रहने की व्यवस्था के नाम पर करीब 26 करोड़ रुपये खर्च किए गए लेकिन ये दोनों बड़े प्रोजेक्ट आज तक शुरू नहीं हो सके। मोवा में बनाई गई 15 करोड़ रुपये की गारमेंट फैक्ट्री और पंडरी में बना 11 करोड़ रुपये का वर्किंग वुमन हॉस्टल लंबे समय से बंद पड़े हैं। नगर निगम अब नए प्रोजेक्ट की तैयारी कर रहा है जिससे पुराने प्रोजेक्ट्स पर सवाल उठ रहे हैं। मोवा इलाके में नगर निगम ने महिलाओं को सिलाई और कपड़ा उत्पादन से जोड़ने के लिए एक गारमेंट फैक्ट्री का निर्माण कराया था। भवन और मशीनें पूरी तरह तैयार थीं और योजना थी कि इससे करीब 2000 महिलाओं को रोजगार मिलेगा। निगम इस फैक्ट्री को पीपीपी मॉडल पर किसी निजी एजेंसी के जरिए चलाना चाहता था लेकिन कोई भी संस्था आगे नहीं आई जिससे दो साल बाद भी यह फैक्ट्री बंद पड़ी है। इसी तरह पंडरी में कामकाजी महिलाओं के लिए 11 करोड़ की लागत से चार मंजिला वर्किंग वुमन हॉस्टल बनाया गया था जिसमें 124 फ्लैट हैं। साल 2019 में तैयार हुए इस भवन में शहर से दूरी और सुरक्षा कारणों की वजह से कोई महिला रहने नहीं आई। कोरोना काल में इसका उपयोग कोविड सेंटर के रूप में हुआ था और बाद में इसे योग आयोग को किराए पर दे दिया गया जिससे इसका मूल उद्देश्य ही खत्म हो गया। अब नगर निगम नए सिरे से महिला शांति गृह और नए हॉस्टल बनाने का प्रस्ताव ला रहा है लेकिन पुराने प्रोजेक्ट्स की नाकामी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में मानसून की वजह से रेत खनन बंद, चार दिनों में बढ़े दाम
छत्तीसगढ़ में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के नियमों के तहत 10 जून से रेत के खनन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। यह प्रतिबंध मानसून को देखते हुए 10 अक्टूबर तक लागू रहेगा ताकि नदियों का प्राकृतिक प्रवाह बना रहे और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे। रायपुर जिले सहित पूरे प्रदेश में वैध रेत खदानें बंद होने से बाजार में रेत की सप्लाई अचानक कम हो गई है जिससे कीमतों में भारी उछाल आया है। पिछले चार दिनों के भीतर ही रायपुर के बाजार में रेत की कीमतों में 6 से 7 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। पहले जो मीडियम रेत का एक हाईवा 15 हजार रुपये में मिलता था, वह अब बढ़कर 21 से 22 हजार रुपये का हो गया है। इसी तरह बारीक रेत की कीमत भी 20 हजार से बढ़कर 27 से 28 हजार रुपये तक पहुंच गई है। दामों में अचानक आई इस तेजी से निर्माण कार्य कराने वाले आम लोग और ठेकेदार काफी परेशान हैं। खनिज विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बारिश के मौसम के लिए जिले में रेत का पर्याप्त स्टॉक जमा किया गया है और पिछले साल के मुकाबले इस बार ज्यादा भंडारण लाइसेंस दिए गए हैं। विभाग के मुताबिक बारिश के दौरान रेत की किल्लत नहीं होने दी जाएगी। अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर कहीं भी जमाखोरी या तय दाम से ज्यादा वसूली की शिकायत मिलती है तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



